ज्योतिष की रत्न शाखा में मोती धारण करने से मन एकाग्र होता है। नकारात्‍मक सोच, मानसिक तनाव जैसी समस्याओं में भी मोती धारण करने से लाभ होता है। लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को मोती धारण नहीं करना चाहिए। मोती सभी व्‍यक्‍तियों के लिए शुभ हो ऐसा जरुरी नहीं है। अनेक स्थितियों में मोती व्‍यक्‍ति के लिए मारक रत्न का कार्य भी कर सकता है और इससे स्वास्थ्‍य कष्ट, बीमारियां, दुर्घटनाएं और संघर्ष बढ़ सकता है। ऐसे में बिना विशेषज्ञ की सलाह के मोती कभी भी धारण ना करें।

कुंडली में चन्द्रमा कमजोर होने पर मोती धारण की सलाह केवल उन्ही व्यक्तियों को दी जाती है जिनकी कुंडली में चन्द्रमा शुभ कारक ग्रह होता है। मेष, कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न के जातकों के लिए मोती धारण शुभ है। इसके अलावा वृष, मिथुन, कन्या, तुला और मकर लग्न के लिए मध्यम है अतः इन लग्नों में भी विशेषज्ञ से परामर्श के बाद ही मोती धारण किया जा सकता है।


मोती को चांदी की अंगूठी में बनवाकर सीधे हाथ की कनिष्ठा या अनामिका उंगली में धारण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त सफ़ेद धागे या चांदी की चेन के साथ लॉकेट के रूप में गले में भी धारण किया जा सकता है। मोती को सोमवार के दिन प्रातःकाल सर्वप्रथम गाय के कच्चे दूध एवं गंगाजल से अभिषेक करके धूप-दीप जलाकर चन्द्रमा के मन्त्र ‘ॐ सोम सोमाय नमः’ का तीन माला जाप करना चाहिए। फिर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके मोती धारण करना चाहिए।

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