Politics News- अमेरिका ने फिर किया ईरान पर पलटवार, ट्रंप को लग रहा जान का डर
दोस्तो एक बार फिर मीडिल ईस्ट से बुरी खबर आ रही हैं, अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति एक बार भंग होती दिख रही है, क्योंकि नए सैन्य हमलों और जवाबी हमलों ने इस इलाके को एक बड़े टकराव की कगार पर पहुंचा दिया है। 24 घंटों के अंदर ईरान में 170 से ज़्यादा हमले किए गए, जबकि ईरान ने खाड़ी में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया।

इस नए तनाव ने युद्धविराम के भविष्य, क्षेत्रीय सुरक्षा, ग्लोबल ऑयल मार्केट और आगे और सैन्य टकराव की संभावना को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
ईरान में 24 घंटे के भीतर 170 से ज़्यादा धमाके और सैन्य हमले हुए। कई सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया, जिससे यह हाल के महीनों में टकराव का सबसे गंभीर दौर बन गया है।
हमलों के नए दौर ने यह अटकलें तेज कर दी हैं कि पहले घोषित युद्धविराम असल में खत्म हो गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे को कड़ी चेतावनी दी है, जिससे एक और लंबे सैन्य टकराव का डर बढ़ गया है।
खबरों के मुताबिक अमेरिकी सेना ने कई रणनीतिक ठिकानों पर हमले किए, जिनमें शामिल हैं:
सैन्य ठिकाने
ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (परिवहन ढांचा)
बंदरगाह की सुविधाएं
एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर
रेलवे और पुल नेटवर्क
अमेरिका का कहना है कि उसके सैन्य अभियानों का मकसद सुरक्षा खतरों को खत्म करना था।
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान द्वारा अमेरिकी संपत्तियों पर कथित हमलों के बाद अमेरिका ने भारी सैन्य ताकत के साथ जवाब दिया।
उनके बयानों के अनुसार:
अमेरिका ने कहीं ज़्यादा ताकत के साथ जवाब दिया।
ज़रूरत पड़ने पर सैन्य अभियान जारी रहेंगे।
ईरान की सैन्य क्षमता सीमित रह गई है।
अगर ईरान कूटनीतिक समाधान चाहता है तो वॉशिंगटन बातचीत के लिए तैयार है।
ईरान ने अमेरिकी हमलों की निंदा की है और चेतावनी दी है कि हर सैन्य कार्रवाई का उचित जवाब दिया जाएगा। ईरानी अधिकारियों ने दोहराया है कि देश सैन्य दबाव में घुटने नहीं टेकेगा। 6. ईरान के जवाबी हमलों का निशाना अमेरिकी ठिकाने
खबरों के मुताबिक, ईरान ने खाड़ी इलाके में कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी मिसाइल हमले किए, जिनमें ये जगहें शामिल हैं:

बहरीन
कुवैत
जॉर्डन
नुकसान के पूरे दायरे के बारे में अभी कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
कुछ खबरों का दावा है कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रमों के लिए मशहद में जब भारी भीड़ जमा हो रही थी, तब सैन्य हमले हुए। खबरों में यह भी कहा गया है कि शहर तक जाने वाले रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा, जिससे हजारों यात्रियों की यात्रा में बाधा आई।
