Helmet Update- हेलमेट कितने साल में बदल लेना चाहिए, कब होती है उसकी एक्सपायरी डेट
दोस्तो स़ड़क परिवहन नियमों के अनुसार भारत में बाइक और स्कूटर चलाते समय हेलमेट पहनना ज़रूरी है ताकि दुर्घटना की स्थिति में सिर की गंभीर चोटों से बचा जा सके। कई लोग ट्रैफ़िक जुर्माना से बचने के लिए हेलमेट पहनते हैं, लेकिन इसका मुख्य मकसद राइडर की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हेलमेट हमेशा नहीं चलते और एक निश्चित समय के बाद उन्हें बदलने की ज़रूरत हो सकती है।
लगातार धूप, बारिश, धूल, पसीने और बदलते तापमान के संपर्क में रहने से हेलमेट की सामग्री पर धीरे-धीरे असर पड़ सकता है। इसके अलावा, जिस हेलमेट पर ज़ोरदार चोट लगी हो, वह अपनी सुरक्षा क्षमता खो सकता है, भले ही वह बाहर से बिना किसी नुकसान के दिखे। आइए जानते हैं हेलमेट कब बदल देना चाहिए-

1. हेलमेट कितने समय तक चलता है?
हेलमेट की उम्र उसकी गुणवत्ता, इस्तेमाल, रखरखाव और निर्माता की सलाह पर निर्भर करती है। कई हेलमेट निर्माता लगभग 3 से 5 साल के इस्तेमाल के बाद हेलमेट बदलने का सुझाव देते हैं, हालांकि यह समय सीमा ब्रांड और मॉडल के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
- लंबे समय तक हेलमेट का इस्तेमाल करने से पहले निर्माता की बदलने संबंधी सलाह ज़रूर देखें।
- अगर आप रोज़ाना भारी ट्रैफ़िक या खराब मौसम में गाड़ी चलाते हैं, तो अपने हेलमेट की नियमित रूप से जाँच करें।
- अगर हेलमेट के शेल, स्ट्रैप, बांधने वाले सिस्टम या अंदर की लाइनिंग में नुकसान के निशान दिखें, तो हेलमेट बदल लें।
- याद रखें कि बनने की तारीख और पहली बार इस्तेमाल करने की तारीख अलग-अलग हो सकती है।
2. अंदर का फ़ोम क्यों खराब हो जाता है?
अंदर की फ़ोम लाइनिंग, जो आमतौर पर एक्सपैंडेड पॉलीस्टाइरीन (EPS) से बनी होती है, दुर्घटना के दौरान चोट की ऊर्जा को सोखने में अहम भूमिका निभाती है।
समय के साथ, टूट-फूट हेलमेट की कुल स्थिति पर असर डाल सकती है। पसीना, बालों के उत्पाद, गर्मी और ठीक से साफ़ न करने से कुछ हिस्से खराब हो सकते हैं, खासकर आरामदायक लाइनिंग और चिपकाने वाले पदार्थ।
अगर अंदर का फ़ोम टूटा हुआ, दबा हुआ, ढीला या खराब हो रहा है, तो हेलमेट शायद उतनी सुरक्षा न दे पाए जितनी उसे देनी चाहिए। चोट सोखने वाले खराब फ़ोम को घर में मौजूद चिपकाने वाली चीज़ों से ठीक करने की कोशिश कभी न करें।

3. ज़ोरदार चोट लगने के बाद अपना हेलमेट बदलें
आम तौर पर दुर्घटना या ज़ोरदार चोट लगने के बाद हेलमेट बदल देना चाहिए, भले ही उसके बाहरी शेल पर कोई दरार न दिखे। हेलमेट के अंदर लगे झटके सोखने वाले लाइनर (impact-absorbing liner) में ऐसा छिपा हुआ नुकसान हो सकता है जिसे सिर्फ़ देखकर पता नहीं लगाया जा सकता।
- अगर हेलमेट किसी दुर्घटना (क्रैश) में शामिल रहा हो, तो उसे बदल दें।
- अगर यह ऊंचाई से गिर जाए या किसी सख्त सतह से ज़ोर से टकराए, तो बनाने वाली कंपनी की सलाह लें और अगर इसकी हालत को लेकर कोई शक हो, तो इसे बदल दें।
- अगर हेलमेट का बाहरी हिस्सा (शेल) टूटा हुआ हो, स्ट्रैप खराब हों या बकल में कोई खराबी हो, तो उसका इस्तेमाल न करें।
4. हमेशा ISI-सर्टिफाइड हेलमेट ही खरीदें
भारत में नया हेलमेट खरीदते समय, ऐसा असली हेलमेट चुनें जो BIS सुरक्षा मानकों को पूरा करता हो और जिस पर ISI का निशान हो।
हेलमेट खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें:
- किसी भरोसेमंद सेलर से खरीदें और सर्टिफिकेशन के निशान ज़रूर देखें।
- सही साइज़ चुनें ताकि हेलमेट अच्छी तरह फिट हो और ज़्यादा हिले-डुले नहीं।
- पक्का करें कि चिन स्ट्रैप और बकल ठीक से काम कर रहे हों।
- सस्ते, बिना ब्रांड वाले या बिना सर्टिफाइड हेलमेट न खरीदें, क्योंकि हो सकता है कि वे ठीक से सुरक्षा न दे पाएं।
- साफ़-सफ़ाई, रखने के तरीके और देखभाल के लिए बनाने वाली कंपनी के निर्देशों का पालन करें।
5. आप अपने हेलमेट की उम्र कैसे बढ़ा सकते हैं?
हालांकि हेलमेट का इस्तेमाल हमेशा के लिए नहीं किया जा सकता, लेकिन सही देखभाल से इसे अच्छी हालत में रखा जा सकता है।
- इस्तेमाल में न होने पर इसे सीधी धूप से दूर रखें।
- इसे गिरने से बचाएं और इस पर भारी चीज़ें न रखें।
- बनाने वाली कंपनी के निर्देशों के अनुसार इसे साफ़ करें।
- ऐसे तेज़ केमिकल या सॉल्वेंट का इस्तेमाल न करें जिनसे इसके मटीरियल को नुकसान पहुँच सकता है।
- इसे ठंडी और सूखी जगह पर रखें और इसके स्ट्रैप, बाहरी हिस्से (शेल) और अंदर की लाइनिंग की नियमित रूप से जांच करते रहें।
