Parenting Health Tips: क्या आपके बच्चे को बार बार लग रही हैं भूख, बच्चों में पोषण सुधारने के लिए अपनाएं ये तरीके
दोस्तो अगर आपके घर में बच्चे हैं तो आपके लिए यह खबर बहुत ही जरूरी हैं, आपने देखा होगा कि बच्चे बार बार कुछ खाने के लिए कहते हैं, लेकिन हर बार खाने की इच्छा का मतलब भूख होना जरूरी नहीं है। कई बार बच्चे बोरियत, आदत, भावनाओं या किसी खास गतिविधि के कारण भी बार-बार खाने की मांग करने लगते हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, माता-पिता के लिए यह समझना जरूरी है कि बच्चा वास्तव में भूखा है या सिर्फ आदतन कुछ खाना चाहता है। आइए कैसे करें अंतर-

असली भूख और आदतन खाने में क्या अंतर है?
वास्तविक भूख आमतौर पर धीरे-धीरे महसूस होती है। बच्चे को ऊर्जा कम महसूस हो सकती है और वह उपलब्ध भोजन में से कुछ भी खाने के लिए तैयार हो सकता है। बच्चा यह भी बता सकता है कि उसे भूख लगी है।
वहीं आदत या परिस्थिति के कारण खाना अक्सर किसी खास गतिविधि से जुड़ा होता है। जैसे:
टीवी देखते ही बच्चा स्नैक्स मांगने लगे।
स्कूल से घर आते ही कुछ खाने की आदत हो।
मोबाइल या टैबलेट पर गेम खेलते समय लगातार कुछ खाने का मन करे।
खाना खाने के थोड़ी देर बाद ही चिप्स, बिस्किट या कोई खास स्नैक मांगने लगे।
ऐसे मामलों में जरूरी नहीं कि बच्चा जिद कर रहा हो। कई बार उसके दिमाग में किसी गतिविधि और खाने के बीच एक आदत बन चुकी होती है।
बच्चे के व्यवहार को समझना जरूरी
अगर बच्चा बार-बार खाने के लिए कहता है तो तुरंत उसे ज्यादा खाने वाला या जिद्दी समझने से बचें। दूसरी ओर, हर बार मांगने पर खाना देना भी सही आदत नहीं है।

बच्चे से प्यार से बात करें और पूछें:
"क्या तुम्हें सच में भूख लगी है या सिर्फ कुछ खाने का मन कर रहा है?"
बच्चे को कुछ देर रुककर अपने शरीर के संकेतों को समझने के लिए प्रोत्साहित करें। धीरे-धीरे वह भूख और सिर्फ खाने की इच्छा के बीच अंतर पहचानना सीख सकता है।
घर का माहौल भी खाने की आदतों को प्रभावित करता है
बच्चे वही चीजें ज्यादा मांग सकते हैं जो उन्हें आसानी से दिखाई देती हैं और घर में हमेशा उपलब्ध रहती हैं। अगर चिप्स, बिस्किट, मिठाई और पैकेज्ड स्नैक्स हर समय सामने रखे हों, तो बच्चे का बार-बार उन्हें मांगना स्वाभाविक हो सकता है।
इसके बजाय घर में पौष्टिक विकल्प आसानी से उपलब्ध रखें, जैसे:
फल
दही
मखाना
घर पर बने स्नैक्स
सूखे मेवे, उम्र के अनुसार
अन्य पौष्टिक विकल्प
इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे को उसकी पसंदीदा चीजों से पूरी तरह दूर कर दिया जाए। बेहतर तरीका है कि पसंदीदा स्नैक्स और पौष्टिक भोजन के बीच संतुलन बनाया जाए।
टीवी और मोबाइल के साथ खाने की आदत पर दें ध्यान
अगर बच्चा केवल टीवी देखते समय, मोबाइल चलाते समय या गेम खेलते हुए खाना मांगता है, तो इस आदत को धीरे-धीरे बदलने की कोशिश करें।
खाने के लिए निश्चित समय तय करना और भोजन के दौरान स्क्रीन का इस्तेमाल कम करना बच्चे को अपने भोजन पर ध्यान देने में मदद कर सकता है।
बच्चे को बार-बार डांटने या उसके खाने को लेकर शर्मिंदा करने के बजाय यह समझने की कोशिश करें कि वह किस परिस्थिति में खाना मांग रहा है।
माता-पिता इन बातों का रखें ध्यान
बच्चा बार-बार खाना मांगे तो तुरंत यह न मानें कि उसे भूख लगी है।
प्यार से पूछें कि उसे वास्तव में भूख लगी है या सिर्फ कुछ खाने की इच्छा हो रही है।
घर में पौष्टिक स्नैक्स आसानी से उपलब्ध रखें।
बहुत ज्यादा मीठे और प्रोसेस्ड स्नैक्स को हर समय बच्चे की नजर के सामने न रखें।
टीवी और मोबाइल देखते समय लगातार स्नैकिंग की आदत को धीरे-धीरे कम करें।
बच्चे को भूख और पेट भरने के संकेत पहचानना सिखाएं।
खाने की आदतों को लेकर बच्चे को डांटने या शर्मिंदा करने से बचें।
नियमित भोजन और स्नैक का एक संतुलित रूटीन बनाने की कोशिश करें।
सिर्फ क्या खा रहा है नहीं, कब और क्यों खा रहा है यह भी समझें
बच्चों की खान-पान की आदत सुधारने के लिए केवल इस बात पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है कि वे क्या खा रहे हैं। यह समझना भी जरूरी है कि वे कब, क्यों और किस परिस्थिति में खाना चाहते हैं।
