Property Rules- वसीयत बनी हुई हैं, फिर भी इन आधारों पर दी जा सकती है चुनौती
- byJitendra
- 21 May, 2026
दोस्तो आपने फिल्मों और असल जिदंगी में देखा कि लोग अक्सर प्रॉपर्टी के लिए लड़ते हैं, एक दूसरे को मारने और पीटने तक लग जाते हैं, ऐसे में कई लोग मरने से पहले अपनी वसीयत तैयार कर लेते हैं, ताकि झगड़े न हो, लेकिन क्या आपको पता है वसीयत बनने के बाद भी इसे कोर्ट में चुनौती दे सकते हैं, भारतीय कानून के तहत, कानूनी वारिस या संबंधित पक्ष कई आधारों पर वसीयत को चुनौती दे सकते हैं, जिससे कोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाइयाँ चल सकती हैं और प्रॉपर्टी के ट्रांसफर में देरी हो सकती है, आइए जानते हैं इन नियमों के बारे में-

मानसिक क्षमता की कमी
अगर यह आरोप लगाया जाता है कि वसीयत बनाने वाला व्यक्ति, वसीयत पर दस्तखत करते समय मानसिक रूप से ठीक नहीं था या किसी बीमारी, डिमेंशिया (भूलने की बीमारी), या ऐसी किसी भी स्थिति से पीड़ित था, तो वसीयत पर सवाल उठाया जा सकता है।
गलत प्रभाव या दबाव
अगर कोई यह दावा करता है कि वसीयत बनाने वाले व्यक्ति पर प्रॉपर्टी के बँटवारे से जुड़े कुछ खास फैसले लेने के लिए ज़ोर डाला गया, तो वसीयत को चुनौती दी जा सकती है।
जालसाज़ी या नकली दस्तखत
अगर इस बात का शक हो कि वसीयत पर किए गए दस्तखत, अँगूठे का निशान, या पूरा का पूरा दस्तावेज़ ही नकली या मनगढ़ंत है, तो कोर्ट वसीयत की असलियत की जाँच कर सकता है।

वसीयत को ठीक से लागू न करना
वसीयत को कुछ कानूनी औपचारिकताएँ पूरी करनी होती हैं, जैसे कि उस पर सही गवाहों के दस्तखत होना। इन ज़रूरतों को पूरा न करने पर वसीयत अमान्य हो सकती है।
संदिग्ध हालात
अगर वसीयत कुछ अजीब सी लगती है—उदाहरण के लिए, बिना कोई वजह बताए परिवार के करीबी सदस्यों को विरासत से बाहर कर देना, या मौत से ठीक पहले अचानक कोई बड़ा बदलाव कर देना—तो कोर्ट इस मामले की बारीकी से जाँच कर सकता है।





