इंटरनेट डेस्क: जैसे जैसे लोकसभा चुनाव की तरीख नजदिक आती जा रही है वैसे वैसे सभी पार्टियों के मुद्दे और देश की जनता की मांगे भी सामने आने लगी है कई पार्टिया इस बार गटबंधन पर जोर देती नजर आ रही है तो कई पार्टी ऐसी भी है जो राज्य के विकास के मुद्दे को अहम मानते हुए गठबंधन से किनारे बनाने मेें लगी है दरअसल, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की खबरे इन दिनों खूब चल रही है लेकिन इसके बीच कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने लोकसभा चुनावों के लिए दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे को चुनावी मुद्दा मानने से इंकार कर दिया


तो वहीं पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित ने इस संबंध में बुधवार को कहा कि कांग्रेस राष्ट्रीय मसलों पर चुनाव लड़ेगी और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा, प्रचार अभियान के समय नहीं उठाया जाएगा तो वहीं, दूसरी तरफ दिल्ली की सत्तारूढ़ पार्टी आप लोकसभा चुनावों के लिए मुख्य मुद्दा दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को मान रही है आम पार्टी इस मुद्दे को लेकर इस बार चुनाव लडऩे के मुड में है, इसे लेकर मंगलवार को दिल्ली में एक चुनावी सभा में बोलते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि आप हमें दिल्ली की सातों सीट दिला दें हम पूर्ण राज्य का दर्जा केंद्र सरकार से छीनकर आपको देने वाले है

यहीं नहीं मुख्यमंत्री केजरीवाल ने आगे कहा कि दूसरे राज्यों के एक मतदाता का एक वोट होता है, जबकि दिल्ली के मतदाताओं का वोट आधा हो गया है, हर साल दिल्ली के लोग केंद्र सरकार को डेढ़ लाख करोड़ रुपए का टैक्स देती है, इसके बावजूद यहां वोटर का वोट आधा ही है इनमें से सिर्फ दिल्ली को सिर्फ 325 करोड़ रुपए दिए जाते है उन्होंने कहा की कम से कम दिल्ली को पचास हजार करोड़ रुपए देने चाहिए ऐसे में जब भी पूर्ण राज्य का दर्जा मिला तो हमें हर विकास कार्य के लिए केंद्र की ओर नहीं देखना होगा केजरीवाल ने इस मुद्दे पर आगे बोलते हुए कहा की 70 सालों में कांग्रेस और भाजपा ने सिर्फ अपनी जेबे भरी हैं 4 साल में मोदी सरकार ने हमारे काम रोकने में कोई कसर नहीं छोड़ी, जिससे जनता का नुकसान हुआ, उन्होंने कहा की मुझसे लोग पूछते हैं कि शीला दीक्षित कैसे सरकार चलाती थीं, तो मैंने जवाब दिया कि उनके जैसी सरकार हम भी चला सकते हैं लेकिन फिर हमें आम आदमी पार्टी बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी

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