Indian Railways New PRS: टिकट बुकिंग होगी कई गुना तेज, एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा रिजर्वेशन संभालेगा नया सिस्टम
Indian Railways New Reservation System: ट्रेन टिकट बुक करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे अपनी रिजर्वेशन व्यवस्था में बड़ा तकनीकी बदलाव करने की तैयारी में है। रेलवे करीब चार दशक पुराने Passenger Reservation System यानी PRS को नई तकनीक से लैस सिस्टम में बदल रहा है। इस अपग्रेड का मकसद टिकट बुकिंग को तेज बनाना, भारी ऑनलाइन ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभालना और सीट उपलब्धता, वेटिंग लिस्ट, RAC तथा यात्री पूछताछ जैसी सेवाओं को ज्यादा प्रभावी बनाना है।
नए PRS की सबसे बड़ी खासियत इसकी क्षमता होगी। रेलवे के अनुसार, अपग्रेडेड सिस्टम एक मिनट में 1.5 लाख से अधिक टिकट बुकिंग संभाल सकेगा। मौजूदा सिस्टम की क्षमता करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट बताई गई है। यानी नई तकनीक लागू होने के बाद टिकटिंग क्षमता में कई गुना बढ़ोतरी हो सकती है।
यह बदलाव एक ही दिन में नहीं किया जाएगा। पुराने सिस्टम से नए PRS पर माइग्रेशन चरणबद्ध तरीके से होगा और अलग-अलग ट्रैफिक स्तरों पर इसकी टेस्टिंग भी की जाएगी।
करीब 40 साल पुराना है रेलवे का मौजूदा PRS
भारतीय रेलवे में कंप्यूटराइज्ड पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी। इससे पहले ट्रेन टिकट बुकिंग का बड़ा हिस्सा मैनुअल सिस्टम पर निर्भर था।
PRS ने रेलवे टिकटिंग को पूरी तरह बदल दिया और बाद में इसे ऑनलाइन तथा मोबाइल बुकिंग से भी जोड़ा गया। आज यही सिस्टम टिकट बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन, सीट आवंटन, वेटिंग लिस्ट, RAC, रिजर्वेशन चार्ट और कई तरह की यात्री पूछताछ को संभालता है।
लेकिन ऑनलाइन टिकटिंग का दायरा तेजी से बढ़ने और एक ही समय पर लाखों यात्रियों के सिस्टम पर आने की वजह से अब ज्यादा क्षमता वाले प्लेटफॉर्म की जरूरत महसूस की जा रही है।
एक मिनट में 1.5 लाख से ज्यादा टिकट संभालने की तैयारी
नए PRS को मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले कहीं अधिक शक्तिशाली बनाया जा रहा है।
रेलवे की ओर से साझा की गई क्षमता के मुताबिक:
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मौजूदा टिकटिंग क्षमता: करीब 32,000 टिकट प्रति मिनट
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नए PRS की क्षमता: 1.5 लाख से अधिक टिकट प्रति मिनट
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मौजूदा पूछताछ क्षमता: लगभग 4 लाख प्रति मिनट
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नई पूछताछ क्षमता: 40 लाख से अधिक प्रति मिनट
इसका सीधा फायदा ऐसे समय में देखने को मिल सकता है जब बड़ी संख्या में यात्री एक साथ टिकट बुक करने या ट्रेन और सीट से जुड़ी जानकारी देखने की कोशिश करते हैं।
Tatkal Booking में मिल सकती है बड़ी राहत
ट्रेन यात्रियों के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय तत्काल टिकट बुकिंग का होता है। जैसे ही तत्काल विंडो खुलती है, बड़ी संख्या में यात्री एक साथ वेबसाइट और ऐप पर लॉगिन कर टिकट बुक करने की कोशिश करते हैं।
इस दौरान सिस्टम पर अचानक ट्रैफिक बढ़ जाता है। नया PRS इसी तरह के हाई-लोड ट्रैफिक को बेहतर तरीके से संभालने के लिए विकसित किया जा रहा है।
अगर नई व्यवस्था अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार काम करती है, तो यात्रियों को टिकट बुकिंग के दौरान सिस्टम स्लो होने या लंबे समय तक प्रतिक्रिया का इंतजार करने जैसी समस्याओं में कमी देखने को मिल सकती है।
हालांकि नया सिस्टम कन्फर्म टिकट मिलने की गारंटी नहीं देगा, क्योंकि सीट उपलब्धता ट्रेन, कोटा और मांग पर निर्भर रहती है। बदलाव मुख्य रूप से टिकटिंग सिस्टम की स्पीड और क्षमता से जुड़ा है।
नए सिस्टम को चरणों में किया जाएगा लागू
रेलवे पुराने PRS को अचानक बंद करके नया सिस्टम शुरू नहीं करेगा। माइग्रेशन प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में पूरा किया जा रहा है।
नई तकनीक को पहले अलग-अलग स्तर के यूजर ट्रैफिक पर टेस्ट किया जाएगा। इससे यह देखा जा सकेगा कि सामान्य दिनों के साथ त्योहार, छुट्टियों और तत्काल बुकिंग जैसे भारी ट्रैफिक वाले समय में सिस्टम कितना स्थिर रहता है।
जब नई व्यवस्था अलग-अलग परीक्षणों में संतोषजनक प्रदर्शन करेगी, तब पुराने सिस्टम से ज्यादा सेवाएं नए प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर की जा सकती हैं।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यात्रियों को बिना बड़ी तकनीकी बाधा के नई व्यवस्था पर ले जाना है।
IRCTC का नया इंटरफेस भी बदलाव का हिस्सा
