दोस्तों, यह बात सभी जानते हैं कि भारतीय सेना में मौजूद सैन्य जहाज अक्सर दुर्घटना के शिकार होते रहते हैं। फरवरी 2017 में जारी डेटा के मुताबिक, उससे पूर्व के 4 वर्षों में कुल 39 प्लेन क्रैश हो चुके हैं। सितंबर 2017 में भी दो मिग-21 दुर्घटनाग्रस्त हुए थे।

सीएजी की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड निर्मित 80 मिसाइल सिस्टम में से 30 फ़ीसदी आकाश मिसाइल सिस्टम बुनियादी परीक्षण में ही नाकाम रहे। रिपोर्ट के मुताबिक, यह आकाश मिसाइलें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में नाकाम रहीं तथा उनकी गति भी कम थी। इनमें से दो मिसाइलें तो बूस्टर नोज़ल के चलते अपने जगह से हिली तक नहीं।

मार्च 2017 में जारी सीएजी की इस रिपोर्ट के जवाब में इंडियन एयरफोर्स ने कहा ​था कि असफल मिसाइलों को बदला जा रहा है। सीएजी इस बात का भी खुलासा कर चुकी है कि भारत सरकार साल 2016 में भारत-चीन सीमा पर आकाश मिसाइल तैनात करने की घोषणा की थी। रिपोर्ट के अनुसार, इन मिसाइलों की नाकामी अंतरराष्ट्रीय मानकों से कहीं ज़्यादा है। लिहाजा भारत-चीन सीमा पर इनकी तैनाती नहीं की जा सकी थी।

सीएजी यह बात बहुत पहले ही कह चुकी है कि इंडियन आर्मी के पास केवल 10 दिनों तक लड़ने के लिए गोला-बारूद है। अब आप सोच सकते हैं कि भारत किस आधार पर पड़ोसी देशों से एक साथ निपटने की बात करता है। साउथ एशियन स्टडी सेंटर, जेएनयू की प्रोफ़ेसर सबिता पांडे के अनुसार, किसी भी देश के लिए दो मोर्चे पर युद्ध लड़ना बहुत कठिन होता है।

गौरतलब है कि ​पिछले बजट में भारत ने कुल जीडीपी का 1.6 फ़ीसदी हिस्सा रक्षा पर खर्च किया था। जबकि इसकी तुलना में पाकिस्तान ने 2.36 फ़ीसदी तथा चीन ने जीडीपी का 2.1 फ़ीसदी हिस्सा रक्षा पर खर्च करने के लिए आवंटित किया।

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