RBI Polymer Notes: क्या प्लास्टिक में आएंगे ₹10 और ₹20 के नोट? जानिए ट्रायल, सुरक्षा और पुराने नोटों का क्या होगा

 
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RBI Polymer Currency Update: भारत में ₹10 और ₹20 के नोट भविष्य में एक नए रूप में दिखाई दे सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने इन दोनों मूल्यवर्ग के पॉलीमर बैंक नोटों का सीमित स्तर पर परीक्षण करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्र सरकार से फील्ड ट्रायल की मंजूरी मिलने के बाद अब नोट तैयार करने के लिए जरूरी पॉलीमर सबस्ट्रेट की खरीद प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में मौजूद ₹10 और ₹20 के कागजी नोट तुरंत बंद कर दिए जाएंगे। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रस्तावित पॉलीमर नोटों को मौजूदा पेपर करेंसी के साथ चलाने की योजना है। नियमित रूप से जारी करने का फैसला ट्रायल के नतीजों, सुरक्षा जांच और तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही लिया जाएगा।

ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं। क्या ये नोट वास्तव में प्लास्टिक के होंगे, कब तक बाजार में आ सकते हैं, पुराने नोटों का क्या होगा और इनके फायदे क्या हैं? आइए पूरा मामला आसान भाषा में समझते हैं।

पॉलीमर नोटों पर RBI गवर्नर ने क्या कहा?

मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद मीडिया से बातचीत में रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि पॉलीमर नोटों की प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। बैंक ने उस विशेष पॉलीमर सबस्ट्रेट की खरीद के लिए टेंडर जारी किया है, जिस पर नए बैंक नोट छापे जाएंगे।

सबस्ट्रेट मिलने के बाद उसे कई तरह की तकनीकी जांच से गुजरना होगा। इसमें नोट की मजबूती, प्रिंटिंग की गुणवत्ता, सुरक्षा फीचर्स, भारतीय मौसम के अनुकूलता और रोजमर्रा के लेन-देन में उसके प्रदर्शन की जांच शामिल हो सकती है।

इन सभी प्रक्रियाओं के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद ही सीमित स्तर पर नोटों को फील्ड ट्रायल के लिए जारी किया जाएगा। इसलिए पॉलीमर करेंसी के व्यापक रूप से चलन में आने में समय लग सकता है।

कितने ₹10 और ₹20 के नोटों का हो सकता है ट्रायल?

लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, RBI के सेंट्रल बोर्ड ने ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के एक-एक अरब पॉलीमर बैंक नोटों को फील्ड ट्रायल के लिए पेश करने की सिफारिश की थी। केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

इसका उद्देश्य यह समझना होगा कि भारतीय बाजार में पॉलीमर नोट कितने प्रभावी साबित होते हैं। ट्रायल के दौरान उनकी टिकाऊ क्षमता, नकली नोटों से सुरक्षा, छपाई की लागत, मशीनों में पहचान और आम जनता द्वारा इस्तेमाल में आने वाली संभावित दिक्कतों का आकलन किया जा सकता है।

फील्ड ट्रायल सफल रहने पर ही सरकार और रिजर्व बैंक नियमित रूप से इन नोटों को जारी करने पर अंतिम निर्णय लेंगे।

क्या ₹10 और ₹20 के पुराने कागजी नोट बंद हो जाएंगे?

इस सवाल का जवाब फिलहाल नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि पुराने कागजी नोटों को वापस लेने या अमान्य करने की कोई योजना नहीं है।

पॉलीमर नोटों को मौजूदा पेपर करेंसी का तत्काल विकल्प नहीं बनाया जा रहा। ट्रायल के दौरान दोनों प्रकार के नोट एक साथ चल सकते हैं। इसका मतलब है कि लोगों के पास मौजूद ₹10 और ₹20 के पुराने कागजी नोट पहले की तरह वैध रहेंगे और उनसे सामान्य लेन-देन किया जा सकेगा।

इसलिए पुराने नोटों को बदलवाने, बैंक में जमा कराने या उनके बंद होने की आशंका में जल्दबाजी करने की जरूरत नहीं है।

पॉलीमर बैंक नोट आखिर होते क्या हैं?

पॉलीमर नोट सामान्य कागज से नहीं, बल्कि एक खास प्रकार की मजबूत प्लास्टिक फिल्म से तैयार किए जाते हैं। इसके लिए आमतौर पर बाइ-एक्सियली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपलीन यानी BOPP सबस्ट्रेट का इस्तेमाल किया जाता है।

यह सामग्री सामान्य बैंक नोटों में इस्तेमाल होने वाले कॉटन आधारित पेपर की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ मानी जाती है। इसकी सतह पर विशेष प्रिंटिंग और सुरक्षा तकनीकों का इस्तेमाल करके नोट तैयार किए जाते हैं।

दिखने में ये नोट सामान्य करेंसी जैसे ही हो सकते हैं, लेकिन इनके कुछ हिस्से पारदर्शी हो सकते हैं। इन्हीं पारदर्शी विंडो में एडवांस सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं।

पॉलीमर नोटों के क्या फायदे हैं?

