NPS Fund Manager Change: कब बदलें पेंशन फंड मैनेजर? फैसला लेने से पहले इन 5 संकेतों को जरूर जांचें

 
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NPS Investment Guide: नेशनल पेंशन सिस्टम यानी NPS लंबी अवधि में रिटायरमेंट फंड तैयार करने का एक लोकप्रिय विकल्प है। इस योजना में निवेश की गई राशि को चुना गया पेंशन फंड मैनेजर इक्विटी, कॉरपोरेट डेट, सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य अनुमत निवेश साधनों में लगाता है। फंड मैनेजर की रणनीति और प्रदर्शन का सीधा असर लंबे समय में बनने वाले आपके रिटायरमेंट कॉर्पस पर पड़ सकता है।

NPS निवेशकों को अपना पेंशन फंड मैनेजर बदलने की सुविधा मिलती है। हालांकि, केवल कुछ महीनों के कमजोर रिटर्न या बाजार में आई अस्थायी गिरावट के कारण यह फैसला लेना समझदारी नहीं माना जाता। NPS आमतौर पर 20 से 30 वर्षों की वित्तीय योजना होती है। ऐसे में किसी भी बदलाव से पहले लंबी अवधि के प्रदर्शन, जोखिम और निवेश रणनीति का आकलन करना जरूरी है।

यहां उन पांच प्रमुख बातों के बारे में बताया गया है, जिन्हें देखकर आप तय कर सकते हैं कि पेंशन फंड मैनेजर बदलना चाहिए या वर्तमान विकल्प के साथ बने रहना बेहतर होगा।

1. लंबे समय से कमजोर प्रदर्शन सबसे बड़ा संकेत

पेंशन फंड मैनेजर का मूल्यांकन केवल छह महीने या एक साल के रिटर्न के आधार पर नहीं करना चाहिए। बाजार की परिस्थितियों के कारण किसी अच्छे फंड का प्रदर्शन भी छोटी अवधि में कमजोर हो सकता है।

विशेषज्ञ आमतौर पर सुझाव देते हैं कि किसी फंड मैनेजर के कम से कम तीन से पांच वर्षों के प्रदर्शन को देखा जाए। यदि वह लगातार अपने बेंचमार्क और उसी श्रेणी के दूसरे पेंशन फंडों से पीछे है, तो बदलाव पर विचार किया जा सकता है।

मान लीजिए कि समान जोखिम वाले दो फंड मैनेजरों में से एक ने चार वर्षों में औसतन 11 प्रतिशत वार्षिक रिटर्न दिया है, जबकि दूसरे का औसत रिटर्न केवल 8 प्रतिशत रहा। ऐसी स्थिति में कमजोर प्रदर्शन वाले फंड की समीक्षा की जा सकती है। हालांकि, केवल एक वर्ष की गिरावट बदलाव के लिए पर्याप्त कारण नहीं है।

2. हर साल सबसे अच्छा फंड चुनने की कोशिश न करें

कई निवेशक पिछले एक साल में सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाले फंड मैनेजर को देखकर तुरंत बदलाव कर देते हैं। इस रणनीति को परफॉर्मेंस चेजिंग कहा जाता है और इससे लंबे समय में नुकसान हो सकता है।

शेयर और बॉन्ड बाजार के रुझान हर साल बदलते रहते हैं। इस साल जो फंड सबसे आगे है, जरूरी नहीं कि वह अगले साल भी पहले स्थान पर रहे। बार-बार फंड बदलने पर निवेशक अक्सर बेहतर प्रदर्शन का अधिकांश हिस्सा निकल जाने के बाद नए फंड में प्रवेश करते हैं।

इस तरह लगातार बदलाव करने से निवेश अनुशासन प्रभावित हो सकता है और कंपाउंडिंग का पूरा लाभ भी नहीं मिल पाता। इसलिए फंड मैनेजर बदलने के बजाय नियमित अंतराल पर निष्पक्ष समीक्षा करना बेहतर तरीका है।

3. केवल अधिक रिटर्न को सफलता न मानें

किसी पेंशन फंड का रिटर्न महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अकेला निर्णय लेने का आधार नहीं होना चाहिए। यह भी समझना जरूरी है कि उस रिटर्न को हासिल करने के लिए फंड मैनेजर ने कितना जोखिम लिया।

उदाहरण के लिए, एक फंड ने 12 प्रतिशत रिटर्न दिया, लेकिन उसके पोर्टफोलियो में जोखिम काफी अधिक था। वहीं दूसरे फंड ने नियंत्रित जोखिम के साथ 11 प्रतिशत रिटर्न दिया। रिटायरमेंट जैसे दीर्घकालीन लक्ष्य के लिए दूसरा विकल्प अधिक स्थिर माना जा सकता है।

फंड मैनेजर की समीक्षा करते समय इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  • बाजार में गिरावट के दौरान फंड का प्रदर्शन कैसा रहा।

