इंटरनेट डेस्क। भारत रत्न के बाद देश का सबसे सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र माना जाता है। युद्ध के दौरान दुश्मनों के सामने अद्भुत शौर्य और साहस का प्रदर्शन करने पर यह सम्मान भारतीय सेना के रंणबाकुरों को दिया जाता है। अब तक सबसे ज्यादा 4 परमवीर चक्र विजेता उत्तर प्रदेश से हैं।

1- नायक जदुनाथ सिंह

यूपी के शाहजहांपुर जिले में मौजूद खजूरी गांव जदुनाथसिंह का जन्म 21 नवंबर 1916 को हुआ था। साल 1941 में जदुनाथ सिंह इंडियन आर्मी के राजपूत रेजीमेंट में भर्ती हुए। आजादी के बाद साल 1948 में कश्मीर पर कब्जे की नियत से जब काबाइलियों के वेश में पाकिस्तानी सैनिकों ने हमला कर दिया तब अकेले ही नायक जदुनाथ सिंह ने अपनी स्टेनगन से पाकिस्तानी दुश्मनों को पीछे भागने पर मजबूर कर दिया था। युद्ध के दौरान जदुनाथ के सिर में गोली लग गई, जिससे यह जाबांज वीरगति को प्राप्त हुआ। मरणोपरांत जदुनाथ सिंह को परमवीर चक्र से नवाजा गया।

2-हवलदार अब्दुल हमीद

कुश्ती के दांव पेच और लाठी चलाने में माहिर अब्दुल हमीद का जन्म यूपी के गाजीपुर जिले में स्थित धामूपुर में जुलाई 1933 को हुआ था। 21 साल की उम्र में अब्दुल हमीद सेना में शामिल हो गए। जम्मू में तैनाती के दौरान पाकिस्तानी आतंकवादी इनायत अली को हिरासत में लेने पर अब्दुल हमीद को लांसनायक के रूप में पदोन्नति दी गई। 1965 के भारत पाकिस्तान युद्ध में वह खेमकरण में तैनात थे। इस युद्ध में इस परमवीर चक्र विजेता ने 9 पाकिस्तानी पैटन टैंकों को अपनी जीप पर लगी मोर्टार गन से ध्वस्त कर दिया था। हमीद को पाकिस्तानियों ने घेर कर हमला किया था, जिसमें यह रणबांकुरा शहीद हो गया था। मरणोपरांत अब्दुल हमीद को महावीर चक्र, परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। इतना ही नहीं भारतीय डाक विभाग इस जांबाज के नाम से डाक टिकट भी जारी कर चुका है।

3- कैप्टन मनोज कुमार पांडे

यूपी के सीतापुर में स्थित रूधां गांव में जन्मे मनोज कुमार पांडे ने नेशनल डिफेंस एकेडमी, पुणे में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर 11 गोरखा राइफल्स रेजीमेंट की पहली बटालियन में बतौर कमिशंड आफिसर शामिल हुए। 1999 के कारगिल युद्ध में 19 हजार 700 फुट की ऊंचाई मौजूद खलूबार पोस्ट को अपने कब्जे में ले लिया था। इस युद्ध में मनोज पांडे ने कई पाकिस्तानी बंकरों को ध्वस्त करते हुए कुल 11 दुश्मनों को अपनी गोलियों का निशाना बनाया था। लेकिन दुश्मन की एक गोली उनके माथे पर लगी और देश के लिए शहीद हो गए। युद्धोपरांत इस 24 वर्षीय शहीद को परमवीर चक्र दिया गया।

4- ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव (जीवित)

उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर में पड़ने वाले औरंगाबाद के अहीर गांव में ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव का जन्म 10 मई 1980 को हुआ था। योगेंद्र यादव भारतीय सेना के 18 ग्रेनेडियर बटालियन में भर्ती होकर मात्र 19 वर्ष की उम्र में जीवित रहते हुए ही परमवीर चक्र पाने वाले पहले भारतीय सैनिक हैं। 1999 के युद्ध में ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव टाइगर हिल पर तिरंगा लहराने का काम किया।

7 सैनिकों की टुकड़ी में शामिल योगेंद्र सिंह जीवित बचने वाले एक मात्र भारतीय सैनिक हैं। हाथ टूटने के बावजूद भी इस रणबांकुरे ने करीब 15-20 घुसपैठियों को मौंत की नींद सुला दी। एक के बाद एक तीन चौकियों पर कब्जा करते हुए भारतीय सेना के पोस्ट टाइगर हिल पर तिरंगा लहराने में कामयाब रहे।

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