Travel Tips- राजस्थान के इस शहर में हैं 100 आइलैंड, जानिए इसके बारे में
दोस्तो जब कभी भी राजस्थान का नाम लिया जाता हैं, तो आंखों के सामने रेगिस्तान, ऊंट, विशाल किले और तपती गर्मी महसूस और दिखने लग जाते हैं, लेकिन क्या आपको पता हैं, राजस्थान का एक ऐसा हिस्सा भी है, जो अपनी हरियाली, झीलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक सुंदरता के कारण इस पारंपरिक छवि से बिल्कुल अलग नजर आता है। यह जगह है बांसवाड़ा, जिसे ‘सिटी ऑफ 100 आइलैंड्स’ यानी 100 द्वीपों का शहर भी कहा जाता है। अगर आप राजस्थान की एक अनदेखी और प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर जगह देखना चाहते हैं, तो बांसवाड़ा एक खास पर्यटन स्थल हो सकता है।

बांसवाड़ा का इतिहास
राजस्थान पर्यटन के अनुसार, बांसवाड़ा का नाम यहां कभी बड़ी संख्या में पाए जाने वाले ‘बांस’ के पेड़ों से जुड़ा माना जाता है। इसके अलावा, इतिहास में बांसिया नामक एक भील शासक का भी उल्लेख मिलता है, जिनसे इस क्षेत्र के नाम को जोड़कर देखा जाता है।
बांसवाड़ा क्षेत्र में भील समुदाय की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही है और यहां की संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन पर इसका गहरा प्रभाव दिखाई देता है।
राजस्थान के बीच इतनी हरियाली क्यों?
बांसवाड़ा की भौगोलिक परिस्थितियां इसे राजस्थान के कई अन्य क्षेत्रों से अलग बनाती हैं। यहां अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होती है, जिसके कारण क्षेत्र में हरियाली और जल स्रोतों की भरपूर मौजूदगी देखने को मिलती है।

यहां की उपजाऊ जमीन पर कई तरह की फसलें उगाई जाती हैं, जिनमें प्रमुख रूप से:
मक्का
गेहूं
धान
कपास
सोयाबीन
चना
शामिल हैं।
क्षेत्र में सागौन के जंगल भी पाए जाते हैं। इसके अलावा आम, खजूर और महुआ जैसे पेड़ यहां की प्राकृतिक संपदा का हिस्सा हैं।
‘सिटी ऑफ 100 आइलैंड्स’ क्यों कहा जाता है?
बांसवाड़ा की सबसे खास पहचान यहां मौजूद माही नदी के द्वीप हैं। नदी में कई छोटे-बड़े द्वीप दिखाई देते हैं, जिसके कारण इसे ‘सिटी ऑफ 100 आइलैंड्स’ के नाम से जाना जाता है।
बारिश के मौसम में यहां की प्राकृतिक सुंदरता और भी निखर जाती है। पहाड़ियों, जलाशयों, हरियाली और नदी के बीच बने द्वीपों का नजारा बांसवाड़ा को राजस्थान की एक अलग तस्वीर पेश करता है।
बांसवाड़ा में घूमने की प्रमुख जगहें
बांसवाड़ा में प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की भी भरमार है। यहां घूमने के दौरान इन जगहों को देखा जा सकता है:
आनंद सागर झील
डायलाब झील
कागदी पिकअप वियर
माही डैम
राम कुंड
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर
माडरेश्वर मंदिर
विट्ठल देव मंदिर
तलवाड़ा मंदिर
अंदेश्वर पार्श्वनाथ जी
अब्दुल्ला पीर
कल्पवृक्ष
मांगरह धाम
परहेड़ा
राज मंदिर
सिंगपुरा
जुआ वाटरफॉल
इन स्थानों पर आपको बांसवाड़ा की धार्मिक विरासत, आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक खूबसूरती तीनों का अनुभव मिल सकता है।
बांसवाड़ा कैसे पहुंचें?
बांसवाड़ा पहुंचने के लिए उदयपुर एयरपोर्ट सबसे नजदीकी प्रमुख हवाई अड्डों में से एक है, जो शहर से करीब 185 किलोमीटर दूर है।
रेल से आने वाले यात्रियों के लिए रतलाम रेलवे स्टेशन लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी बांसवाड़ा पहुंचा जा सकता है और दिल्ली, जयपुर तथा भरतपुर जैसे शहरों से बस सेवाएं उपलब्ध हैं।
राजस्थान का एक अलग रूप देखना है तो जाएं बांसवाड़ा
बांसवाड़ा उन लोगों के लिए खास जगह है, जो राजस्थान को सिर्फ रेगिस्तान और किलों के नजरिए से नहीं, बल्कि हरियाली, नदियों, झीलों, पहाड़ियों और आदिवासी संस्कृति के साथ देखना चाहते हैं। माही नदी के द्वीप और आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसे राजस्थान के कम चर्चित लेकिन आकर्षक पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं।
