Silver New Rule: लाखों की चांदी को लेकर केंद्र सरकार का एक और बड़ा फैसला, क्लिक कर आप भी जान लें
pc: ET Retail
केंद्र सरकार ने चांदी को लेकर एक और बड़ा फैसला लिया है। अब चांदी का इंपोर्ट करना और भी मुश्किल हो गया है। इस फैसले का घरेलू चांदी मार्केट पर बड़ा असर पड़ेगा। केंद्र सरकार ने यह फैसला देश में चांदी के बढ़ते इंपोर्ट को रोकने के लिए लिया है। अब इंपोर्टर्स के लिए 99.9 परसेंट या उससे ज़्यादा प्योरिटी वाली चांदी, चांदी का पाउडर और दाने इंपोर्ट करने के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ फॉरेन ट्रेड (DGFT) से परमिशन लेना ज़रूरी कर दिया गया है।
सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?
सरकार ने इस तरह की चांदी को रेस्ट्रिक्टेड कैटेगरी में शामिल कर दिया है। अब कोई भी सीधे चांदी इंपोर्ट नहीं कर पाएगा। इंपोर्ट करने से पहले DGFT से परमिशन लेना ज़रूरी होगा। पिछले कुछ महीनों में चांदी का इंपोर्ट काफी बढ़ा है। भारत ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में $12 बिलियन की चांदी इंपोर्ट की। यह इंपोर्ट पिछले साल के मुकाबले काफी ज़्यादा है। चूंकि इस बड़े इंपोर्ट से देश के फॉरेन एक्सचेंज रिज़र्व पर दबाव पड़ रहा है, इसलिए सरकार ने इंपोर्ट कम करने के लिए यह फैसला लिया है।
सरकार के यह फैसला लेने से पहले, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव पैदा हो गया था। उस माहौल में, 13 मई, 2026 को सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी गई थी। इस बीच, इंपोर्ट पर रोक और बढ़ी हुई ड्यूटी से घरेलू बाजार में चांदी की सप्लाई कम हो सकती है।
एक्सपर्ट्स ने आशंका जताई है कि अगर डिमांड जारी रही, तो आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा, और कीमत में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। भारत UAE, ब्रिटेन और चीन जैसे देशों से चांदी इंपोर्ट करता है। चांदी का इस्तेमाल ज्वेलरी इंडस्ट्री, सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अलग-अलग इंडस्ट्रियल सेक्टर में बड़े पैमाने पर होता है।