  • पोर्टफोलियो कितनी अच्छी तरह विविधीकृत है।

  • रिटर्न में लगातार बहुत अधिक उतार-चढ़ाव तो नहीं है।

  • निवेश रणनीति अनुशासित और स्थिर है या नहीं।

  • समान एसेट क्लास वाले दूसरे फंडों की तुलना में प्रदर्शन कैसा है।

इक्विटी फंड की तुलना सरकारी बॉन्ड या डेट फंड के रिटर्न से करना भी उचित नहीं है, क्योंकि दोनों की जोखिम और रिटर्न क्षमता अलग होती है।

4. NPS में उपलब्ध पेंशन फंड मैनेजरों की तुलना करें

NPS के तहत निवेशकों को विभिन्न पेंशन फंड मैनेजरों में से चयन करने का विकल्प मिलता है। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:

  • SBI Pension Funds

  • LIC Pension Fund

  • UTI Pension Fund

  • HDFC Pension Fund Management

  • ICICI Pension Fund Management

  • Kotak Mahindra Pension Fund

  • Aditya Birla Sun Life Pension Fund Management

  • Tata Pension Fund Management

  • Axis Pension Fund Management

  • DSP Pension Fund Managers

किसी दूसरे फंड मैनेजर को चुनने से पहले उसके अलग-अलग एसेट क्लास के दीर्घकालीन रिटर्न, जोखिम, पोर्टफोलियो गुणवत्ता और निवेश शैली की तुलना करनी चाहिए। केवल किसी एक योजना में बेहतर रिटर्न देखकर पूरे NPS खाते को बदलना सही रणनीति नहीं हो सकती।

5. Active Choice और Auto Choice के अनुसार करें समीक्षा

NPS में निवेशक सामान्य तौर पर Active Choice या Auto Choice विकल्प चुन सकते हैं।

Active Choice

Active Choice में निवेशक स्वयं तय करता है कि उसकी राशि का कितना हिस्सा इक्विटी, कॉरपोरेट बॉन्ड, सरकारी प्रतिभूतियों और अन्य अनुमत एसेट में लगाया जाएगा।

इस विकल्प में फंड मैनेजर के प्रदर्शन के साथ एसेट एलोकेशन की भी नियमित समीक्षा जरूरी होती है। कई बार कमजोर रिटर्न की वजह फंड मैनेजर नहीं, बल्कि निवेशक द्वारा चुना गया असंतुलित एसेट एलोकेशन भी हो सकता है।

Auto Choice

Auto Choice में निवेशक की उम्र के अनुसार एसेट एलोकेशन अपने आप बदलता रहता है। उम्र बढ़ने के साथ आमतौर पर इक्विटी का हिस्सा कम और सुरक्षित साधनों का हिस्सा बढ़ता जाता है।

इस विकल्प में निवेशक को बार-बार एसेट एलोकेशन बदलने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, पेंशन फंड मैनेजर के दीर्घकालीन प्रदर्शन और जोखिम प्रबंधन की समय-समय पर जांच करनी चाहिए।

पेंशन फंड मैनेजर बदलते समय इन गलतियों से बचें

NPS निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए। खास तौर पर इन गलतियों से रिटायरमेंट योजना प्रभावित हो सकती है:

  • केवल एक साल का रिटर्न देखकर फंड बदलना।

  • बाजार में गिरावट आते ही घबराकर बाहर निकलना।

  • हर साल सर्वाधिक रिटर्न वाले फंड के पीछे जाना।

  • इक्विटी और डेट फंडों की सीधी तुलना करना।

  • ज्यादा रिटर्न के लिए अत्यधिक जोखिम स्वीकार करना।

  • अपनी उम्र, लक्ष्य और जोखिम क्षमता को नजरअंदाज करना।

NPS खाता कौन खोल सकता है?

18 वर्ष या उससे अधिक उम्र का पात्र भारतीय नागरिक NPS में निवेश कर सकता है। नौकरीपेशा कर्मचारी, कारोबारी, स्वरोजगार करने वाले लोग और पात्र NRI भी इस योजना से जुड़ सकते हैं।

NPS खाता बैंक, अधिकृत प्वाइंट ऑफ प्रेजेंस, डाकघर या ऑनलाइन eNPS प्लेटफॉर्म के माध्यम से खोला जा सकता है। खाता खुलने के बाद निवेशक को PRAN यानी Permanent Retirement Account Number जारी किया जाता है। इसी नंबर के जरिए निवेश, खाते की निगरानी और अन्य बदलाव किए जाते हैं।

अंतिम फैसला कैसे करें?

NPS में पेंशन फंड मैनेजर बदलने का निर्णय केवल कम समय के प्रदर्शन पर आधारित नहीं होना चाहिए। यदि मौजूदा फंड मैनेजर तीन से पांच वर्षों तक लगातार अपने बेंचमार्क और समान फंडों से पीछे रहा है, जोखिम प्रबंधन कमजोर है और उसकी निवेश रणनीति आपके लक्ष्यों के अनुरूप नहीं है, तभी बदलाव पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

रिटायरमेंट निवेश में निरंतरता, धैर्य और नियमित समीक्षा अधिक महत्वपूर्ण हैं। सही एसेट एलोकेशन और लंबे समय तक अनुशासित निवेश ही मजबूत रिटायरमेंट फंड तैयार करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। NPS, टैक्स या अन्य निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर करें।

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