रेलवे टिकटिंग के डिजिटल अनुभव में केवल बैकएंड तकनीक ही नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए उपलब्ध इंटरफेस को भी बेहतर बनाया जा रहा है।
नए सिस्टम में यूजर-फ्रेंडली डिजाइन और कई भाषाओं में सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों और भाषाओं के यात्रियों के लिए टिकट बुकिंग और ट्रेन से संबंधित जानकारी हासिल करना आसान हो सकता है।
IRCTC की नई डिजिटल व्यवस्था और बीटा प्लेटफॉर्म को भी इसी बड़े तकनीकी बदलाव के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।
टिकट के साथ Waiting List और RAC भी संभालेगा PRS
Passenger Reservation System केवल टिकट बेचने वाला प्लेटफॉर्म नहीं है। रेलवे की पूरी रिजर्वेशन व्यवस्था इससे जुड़ी रहती है।
PRS के जरिए कई महत्वपूर्ण काम होते हैं, जैसे:
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टिकट बुकिंग और कैंसिलेशन
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सीट और बर्थ का आवंटन
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Waiting List मैनेजमेंट
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RAC स्टेटस
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रिजर्वेशन चार्ट तैयार करना
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यात्री और सीट उपलब्धता से जुड़ी पूछताछ
इसलिए नए PRS का असर सिर्फ टिकट खरीदने की स्पीड तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए रिजर्वेशन से जुड़ी पूरी डिजिटल व्यवस्था को ज्यादा स्केलेबल और स्थिर बनाने की कोशिश की जा रही है।
89% रिजर्व टिकट ऑनलाइन बुक
रेलवे में डिजिटल टिकटिंग का इस्तेमाल किस तेजी से बढ़ा है, इसका अंदाजा आरक्षित टिकटों के आंकड़ों से लगाया जा सकता है।
जून 2025 से जून 2026 के बीच PRS के जरिए कुल 65.08 करोड़ रिजर्व टिकट बुक किए गए। इनमें से करीब 57.90 करोड़ टिकट ऑनलाइन माध्यम से बुक हुए, जो कुल आरक्षित टिकटों का लगभग 89% है।
इन आंकड़ों से साफ है कि रेलवे रिजर्वेशन में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की भूमिका अब बेहद महत्वपूर्ण हो चुकी है। ऐसे में तकनीकी सिस्टम की क्षमता बढ़ाना भविष्य की जरूरत भी बन गया है।
IRCTC Beta Platform पर बुकिंग स्पीड में सुधार का दावा
नई डिजिटल व्यवस्था से जुड़े शुरुआती बदलावों के बाद तत्काल टिकट बुकिंग की गति में सुधार की बात भी सामने आई है।
15 जुलाई को बीटा प्लेटफॉर्म लॉन्च होने के बाद पहले तीन मिनट के अंदर पूरी होने वाली तत्काल बुकिंग के अनुपात में 5% से अधिक बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसी तरह पांच मिनट के भीतर पूरी होने वाली बुकिंग में करीब 3% और 30 मिनट के अंदर पूरी होने वाली बुकिंग में 2% से अधिक सुधार दर्ज किया गया।
हालांकि इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि हर यात्री को तत्काल टिकट आसानी से मिल जाएगा। टिकट की उपलब्धता मांग और सीटों की संख्या पर निर्भर रहती है।
RailOne समेत कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रेलवे का फोकस
रेलवे यात्रियों के लिए टिकटिंग के अलावा दूसरी डिजिटल सुविधाओं का भी लगातार विस्तार कर रहा है। CRIS द्वारा विभिन्न सेवाओं के लिए कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए गए हैं।
इनमें RailOne, UTS, NTES, RailMadad और दूसरी सेवाएं शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से ट्रेन की स्थिति देखने, टिकटिंग, शिकायत दर्ज कराने और दूसरी रेलवे सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।
नए PRS के साथ इन डिजिटल प्लेटफॉर्म का बेहतर तकनीकी तालमेल यात्रियों के लिए एक ज्यादा सहज डिजिटल इकोसिस्टम तैयार कर सकता है।
यात्रियों के लिए क्या बदलेगा?
नए PRS का सबसे बड़ा फायदा उसकी ज्यादा processing capacity हो सकती है। भारी ट्रैफिक के दौरान बड़ी संख्या में बुकिंग और पूछताछ एक साथ प्रोसेस होने से यात्रियों का ऑनलाइन अनुभव बेहतर हो सकता है।
इसके अलावा मल्टीलिंगुअल इंटरफेस, बेहतर scalability और ज्यादा आधुनिक तकनीक से रेलवे भविष्य में बढ़ने वाले ऑनलाइन ट्रैफिक को भी अधिक प्रभावी ढंग से संभाल सकेगा।
हालांकि यात्रियों को यह समझना जरूरी है कि तेज PRS का अर्थ हर टिकट का कन्फर्म होना नहीं है। कन्फर्मेशन उपलब्ध सीटों और मांग पर ही निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर भारतीय रेलवे का करीब चार दशक पुराने PRS से नई पीढ़ी के रिजर्वेशन सिस्टम की ओर बढ़ना टिकटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव है। अगर चरणबद्ध माइग्रेशन सफल रहता है, तो आने वाले समय में रेलवे टिकट बुकिंग पहले की तुलना में ज्यादा तेज, स्थिर और सुविधाजनक हो सकती है।
