आज घड़ी हमारे जीवन का महत्पूर्ण हिस्सा है। अलार्म यानी घड़ी की हमारी ज़िंदगी में क्या अहमियत है यह शायद शब्दों में बयां ना हो पाए लेकिन सुबह अलार्म न बजे तो शायद हम वक्त पर काम पर न जा पाएं। घर की कामकाजी महिला हो या हमें जरुरी काम के लिए सुबह जल्दी उठना हो सभी के लिए घड़ी का अलार्म बजना जरुरी है। घड़ी हमारी ज़िंदगी का एक अभिन्न अंग बन चुकी है। लेकिन सोचिए ........ जब घड़ी नहीं थी, अलार्म बजता था तब कैसे लोगों को जगाया जाता था।

'जगाने का काम' एक पेशा
आपको जानकर अजीब लगेगा लेकिन यह सच है पहले जब घड़ी नहीं थी। अलार्म नहीं बजता था तब लोगों को अपने काम समय पर पूरा करने के लिए ,लोगों को जगाने के लिए काम पर रखा जाता था। यानी उस वक्त लोगों के लिए अलार्म क्लॉक बनना एक नौकरी पेशा था। लंदन में ब्रेंटन स्ट्रीट की रहने वाली मैरी स्मिथ उस समय यही काम करती थी। वे लोगों के लिए मानव अलार्म क्लॉक घड़ी का काम करती थी।
लगातार दरवाजों को खटकटाना
लोग कई बार नींद से जगाने के लिए दरवाज़े को खटकटाते रहते थे। जिससे नींद खुल जाती थी इसके आलावा एक लंबी स्टिक का भी इस्तेमाल किया जाता था ताकि इससे अन्य लोगों को डिस्टर्ब न हो।

कुछ लोग पहले मटर के दाने और हथौड़े का इस्तेमाल भी किया करते थे।


कहा जाता था 'नॉकर अपर'
लोगों को जगाने का पेशा करने वाले लोगों को 'नॉकर अपर' कहा जाता था। यह मानव अलार्म क्लॉक लोगों को उठाने के लिए कई प्रकार के अलग - अलग तकनीकों का इस्तेमाल करते थे।

Related News