Health Tips- काम का तनाव कब बन जाएगा मानसिक बीमारी, जानिए इसकी वजह
दोस्तो आज के अधिकांश युवा तनाव से ग्रसित हैं जिंदगी में ऑफिस की डेडलाइन, लगातार मीटिंग्स, बॉस का दबाव और अधूरे काम की चिंता तनाव को आम बना चुकी है। कुछ घंटों या कुछ दिनों तक रहने वाला तनाव सामान्य हो सकता है, लेकिन जब यही तनाव लंबे समय तक बना रहे और नींद, काम, रिश्तों तथा रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगे, तो समस्या गंभीर हो सकती हैं, आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स

भारत में मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति
National Mental Health Survey (2015-16) के अनुसार, भारत में लगभग 10.6% वयस्क आबादी किसी मौजूदा मानसिक विकार से प्रभावित थी। सर्वे में यह भी सामने आया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझने वाले लोगों और वास्तव में इलाज प्राप्त करने वालों के बीच बड़ा अंतर है।
इसका मतलब है कि समस्या मौजूद होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग समय पर विशेषज्ञ की मदद नहीं लेते।
कब सामान्य तनाव बन सकता है गंभीर समस्या?
मानसिक स्वास्थ्य को केवल बीमारी के नजरिए से नहीं देखना चाहिए। सामान्य तनाव, मानसिक परेशानी और मानसिक विकार—तीनों अलग-अलग स्थितियां हो सकती हैं।
काम बढ़ने या किसी मुश्किल परिस्थिति के कारण कुछ समय के लिए तनाव, बेचैनी या थकान महसूस होना सामान्य है। लेकिन जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे और व्यक्ति की काम करने की क्षमता या सामान्य जीवन प्रभावित होने लगे, तब इस पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
लगातार चिड़चिड़ापन या गुस्सा आना
बिना स्पष्ट कारण लगातार चिंता या बेचैनी रहना
नींद न आना या जरूरत से ज्यादा सोना
काम और पसंदीदा गतिविधियों में रुचि कम होना
किसी काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
हर समय थकान या ऊर्जा की कमी महसूस होना
लोगों से मिलने-जुलने से बचना
रोजमर्रा के काम करने में परेशानी महसूस होना
Depression के संकेत भी समझें
WHO के अनुसार, Depression में लंबे समय तक उदासी या पहले पसंद आने वाली गतिविधियों में रुचि खत्म होना प्रमुख संकेत हो सकते हैं। इसके साथ नींद, भूख, ऊर्जा और एकाग्रता में बदलाव भी देखने को मिल सकता है।
हर तनाव Depression नहीं होता, लेकिन लगातार बने रहने वाले ऐसे बदलावों को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं है।

डॉक्टर से कब सलाह लेनी चाहिए?
अगर तनाव या उससे जुड़े लक्षण लगातार बने हुए हैं, आपकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है या आपको लगता है कि आप स्थिति को अकेले संभाल नहीं पा रहे हैं, तो Mental Health Professional से सलाह लेना बेहतर है।
समय पर मदद लेने का मतलब हमेशा दवा लेना नहीं होता। विशेषज्ञ स्थिति का आकलन करने के बाद जरूरत के अनुसार:
Counseling या Psychotherapy
Lifestyle और Routine में बदलाव
Stress-management techniques
या जरूरत पड़ने पर Medication
की सलाह दे सकते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को भी दें प्राथमिकता
तनाव को जिंदगी का सामान्य हिस्सा मानना ठीक है, लेकिन लगातार तनाव को अपनी सामान्य स्थिति मान लेना सही नहीं है। अगर इसका असर आपकी नींद, काम, रिश्तों या दैनिक जीवन पर पड़ रहा है, तो मदद लेने में देरी न करें।
