Crude Oil Price Today: 7% की बड़ी गिरावट के बाद संभला कच्चा तेल, जानें आज क्यों बढ़े ब्रेंट और WTI के दाम
Crude Oil Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को हल्की रिकवरी देखने को मिली। पिछले कारोबारी सत्र में तेज गिरावट दर्ज होने के बाद आज ब्रेंट और WTI क्रूड दोनों में बढ़त आई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने फिर से खरीदारी शुरू की, जिससे तेल की कीमतों को समर्थन मिला।
पिछले सत्र की भारी गिरावट के बाद लौटी तेजी
सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। ब्रेंट क्रूड लगभग 7% फिसलकर तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गया था, जबकि WTI क्रूड में भी 5% से अधिक की कमजोरी देखने को मिली थी।
हालांकि मंगलवार के कारोबार में बाजार का रुख बदला और दोनों प्रमुख बेंचमार्क में करीब 0.7% की बढ़त दर्ज की गई।
- ब्रेंट क्रूड: लगभग 84.39 डॉलर प्रति बैरल
- WTI क्रूड: करीब 80.95 डॉलर प्रति बैरल
आखिर क्यों बढ़ने लगीं तेल की कीमतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में आई ताजा तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंता है।
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में निवेशकों को आशंका है कि यदि क्षेत्र में हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी संभावना ने बाजार में दोबारा खरीदारी बढ़ा दी।
अमेरिका-ईरान विवाद पर बनी हुई है नजर
हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की चर्चा जरूर हुई थी, लेकिन अभी तक किसी ठोस समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।
ईरान ने भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ किसी नई वार्ता या बैठक की पुष्टि नहीं की गई है। इस कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है और निवेशक आगे की घटनाओं पर नजर रखे हुए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?
वैश्विक तेल व्यापार में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल उत्पादक देशों से दुनिया के कई हिस्सों में कच्चे तेल की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है।
विश्लेषकों के अनुसार, दुनिया की कुल दैनिक तेल खपत का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यदि यहां किसी तरह का व्यवधान आता है, तो उसका असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर तुरंत दिखाई देता है।
शिपिंग गतिविधियों ने भी बढ़ाई चिंता
मध्य पूर्व में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों के कारण कई तेल टैंकरों ने अपने निर्धारित समुद्री मार्ग में बदलाव किया है। कुछ जहाजों ने वैकल्पिक रास्ते अपनाए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
इसके अलावा क्षेत्र में कुछ व्यावसायिक जहाजों से जुड़ी सुरक्षा घटनाओं की खबरों ने भी बाजार की सतर्कता बढ़ाई है।
भारत पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में होने वाला उतार-चढ़ाव देश की अर्थव्यवस्था और ईंधन लागत दोनों को प्रभावित कर सकता है।
यदि क्रूड ऑयल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो भविष्य में पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की लागत पर भी दबाव बढ़ सकता है। हालांकि खुदरा ईंधन की कीमतें तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति और सरकारी कर व्यवस्था पर भी निर्भर करती हैं।
निवेशकों की नजर किन बातों पर रहेगी?
आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा कई महत्वपूर्ण कारकों से तय होगी—
- अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक घटनाक्रम
- मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति
- होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही
- वैश्विक तेल मांग और आपूर्ति
- प्रमुख तेल उत्पादक देशों की उत्पादन नीति
इन सभी घटनाओं का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश सलाह नहीं है। कमोडिटी या किसी अन्य वित्तीय बाजार में निवेश करने से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।
