Offbeat: शबरी के जूठे बेर ने बचाई थी लक्ष्मण की जान, यहाँ जानें कैसे
pc: TV9 Bharatvarsh
रामायण के हर एक किरदार से हम कुछ न कुछ सीख सकते हैं। शबरी का भगवान राम के प्रति भक्ति और प्रेम भी बेहद ही अद्भुत है जिस से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।
ऋषि मतंग ने एक बार शबरी को इस बारे में जानकारी दी थी कि प्रभु राम तुम्हारी कुटिया में एक दिन जरूर आएँगे। इसी इंतजार में शबरी रोजाना कुटिया को सजाती और उनके लिए बेर भी तोड़ कर लाती थी।
वनवास के दौरान भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ उनकी कुटिया में गए और उन्हें देख शबरी बेहद ही ख़ुशी हुई और खुशी के आंसू बहने लगे।
शबरी के पास भगवान राम को खिलाने के लिए बस बेर ही थे। वह पहले स्वंय बेर चखती और फिर मीठा होता तो उसे प्रभु श्रीराम के लिए रख देती। भगवान राम ने अपने भक्त की भक्ति देखी और खुशी खुशी उनके जूठे बेर खाए।
लेकिन लक्ष्मण जी को बेर खाने में दिक्क्त थी और वे सारे बेर फेंकते गए। लक्ष्मण जी ने शबरी के जूठे बेर का सेवन नहीं किया लेकिन इन्हीं बेरों ने लक्ष्मण जी के प्राण बचाए थे
पौराणिक कथा के अनुसार लक्ष्मण जी जब भी उन बेर को फेंकते थे तो द्रौणगिरी पर्वत पर बेर गिरते गए और उन्ही बेरों से संजीवनी बूटी उत्पन्न हुई।
जब मेघनाथ से युद्ध के दौरान लक्ष्मण मूर्छित हो गए तो इसी संजीवनी बूटी से उनकी जान बची जो हनुमान जी लेकर आए थे।
