हिन्दू धर्म के अंतर्गत पूजा पाठ का विधान है,लेकिन बात करे सनातन धर्म की तो पूजा पाठ के साथ साथ बहुत से ऐसे कार्य हर जो हर मनुष्य को करना चाहिये। कहा जाता है अगर ईस्वर की पूजा करने के साथ साथ अगर आप इस कार्यो को नकारते है तो आप पूजा व्यर्थ है।


मंदिर की साफ-सफाई
हिन्दू पौराणिक दस्तावेजों के अनुसार धरती पर मंदिर को ही भगवान का घर माना गया है, फिर चाहे वह मंदिर आपके घर का ही क्यों न हो। यह वो स्थान है जहां स्वयं ईश्वर विराजमान होते हैं, और अगर परिवार के लोग इस स्थान की साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखेंगे तो यह ना सिर्फ देवताओं को रुष्ट करता है बल्कि आपके कुंडली के ग्रह भी इससे क्रोधित होकर अपना अशुभ फल देने लगते हैं।

रसोई की सफाई
घर की रसोई मां अन्नपूर्णा का स्थान है,इसकी साफ-सफाई और स्वच्छता का ध्यान हमेशा रखा जाना चाहिए, अन्यथा देवी क्रोधित हो सकती है। अन्नपूर्णा देवी ही घर में धन-धान्य की कमी नहीं होने देती, उन्हें प्रसन्न करने के लिए घर रसोई का व्यवस्थित और स्वच्छ होना अनिवार्य है। वहीं दूसरी ओर ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से बिखरी और अव्यवस्थित रसोई की वजह से मंगल ग्रह के दोष बढ़ते हैं..जिससे जातक को भूमि और भवन संबंधी कार्यों में नुकसान उठाना पड़ सकता है,इसके अलावा अविवाहित लोगों के विवाह में भी देरी हो सकती है।


मेहमान को ठंडा पानी पिलाना
घर आए मेहमान को ठंडा पानी पिलने से राहु-केतु से संबंधित दोष शांत होते हैं और घर में खुशहाली भी आती है। मेहमान को ठंडा पानी पिलाना आपकी कुंडली के कालसर्प दोष को भी शांत या उसके प्रभाव को न्यूनतम करता है।


बुजुर्गों को सम्मान
पौराणिक दस्तावेजों में इस अबात का उल्लेख मिलता है कि जिस घर में बुजुर्गों का सम्मान नहीं होत वहां धन नहीं ठहरता, वहां बरकत नहीं होती। घर के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान ना कर आप अपनीकुंडली के दोषों को और प्रभावी बना लेते हैं,ऐसा करने के बाद आप कितनी ही पाठ पूजा क्यों ना करे लें,वह व्यर्थ ही जाती है।

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