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दोस्तों, आपको जानकारी के लिए बता दें कि 24 सितंबर से शुरू होने वाला पितृ पक्ष 9 अक्तूबर तक चलेगा। 8 अक्तूबर को चतुर्दशी का श्राद्ध तथा 9 अक्तूबर को अमावस्या का श्राद्ध किया जाएगा। पितृ पक्ष के दौरान घर में प्याज, लहसुन, मांस-मंदिरा, दातून, पान, तेल मालिश और शुभ कार्य प्रतिबंधित है।

गरुड़ पुराण के मुताबिक, जिन जातकों को अपनी माता के मौत की ​तिथि याद नहीं है, वह उनका श्राद्ध मातृ नवमी के दिन करें। यदि यज्ञोपवीत होने से पहले अकाल मृत्यु हो गई हो तो ऐसे पितरों का श्राद्ध अष्टमी के दिन किया जाना चाहिए। जिन पितरों की मृत्यु तिथि का कोई ज्ञान न हो उन सभी का श्राद्ध सर्व पितृ विसर्जनी अमावस्या के दिन किया जाना चाहिए।

हिंदू धर्मशास्त्रों के अनुसार, मनुष्यों के लिए तीन ऋण- पितृ ऋण, देव ऋण और ऋषि ऋण बताए गए हैं। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान पितरों की भक्ति, उपासना करके यह तीनों ऋण उतारने का प्रयत्न करना चाहिए।

श्राद्ध कर्म करने की विशेष तिथियां

25 सितंबर : प्रतिपदा का श्राद्ध

3 अक्तूबर : मातृ नवमी (माता की मृत्यु की तिथि ज्ञात न होने पर श्राद्ध का विधान)

8 अक्तूबर : पितृ अमावस्या (मृतक की तिथि ज्ञात न हो)

श्राद्ध कर्म करते समय रखें यह खास ध्यान

- जातक जब अपने पितरों को श्राद्ध, पिंडदान या पंडित को भोजन दें, तब वह पान मसाला, तंबाकू, शराब, मांस से दूर रहें।

-महिला जातक जल अर्पण, श्राद्ध कर्म या पंडित को भोजन देते समय बाल खुले न रखें।

- पितृ पक्ष में गेहूं, जौ, मूंग,धान, तिल, गाय, चना, भूमि, गुड़,घी, नमक, वस्त्र, सोना या चांदी का दान करें।

- अकाल मौत प्राप्त करने वाले पूर्वजों का श्राद्ध कर्म अमावस्या और पूर्णिमा के दिन कर सकते हैं।

- जल अर्पण के साथ भोजन में काले तिल का उपयोग अवश्य करें।

- साफ आसन पर बैठाकर पंडित को भोजन परोसते समय मौन रहें।

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