Sports News- आजादी से पहले ही ये महान खिलाड़ी बन चुके थे भारत की पहचान, आइए जानें इनके बारे में

 
Sports News- आजादी से पहले ही ये महान खिलाड़ी बन चुके थे भारत की पहचान, आइए जानें इनके बारे में स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं....... दोस्तो आज हम सब 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और इन 80 सालों में हमारा देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है। खेल के मैदान में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। क्रिकेट विश्व कप से लेकर ओलंपिक पदकों तक, भारतीय खिलाड़ी लगातार तिरंगे का गौरव बढ़ा रहे हैं।लेकिन क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने से पहले भी कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया था, आइए जानते हैं इन खिलाड़ियों के बारे में-  1. नॉर्मन प्रिचर्ड –  नॉर्मन प्रिचर्ड का नाम भारत के शुरुआती ओलंपिक इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है। वर्ष 1875 में कलकत्ता में जन्मे प्रिचर्ड ब्रिटिश मूल के एथलीट थे और उन्हें ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले खिलाड़ी के रूप में जाना जाता है।उन्होंने 1900 के पेरिस ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए 200 मीटर दौड़ और 200 मीटर बाधा दौड़ में दो रजत पदक जीते।  2. मेजर ध्यानचंद – हॉकी के जादूगर भारतीय खेल इतिहास में मेजर ध्यानचंद का नाम सबसे महान खिलाड़ियों में लिया जाता है। हॉकी के इस दिग्गज ने स्वतंत्रता से पहले भारत को लगातार तीन ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी उपलब्धियां: 1928 एम्सटर्डम ओलंपिक: भारत ने स्वर्ण पदक जीता और ध्यानचंद ने शानदार प्रदर्शन किया। 1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक: भारत ने फिर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 1936 बर्लिन ओलंपिक: ध्यानचंद की अगुवाई में भारत ने लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीता। 1928 ओलंपिक में उन्होंने सिर्फ पांच मैचों में 14 गोल किए। 1932 में अमेरिका के खिलाफ भारत की 24-1 की जीत में ध्यानचंद ने 8 गोल दागे। 1936 के फाइनल में जर्मनी के खिलाफ उन्होंने हैट्रिक लगाई और भारत ने 8-1 से जीत दर्ज की। उनके शानदार खेल के कारण उन्हें भारतीय हॉकी का 'जादूगर' कहा जाता है। 3. कर्नल सी.के. नायडू – भारत के पहले टेस्ट कप्तान भारत में क्रिकेट की शुरुआत 19वीं सदी के दौरान हुई, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में भारत ने 1932 में कदम रखा। भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेला।इस ऐतिहासिक मुकाबले में भारतीय टीम की कप्तानी कर्नल सी.के. नायडू ने की। अपने 7 टेस्ट मैचों के करियर में नायडू ने 350 रन बनाए और 9 विकेट हासिल किए।  4. लाला अमरनाथ – टेस्ट डेब्यू में शतक लगाने वाले पहले भारतीय भारतीय क्रिकेट को कई महान ऑलराउंडर मिले हैं, लेकिन इस परंपरा को मजबूत करने वाले शुरुआती नामों में लाला अमरनाथ प्रमुख हैं। उन्होंने 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया और अपने पहले ही मैच में इतिहास रच दिया। बॉम्बे टेस्ट में उन्होंने 118 रन की शानदार पारी खेली और टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने। 5. कैप्टन रूप सिंह – हॉकी के शानदार सितारे मेजर ध्यानचंद के छोटे भाई कैप्टन रूप सिंह शायद अपने भाई जितनी लोकप्रियता हासिल नहीं कर सके, लेकिन भारतीय हॉकी में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। जिन्होंने 1932 लॉस एंजिल्स और 1936 बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था।1932 ओलंपिक में अमेरिका के खिलाफ भारत की 24-1 की ऐतिहासिक जीत में जहां ध्यानचंद ने 8 गोल किए थे, वहीं रूप सिंह ने अकेले 10 गोल दागे थे।

स्वतंत्रता दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं.......

