Travel Tip- भारत में हैं तैरने वाला पार्क, इसकी खासियत जानकर हैरान हो जाएंगे आप
दोस्तो जब कभी भी हमारे जहन में किसी पार्क का ख्याल आता हैं तो हमारी आंखों के सामने घने जंगल, बड़े घास के मैदान या ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाके आते हैं। लेकिन मणिपुर का केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क इन सबसे बिल्कुल अलग है। यह अनोखा संरक्षित इलाका मीठे पानी की झील पर तैरता हुआ सा लगता है, जिससे एक खास तरह का इकोसिस्टम बनता है जहाँ जंगली जानवर तैरती हुई वनस्पति पर घूमते हैं। आइए जानते हैं इसके बारे में-

केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क: एक तैरता हुआ इकोसिस्टम
केइबुल लामजाओ नेशनल पार्क इम्फाल से लगभग 50-55 किलोमीटर दूर है। इसकी सबसे दिलचस्प बात तैरती हुई फुम्डी का नेटवर्क है, जो पार्क का आधार बनाती हैं।
ये तैरती हुई संरचनाएँ आकार और मोटाई में अलग-अलग होती हैं और एक अनोखा वेटलैंड (आर्द्रभूमि) माहौल बनाती हैं। पानी की हलचल के साथ यहाँ का नज़ारा बदलता रहता है, जिससे यह पार्क आम नेशनल पार्कों से बिल्कुल अलग दिखता है।
दुर्लभ संगाई हिरण का घर
यह पार्क इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि यह संगाई, या 'ब्राउ-एंटलर्ड डियर' (भूरे सींग वाले हिरण) के लिए प्राकृतिक आवास है, जो मणिपुर के सबसे खास और लुप्तप्राय जानवरों में से एक है।
संगाई हिरण के अलावा, यह इलाका कई अन्य प्रजातियों का भी घर है, जिनमें शामिल हैं:
हॉग डियर (सूअर जैसा दिखने वाला हिरण)
ऊदबिलाव
वॉटरफाउल (पानी में रहने वाले पक्षी)
वेटलैंड के कई तरह के पक्षी
प्रवासी पक्षी, खासकर सर्दियों के महीनों में
नवंबर से मार्च का समय पक्षी प्रेमियों के लिए बहुत दिलचस्प हो सकता है, क्योंकि इस दौरान कई प्रवासी प्रजातियाँ यहाँ आती हैं।

लोकतक झील इसकी खासियत को और बढ़ाती है
लोकतक झील, जो पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है, केइबुल लामजाओ की पहचान का मुख्य हिस्सा है। इसकी तैरती हुई फुम्डी इसकी सबसे खास प्राकृतिक विशेषताओं में से एक हैं।
यह झील तैरती हुई संरचनाओं पर बनी पारंपरिक मानव बस्तियों से भी जुड़ी है। 'फुमसैंग' नाम की तैरती हुई झोपड़ियाँ यहाँ के नज़ारे को और भी दिलचस्प बनाती हैं और स्थानीय समुदायों व झील के बीच गहरे रिश्ते को दिखाती हैं।
केइबुल लामजाओ क्यों खास है?
केइबुल लामजाओ सिर्फ़ एक खूबसूरत पर्यटन स्थल ही नहीं है। यह एक अनोखा वेटलैंड इकोसिस्टम है जिसमें तैरती हुई वनस्पतियां, मीठे पानी के आवास और दुर्लभ वन्यजीव शामिल हैं।
यहाँ पाए जाने वाले संगाई हिरण के कारण यह पार्क वन्यजीव संरक्षण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जबकि तैरती हुई 'फुम्डी' (phumdis) इसे भारत में कहीं और न मिलने वाली एक खास पहचान देती हैं।
