हिंदू धर्म में शनिदेव को दंडाधिकारी के रूप में जाना जाता है। जब कोई भी इंसान अन्याय या किसी भी प्रकार का गलत काम करता है, शनिदेव उसे सजा जरूर देते हैं। इस स्टोरी में हम आपको बताने जा रहे हैं कि शनिदेव का रंग बिल्कुल काला क्यों है।

जी हां, इस बारे में एक कथा आती है कि महर्षि कश्यप के संरक्षण में शनिदेव का जन्म हुआ था। शनिदेव के जन्म के लिए महर्षि कश्यप ने एक यज्ञ कराया था। सूर्यदेव की पत्नी छाया भगवान शिव की पूजा करती थीं। जब शनिदेव उनकी गर्भ में थे, उन्हीं दिनों छाया ने भूखे-प्यासे रहकर महादेव की कठोर तपस्या की।

माना जाता है कि भूख, प्यास और धूप आदि सहने की वजह से गर्भ में ही शनिदेव का रंग काला पड़ गया।जन्म के समय शनिदेव काले पैदा हुए। भगवान सूर्य ने जब बेटे शनि का रंग काला देखा तो उन्हें अपनी पत्नी छाया पर शक हुआ।

उन्होंने अपने पति को अपमानित करते हुए कहा कि यह मेरा पुत्र नहीं हो सकता है। ऐसा सुनकर शनि को बहुत क्रोध आया और उन्होंने क्रोधित होकर जब अपने पिता सूर्य की तरफ देखा तो उनका रंग भी काला पड़ गया। इतना ही नहीं उनके घोड़ों की चाल रूक गई।

इसके बाद दे​वाधिदेव महादेव ने सूर्य को उनकी इस गलती का अहसास कराया। जब सूर्य ने अपने पुत्र शनिदेव से क्षमा याचना की तब जाकर उन्हें उनका असली रूप-रंग प्राप्त हो सका। माना जाता है कि तभी से शनिदेव और भगवान सूर्य के बीच के रिश्ते खराब चले आ रहे हैं।

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