पॉलीमर करेंसी को लेकर सबसे बड़ा दावा इसकी लंबी उम्र और मजबूती का है। सामान्य कागजी नोट लगातार उपयोग, नमी, पसीने और गंदगी के कारण जल्दी खराब हो सकते हैं। पॉलीमर नोट इस मामले में अधिक टिकाऊ माने जाते हैं।

पानी से कम नुकसान

ये नोट पानी या नमी के संपर्क में आने पर सामान्य कागजी नोटों की तरह आसानी से खराब नहीं होते। बारिश में भीगने या कपड़ों के साथ धुल जाने पर भी इनके सुरक्षित रहने की संभावना अधिक होती है।

जल्दी नहीं फटते

पॉलीमर नोटों को सामान्य इस्तेमाल में फाड़ना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है। इससे कटे-फटे नोटों की समस्या कम हो सकती है।

लंबे समय तक चलने की क्षमता

ऐसे नोट सामान्य पेपर करेंसी के मुकाबले करीब ढाई से चार गुना अधिक समय तक चल सकते हैं। इससे बार-बार पुराने नोट हटाकर नए नोट छापने की जरूरत कम हो सकती है।

नकली करेंसी रोकने में मदद

पॉलीमर नोटों में पारदर्शी विंडो, विशेष होलोग्राम, उन्नत स्याही और अन्य सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जा सकते हैं। इनकी नकल करना सामान्य कागजी नोटों की तुलना में कठिन हो सकता है।

साफ-सुथरी करेंसी

पॉलीमर की सतह अपेक्षाकृत कम नमी और गंदगी सोखती है। इससे नोट अधिक समय तक साफ दिखाई दे सकते हैं।

क्या पॉलीमर नोट पूरी तरह नुकसानरहित हैं?

पॉलीमर नोटों के कई फायदे हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल से पहले कुछ व्यावहारिक चुनौतियों की जांच भी जरूरी होगी। भारतीय बाजार में बड़ी संख्या में कैश काउंटिंग मशीन, वेंडिंग मशीन, एटीएम और अन्य करेंसी आधारित उपकरण इस्तेमाल होते हैं।

नए नोटों को इन मशीनों के अनुकूल बनाना होगा। साथ ही अत्यधिक गर्मी, नमी, धूल और बार-बार मोड़े जाने जैसी परिस्थितियों में नोटों की वास्तविक क्षमता का परीक्षण भी जरूरी होगा।

इसी कारण सरकार सीधे बड़े पैमाने पर पॉलीमर नोट जारी करने के बजाय पहले फील्ड ट्रायल करना चाहती है।

डिजिटल पेमेंट पर क्या असर पड़ेगा?

भारत में UPI और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसके बावजूद छोटे लेन-देन, ग्रामीण क्षेत्रों, स्थानीय बाजारों और आपात परिस्थितियों में नकदी की भूमिका अब भी महत्वपूर्ण है।

सरकार का कहना है कि डिजिटल भुगतान और बैंक नोट एक-दूसरे के विकल्प होने के बजाय पूरक व्यवस्था के रूप में काम करते हैं। पॉलीमर नोटों का उद्देश्य नकदी व्यवस्था को समाप्त करना नहीं, बल्कि छोटे मूल्यवर्ग के नोटों को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाना है।

डिजिटल भुगतान पर इनका वास्तविक असर तभी समझा जा सकेगा, जब पॉलीमर नोट नियमित रूप से बाजार में जारी किए जाएंगे।

क्या दुकानदार इन्हें स्वीकार करेंगे?

जब तक RBI पॉलीमर नोटों को आधिकारिक रूप से जारी करता है, वे अन्य वैध बैंक नोटों की तरह ही कानूनी मुद्रा होंगे। दुकानदार या कोई अन्य व्यक्ति केवल उनके अलग मटेरियल के कारण उन्हें स्वीकार करने से इनकार नहीं कर सकेगा।

हालांकि लोगों को नए डिजाइन और सुरक्षा फीचर्स से परिचित कराने के लिए RBI को जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत पड़ सकती है। इससे असली और नकली नोटों की पहचान आसान होगी और बाजार में भ्रम कम होगा।

अभी लोगों को क्या करना चाहिए?

फिलहाल ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोट ट्रायल और तैयारी की प्रक्रिया में हैं। आम जनता को बाजार में मौजूद कागजी नोटों को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।

लोगों को केवल RBI और केंद्र सरकार की आधिकारिक सूचना पर भरोसा करना चाहिए। सोशल मीडिया पर पुराने नोट बंद होने, तत्काल एक्सचेंज कराने या पॉलीमर करेंसी के नाम पर पैसे मांगने वाले संदेशों से सावधान रहना जरूरी है।

कब तक जारी हो सकते हैं पॉलीमर नोट?

अभी किसी निश्चित तारीख की घोषणा नहीं की गई है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने, सबस्ट्रेट मिलने, नोटों की छपाई, सुरक्षा परीक्षण और फील्ड ट्रायल के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा।

अगर परीक्षण सफल रहता है, तो RBI चरणबद्ध तरीके से ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोट जारी कर सकता है। तब भी पुराने कागजी नोटों को एकदम से बंद किए जाने की संभावना नहीं है।

निष्कर्ष

₹10 और ₹20 के पॉलीमर बैंक नोटों को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है, लेकिन ये अभी आम बाजार में नियमित रूप से जारी नहीं हुए हैं। सरकार ने सीमित फील्ड ट्रायल की मंजूरी दी है और RBI नोट तैयार करने के लिए जरूरी सबस्ट्रेट की व्यवस्था कर रहा है।

नए नोट अधिक टिकाऊ, पानी प्रतिरोधी और सुरक्षा फीचर्स से लैस हो सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मौजूदा कागजी नोट वैध बने रहेंगे। इसलिए पुराने नोटों के बंद होने या तुरंत बदले जाने की खबरों पर विश्वास करने की जरूरत नहीं है।

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