मोदी कैबिनेट की मंजूरी अब नागरिकता संशोधन बिल को मिल गई है। अब संसद के सदन में ही ये बिल पेश किया जा सकता है और विपक्ष द्वारा भी इस बिल को कड़ा विरोध मिलने की संभावना है। तो आप पूछेंगे कि आखिर नागरिकत संशोधन बिल क्या है और इस पर हंगामा क्यों हो रहा है।

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नागरिकता संशोधन बिल 2016?

नागरिकता (संशोधन) विधेयक या सीएबी, जो भारत के नागरिक बनने के लिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लिए इसे आसान बनाना चाहता है। संशोधन के बाद इस बिल के अनुसार छह साल गुजारने वाले अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के छह धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और इसाई) के लोगों को बिना उचित दस्तावेज के भारतीय नागरिकता मिल जाएगी। इस बिल को जनवरी में लोकसभा ने पारित कर दिया था, लेकिन राज्यसभा में मंजूरी नहीं मिलने से यह चूक गया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को भाजपा सांसदों से कहा कि यह विधेयक सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है, जितना महत्वपूर्ण जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने का अनुच्छेद 370 है उतना ही महत्वपूर्ण ये भी है। इसे नागरिकता संशोधन बिल 2016 नाम दिया गया है।

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क्यों हो रहा है विरोध?

कई पार्टियां जैसे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, असम गण परिषद (एजीपी) आदि इसका विरोध कर रहे हैं और कह रहे हैं कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और धर्म के आधार पर किसी को भारत की नागरिकता नहीं दी जा सकती है। इसलिए हर तरफ से इसका विरोध किया जा रहा है। अगर बिल लोकसभा से पास हो गया तो ये 1985 के 'असम समझौते' को अमान्य कर देगा।

बिल पास करवाना आसान नहीं

इस बार भी इस बिल को पास करवाना किसी चुनौती से कम नहीं है। राज्यसभा में वर्तमान सांसदों की संख्या 239 है। ऐसे में कम से कम 120 सांसदों का वोट मिलना जरूरी है। जबकि बीजेपी के पास 81 सांसद हैं। ऐसे में बीजेपी को 39 वोट्स और लेने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी।

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