बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्षों पहले ही कह दिया था कि मेरे आदर्श तो शेरशाह सूरी हैं, उन्हीं से मुझे प्रेरणा मिलती है, वहीं जीतनराम मांझी ने भी कभी खुद की तुलना शेरशाह सूरी से करते हुए कहा था कि मैंने भी बहुत कम समय में बहुत ज्यादा काम किए। आईए जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर इस मुसलमान राजा में ऐसी कौन सी खास बात थी, जिसे बिहार की यह दो बड़ी हस्तियां अपना आदर्श मानने पर मजबूर हैं।

जैसा कि इस राजा का नाम है शेरशाह सूरी। नाम से पता चलता है कि ये लोग पश्तूनी अफगान माने जाते थे। शेरशाह के बचपन का नाम फरीद खान खान था। फरीद के पिता हसन खान बहलोल लोदी के यहां नौकरी करते थे। फरीद के दादा इब्राहिम खान सूरी नारनौल के जागीरदार हुआ करते थे। आज भी नारनौल में इब्राहिम खान का स्मारक है।

फरीद ने एक बार शेर को मार डाला था, तब से उसका नाम शेर खान पड़ गया। शेर खान की अपनी सौतेली मां से कभी नहीं बनी। वह घर छोड़कर जौनपुर के गवर्नर जमाल खान की सेवा में चला गया। इसके बाद वह जौनपुर से तालीम हासिल कर बिहार के सूबेदार बहार खान लोहानी के यहां नौकरी करने लगा।

बहार खान लोहानी से अनबन होने पर वह बाबर की सेना में नौकरी करने चला गया, लेकिन उसने वहां नई तकनीक सीखी थी, जिसकी बदौलत कभी बाबर ने इब्राहिम लोदी और राणा सांगा को हराया था। मौके का फायदा उठाकर शेरशाह बिहार का सूबेदार बन बैठा। जब वह बिहार का गर्वनर बना तो कोई शक्तिशाली राजा बिहार को तवज्जों नहीं देना चाहता था। ऐसे में शेरशाह सूरी ने अपनी सेना और ताकत में इजाफा किया।

बाबर की मौत के बाद हुमायूं बंगाल विद्रोह का दमन करने वापस लौटने लगा तो बीच रास्ते में ही शेरशाह सूरी ने उससे दो-दो हाथ करने की सोची। 1539 में बक्सर के पास चौसा में युद्ध हुआ। इस युद्ध में हुमायूं को जान बचाकर भागना पड़ा। इसके बाद 1540 में कन्नौज में भी हुमायूं और शेरशाह की भिड़ंत हुई। यहां भी हुमायूं को करारी हार मिली। इसके बाद वह देश छोड़कर भाग गया। फिर क्या था शेरशाह सूरी ने धीरे-धीरे मुल्तान, मालवा, सिंध, मारवाड़ और मेवाड़ सहित बंगाल, बिहार और पंजाब पर अधिकार कर लिया।

तो आईए जानें, शेरशाह से जुड़ी कुछ खास बातें।

- शेरशाह अपनी प्रशासनिक क्षमता के लिए जाना जाता है। उसके राजस्व मंत्री टोडरमल को भी बाद में अकबर ने भी नियुक्त किया था।

- शेरशाह ने जंगल में लोमड़ियों का शिकार करने वाले एक गरीब आदमी खावस खान को अपना कमांडर बना लिया था।

- शेरशाह के राज में कोई सांप्रदायिक बात नहीं उठती थी। क्योंकि वह हिंदू-मुसलमान दोनों को साधकर रखता था। जहां औरंगजेब पर मुस्लिम कट्टरता के आरोप लगते हैं, वहीं अकबर से मुस्लिम इसलिए नाराज थे कि वह हिंदुओं को प्रश्रय देता था।

- पेशावर से लेकर कलकत्ता तक फेमस जीटी रोड का निर्माणकर्ता भी शेरशाह सूरी ही था।

- शेरशाह के राज में कोई भी गरीब आदमी सोने से भरा थैला लेकर कहीं भी आराम से सो सकता था।

-अकबर शेरशाह सूरी के बनाए राज्य के आधार पर ही आगे बढ़ता रहा।

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