RBI Rules- RBI ने रिकवरी नियमों में किया बदलाव, लोन न चुकाने पर मोबाइल-लैपटॉप लॉक नहीं कर सकेंगे बैंक
दोस्तो आज के इस युग में अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लोन लेते हैं, लेकिन कई बार ऐसी स्थिति प्रकट हो जाती हैं, जिसकी वजह से EMI नही दे पाते हैं, जिसकी वजह से परेशानी होती है, लेकिन हाल ही में आपके लिए RBI के नए नियम बेहद महत्वपूर्ण हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 अगस्त को लोन रिकवरी के दौरान ग्राहकों के मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट को सॉफ्टवेयर के जरिए लॉक या डिसेबल करने को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।

RBI का उद्देश्य लोन रिकवरी के नाम पर ग्राहकों को धमकाने, उनकी निजता का उल्लंघन करने और अनुचित तरीके से परेशान करने पर रोक लगाना है। हालांकि, अगर खुद डिवाइस खरीदने के लिए उसी बैंक या वित्तीय संस्था से लोन लिया गया है, तो कुछ निर्धारित शर्तों के तहत डिवाइस-लॉकिंग की अनुमति हो सकती है।
RBI के नए Loan Recovery Rules: सवाल-जवाब में समझें
सवाल 1: RBI ने लोन रिकवरी को लेकर क्या नया निर्देश दिया है?
RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंक या वित्तीय संस्थान पर्सनल, होम या कार लोन की EMI वसूलने के लिए ग्राहक के मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट को सॉफ्टवेयर के जरिए लॉक या डिसेबल नहीं कर सकते।
सवाल 2: क्या बैंक किसी भी स्थिति में मोबाइल या लैपटॉप लॉक नहीं कर सकते?
एक महत्वपूर्ण अपवाद है। अगर वही मोबाइल, लैपटॉप या अन्य डिवाइस खरीदने के लिए उसी बैंक या वित्तीय संस्था से लोन/फाइनेंस लिया गया है, तो निर्धारित नियमों के तहत डिवाइस-लॉकिंग की अनुमति हो सकती है।
लेकिन अगर लोन किसी दूसरे उद्देश्य, जैसे घर, कार या व्यक्तिगत जरूरत के लिए लिया गया है, तो उस लोन की रिकवरी के लिए मोबाइल या लैपटॉप लॉक करना प्रतिबंधित है।
सवाल 3: अगर डिवाइस खुद लोन पर खरीदा गया है, तो क्या बैंक उसे तुरंत लॉक कर सकता है?
नहीं। डिवाइस फाइनेंस होने की स्थिति में भी बैंक या संबंधित संस्था सीधे और तुरंत डिवाइस को लॉक नहीं कर सकती। RBI ने इसके लिए चरणबद्ध प्रक्रिया (phased approach) अपनाने की बात कही है।

सवाल 4: डिवाइस लॉक होने की स्थिति में कौन-सी सुविधाएं चालू रहनी चाहिए?
अगर लोन पर खरीदे गए डिवाइस को नियमों के तहत प्रतिबंधित किया जाता है, तब भी जरूरी सेवाओं को बंद नहीं किया जा सकता। इनमें मुख्य रूप से:
इनकमिंग कॉल
SMS
Emergency SOS जैसी जरूरी सुविधाएं
शामिल हैं।
सवाल 5: डिवाइस लॉकिंग तकनीक के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या नियम हैं?
बैंक या उनके थर्ड-पार्टी सर्विस प्रोवाइडर किसी भी अनधिकृत या अप्रमाणित सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल नहीं कर सकते। इसके लिए डिवाइस के Original Equipment Manufacturer (OEM) या संबंधित Operating System (OS) प्लेटफॉर्म से औपचारिक प्रमाणन लेना जरूरी होगा।
सवाल 6: RBI को इतने सख्त नियम बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
लोन रिकवरी के दौरान ग्राहकों को परेशान किए जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। कुछ मामलों में रिकवरी एजेंटों पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने, धमकाने और ग्राहकों की तस्वीरें या व्यक्तिगत जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे हैं।
RBI के नए निर्देशों का उद्देश्य ऐसे अनुचित और उत्पीड़नकारी तरीकों पर रोक लगाना है।
सवाल 7: रिकवरी एजेंटों के साथ ग्राहक की व्यक्तिगत जानकारी साझा करने को लेकर क्या नियम हैं?
बैंक और वित्तीय संस्थान ग्राहक या गारंटर की व्यक्तिगत जानकारी अपने कर्मचारियों या रिकवरी एजेंसियों के साथ केवल सीमित और आवश्यक दायरे में साझा कर सकते हैं।
रिकवरी की जिम्मेदारी निभाने के लिए जितनी जानकारी जरूरी है, उतनी ही साझा की जानी चाहिए। अनावश्यक व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचना होगा।
सवाल 8: ये नए नियम कब से लागू होंगे?
RBI के अनुसार संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होंगे।
इससे पहले RBI ने मई 2026 में ‘Conduct of Regulated Entities in Recovery of Loans’ शीर्षक से ड्राफ्ट जारी किया था। हितधारकों से प्राप्त सुझावों और फीडबैक के बाद अब अंतिम दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
