बता दें कि भारतीय राजनीति वंशवाद के साए से अभी तब उबर नहीं पाई है। बावजूद इसके भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे राजनेता भी हैं, जिन्होंने छात्र राजनीति में अपनी पैठ बनाकर संसद तक का सफर तय किया है। आज की तारीख में ये नेता देश के शीर्ष राजनेताओं में शुमार किए जाते हैं। बता दें कि विभिन्न विश्वविद्यालयों से चुने गए इन छात्र नेताओं का आज राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा कद है।

1. सुषमा स्वराज– भारतीय जनता पार्टी
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानि एबीवीपी के जरिए 1970 के दशक में सुषमा स्वराज ने हरियाणा में अपनी राजनीतिक करियर की शुरूआत की थी। पेश से वकालत करने वाली सुषमा स्वराज 25 वर्ष की उम्र में हरियाणा सरकार में मंत्री बनी। सुषमा स्वराज साल 1990 में पहली बार राज्य सभा सदस्य बनीं। इसके बाद 1996 में दक्षिण दिल्ली से लोक सभा सीट जीतकर पार्लियामेंट पहुंचीं। सुषमा स्वराज दिल्ली की मुख्यमंत्री, लोक सभा में नेता विपक्ष, केंद्र सरकार में सूचना-प्रसारण मंत्री तथा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री भी रह चुकी हैं। मौजूदा मोदी सरकार में सुषमा स्वराज विदेश मंत्री हैं।

2. लालू प्रसाद यादव – राष्ट्रीय जनता दल
वकालत की पढ़ाई करते समय लालू प्रसाद यादव पटना यूनिवर्सिटी के लॉ कॉलेज में छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद जेपी आंदोलन में छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष बनाए गए। 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। 29 वर्षीय लालू यादव संसद के सबसे युवा सांसद थे। इसके बाद लालू यादव 1990-97 के बीच बिहार के मुख्यमंत्री बने रहे। 2004-2009 तक यूपीए सरकार में लालू यादव रेल मंत्री भी रहे। मौजूदा समय में लालू यादव राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

3. ममता बनर्जी – तृणमूल कांग्रेस
तृणमूल कांग्रेस की मुखिया ममता बनर्जी 1970 में कोलकाता में कांग्रेस के छात्र संगठन से जुड़ी। उन दिनों वह एक तेज़-तर्रार महिला नेता के तौर पर उभरीं। 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद ममता बनर्जी पहली बार जादवपुर लोकसभा सीट से सांसद बनीं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल यूथ कांग्रेस की अध्यक्ष, नरसिंह राव सरकार में मानव-संसाधन मंत्री तथा अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री बनीं। इसके बाद 1997 में ममता बनर्जी ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। मौजूदा समय में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं।

4. सीताराम येचुरी– मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली के छात्र संघ अध्यक्ष रह चुके सीताराम येचुरी 1985 में सीपीएम की सेंट्रल कमेटी में और 1992 में पोलित ब्यूरो में चुने गए। साल 2005 से ही सीताराम येचुरी राज्य सभा सांसद हैं। वर्तमान में येचुरी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं।

5. नीतीश कुमार –जनता दल यूनाइटेड
इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करते समय नीतीश कुमार बिहार अभियंत्रण महाविद्यालय स्टुडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष बने। जेपी आंदोलन के दौरान नीतीश कुमार ने छात्र संघर्ष समिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आपातकाल के दिनों में नीतीश कुमार को भी जेल जाना पड़ा।

नीतीश कुमार 1985 में लोकदल से पहली बार विधायक बने। इसके बाद उन्होंने 6 बार लोकसभा सीट जीती। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में नीतीश कुमार रेल मंत्री बनाए गए। नीतीश कुमार वर्तमान में बिहार के मुख्यमंत्री पद पर आसीन हैं।

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