दोस्तो आज हम सब 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं और इन 80 सालों में हमारा देश दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र भी है। खेल के मैदान में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। क्रिकेट विश्व कप से लेकर ओलंपिक पदकों तक, भारतीय खिलाड़ी लगातार तिरंगे का गौरव बढ़ा रहे हैं।लेकिन क्या आप जानते हैं कि 15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने से पहले भी कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया था, आइए जानते हैं इन खिलाड़ियों के बारे में-

Sports News – These legendary athletes had already become the face of India before independence; let us learn more about them.

1. नॉर्मन प्रिचर्ड –

नॉर्मन प्रिचर्ड का नाम भारत के शुरुआती ओलंपिक इतिहास में बेहद महत्वपूर्ण है। वर्ष 1875 में कलकत्ता में जन्मे प्रिचर्ड ब्रिटिश मूल के एथलीट थे और उन्हें ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले खिलाड़ी के रूप में जाना जाता है।उन्होंने 1900 के पेरिस ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए 200 मीटर दौड़ और 200 मीटर बाधा दौड़ में दो रजत पदक जीते।

2. मेजर ध्यानचंद – हॉकी के जादूगर

भारतीय खेल इतिहास में मेजर ध्यानचंद का नाम सबसे महान खिलाड़ियों में लिया जाता है। हॉकी के इस दिग्गज ने स्वतंत्रता से पहले भारत को लगातार तीन ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

उनकी उपलब्धियां:

1928 एम्सटर्डम ओलंपिक: भारत ने स्वर्ण पदक जीता और ध्यानचंद ने शानदार प्रदर्शन किया।

1932 लॉस एंजिल्स ओलंपिक: भारत ने फिर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

1936 बर्लिन ओलंपिक: ध्यानचंद की अगुवाई में भारत ने लगातार तीसरा स्वर्ण पदक जीता।

1928 ओलंपिक में उन्होंने सिर्फ पांच मैचों में 14 गोल किए।

1932 में अमेरिका के खिलाफ भारत की 24-1 की जीत में ध्यानचंद ने 8 गोल दागे।

1936 के फाइनल में जर्मनी के खिलाफ उन्होंने हैट्रिक लगाई और भारत ने 8-1 से जीत दर्ज की।

उनके शानदार खेल के कारण उन्हें भारतीय हॉकी का 'जादूगर' कहा जाता है।

Sports News – These legendary athletes had already become the face of India before independence; let us learn more about them.

3. कर्नल सी.के. नायडू – भारत के पहले टेस्ट कप्तान

भारत में क्रिकेट की शुरुआत 19वीं सदी के दौरान हुई, लेकिन टेस्ट क्रिकेट में भारत ने 1932 में कदम रखा। भारत ने अपना पहला टेस्ट मैच इंग्लैंड के खिलाफ ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेला।इस ऐतिहासिक मुकाबले में भारतीय टीम की कप्तानी कर्नल सी.के. नायडू ने की। अपने 7 टेस्ट मैचों के करियर में नायडू ने 350 रन बनाए और 9 विकेट हासिल किए।

4. लाला अमरनाथ – टेस्ट डेब्यू में शतक लगाने वाले पहले भारतीय

भारतीय क्रिकेट को कई महान ऑलराउंडर मिले हैं, लेकिन इस परंपरा को मजबूत करने वाले शुरुआती नामों में लाला अमरनाथ प्रमुख हैं। उन्होंने 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया और अपने पहले ही मैच में इतिहास रच दिया। बॉम्बे टेस्ट में उन्होंने 118 रन की शानदार पारी खेली और टेस्ट क्रिकेट में शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने।

5. कैप्टन रूप सिंह – हॉकी के शानदार सितारे

मेजर ध्यानचंद के छोटे भाई कैप्टन रूप सिंह शायद अपने भाई जितनी लोकप्रियता हासिल नहीं कर सके, लेकिन भारतीय हॉकी में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। जिन्होंने 1932 लॉस एंजिल्स और 1936 बर्लिन ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता था।1932 ओलंपिक में अमेरिका के खिलाफ भारत की 24-1 की ऐतिहासिक जीत में जहां ध्यानचंद ने 8 गोल किए थे, वहीं रूप सिंह ने अकेले 10 गोल दागे थे।