'तब रोहित शर्मा की बात पर भरोसा नहीं हुआ था', संजू सैमसन ने किया बड़ा खुलासा, बाद में मांगी माफी
Sanju Samson on Rohit Sharma: टी20 वर्ल्ड कप 2026 में शानदार प्रदर्शन कर 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' बनने वाले भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन ने हाल ही में एक भावुक खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि टूर्नामेंट की शुरुआत में प्लेइंग इलेवन से बाहर किए जाने के बाद वह काफी निराश थे। उस मुश्किल दौर में रोहित शर्मा ने उनका हौसला बढ़ाया, लेकिन उस समय उन्हें रोहित की बातों पर विश्वास नहीं हुआ। बाद में जब सब कुछ बदला, तो उन्हें अपनी सोच पर अफसोस हुआ और उन्होंने इसके लिए माफी भी मांगी।
शुरुआती मैचों में नहीं मिला था मौका
टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले भारत ने न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज खेली थी, जिसमें संजू सैमसन उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। इसका असर वर्ल्ड कप टीम में उनकी भूमिका पर भी पड़ा और शुरुआती मुकाबलों में उन्हें अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली।
टीम प्रबंधन ने ओपनिंग की जिम्मेदारी ईशान किशन और अभिषेक शर्मा को सौंपी, जबकि संजू को इंतजार करना पड़ा। लगातार बाहर बैठने की वजह से वह मानसिक रूप से काफी परेशान हो गए थे।
रोहित शर्मा ने बढ़ाया हौसला
संजू सैमसन ने एक बातचीत के दौरान बताया कि उस कठिन समय में तत्कालीन कप्तान रोहित शर्मा लगातार उनका मनोबल बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि रोहित ने उनसे कहा था कि निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि टूर्नामेंट लंबा है और उन्हें आगे जरूर मौका मिलेगा। रोहित ने भरोसा दिलाया था कि सही समय आने पर वह टीम के लिए अहम भूमिका निभाएंगे।
हालांकि संजू ने स्वीकार किया कि उस वक्त वह इतनी निराशा में थे कि रोहित की बातों पर विश्वास नहीं कर पाए।
बाद में मांगी माफी
संजू सैमसन ने कहा कि बाद में जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो एहसास हुआ कि रोहित शर्मा अपने अनुभव के आधार पर उन्हें सही सलाह दे रहे थे।
उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय वह स्थिति को सकारात्मक नजरिए से नहीं देख पा रहे थे। अब उन्हें लगता है कि रोहित की बातें उनके आत्मविश्वास को बनाए रखने के लिए थीं और इसी वजह से उन्होंने अपनी सोच के लिए माफी भी मांगी।
एक हफ्ते तक रहे परेशान
संजू ने बताया कि शुरुआती मैचों से बाहर रहने का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ा।
उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड सीरीज खत्म होने के तुरंत बाद वर्ल्ड कप शुरू हो गया था और वह उस निराशा से जल्दी बाहर नहीं निकल सके। करीब एक सप्ताह तक वह सामान्य महसूस नहीं कर पाए। उनका कहना था कि वह अपनी भावनाएं छिपाने वालों में नहीं हैं और जब वह परेशान होते हैं तो इसका असर उनके चेहरे पर भी साफ दिखाई देता है।
मानसिक रूप से खुद को किया मजबूत
कठिन समय से निकलने के लिए संजू सैमसन ने खुद पर मानसिक रूप से काम करना शुरू किया। उन्होंने अपने खेल, करियर और लक्ष्य को लेकर खुद से कई सवाल किए।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया ने उन्हें दोबारा खुद को समझने और सकारात्मक सोच के साथ मैदान पर लौटने में मदद की। धीरे-धीरे उनका आत्मविश्वास वापस आया और उन्होंने मौके का इंतजार जारी रखा।
मौका मिला तो बदल दी कहानी
जब संजू सैमसन को आखिरकार प्लेइंग इलेवन में जगह मिली, तो उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी आलोचनाओं का जवाब दिया।
उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 5 मैचों में 321 रन बनाए। इस दौरान उनका औसत 80.25 और स्ट्राइक रेट 199.37 रहा। वह भारत के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने।
सिर्फ रन ही नहीं, संजू ने टूर्नामेंट में 24 छक्के लगाकर टी20 वर्ल्ड कप के एक संस्करण में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का नया रिकॉर्ड भी अपने नाम किया। उनके शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' चुना गया।
निष्कर्ष
संजू सैमसन की कहानी इस बात का उदाहरण है कि किसी खिलाड़ी के करियर में धैर्य और आत्मविश्वास कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं। शुरुआती निराशा के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला, मेहनत जारी रखी और मौका मिलने पर शानदार प्रदर्शन कर टीम का भरोसा जीता। वहीं, रोहित शर्मा की सलाह और अनुभव ने भी इस सफर में अहम भूमिका निभाई, जिसका जिक्र संजू ने खुले दिल से किया।
