Health Tips- हार्ट अटैक होने से पहले दिखाई देते हैं ये लक्षण, जानिए इनके बारे में

 
Health Tips- हार्ट अटैक होने से पहले दिखाई देते हैं ये लक्षण, जानिए इनके बारे में दोस्तो अगर हम हाल ही के सालों की बात करें देश में हार्ट अटैक के केस दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं, खासकर युवाओं में जो ऑफिस में काम करते समय, जिम करते समय और अन्य स्थिति में आ जाता हैं, हार्ट अटैक का खतरा हमेशा अचानक पैदा नहीं होता। शरीर में मौजूद कुछ जोखिम कारकों की पहचान पहले ही की जा सकती है और उन्हें नियंत्रित करके हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है Lipoprotein(a), जिसे Lp(a) कहा जाता है। यह खून में पाया जाने वाला एक प्रकार का लिपोप्रोटीन है, जिसका स्तर मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों से निर्धारित होता है। इसका स्तर अधिक होने पर हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। Lp(a) टेस्ट क्या है? Lp(a) का पता लगाने के लिए साधारण ब्लड टेस्ट किया जाता है। ध्यान रखें कि यह जांच सामान्य Lipid Profile का नियमित हिस्सा जरूरी नहीं होती, इसलिए इसके लिए अलग से टेस्ट करवाना पड़ सकता है। Lp(a) का स्तर काफी हद तक आनुवंशिक होता है और आमतौर पर लंबे समय तक अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। इसी वजह से विशेषज्ञ दिशानिर्देशों में वयस्कों को जीवन में कम से कम एक बार Lp(a) की जांच पर डॉक्टर से चर्चा करने की सलाह दी गई है। Lp(a) का स्तर बढ़ा हुआ होने का क्या मतलब है? American Heart Association के अनुसार: 50 mg/dL या 125 nmol/L या उससे अधिक Lp(a) स्तर को बढ़ा हुआ माना जाता है।  बढ़ा हुआ Lp(a) हृदय रोग और स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है।  केवल Lp(a) की रिपोर्ट देखकर किसी व्यक्ति के भविष्य में हार्ट अटैक होने की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।  उम्र, ब्लड प्रेशर, LDL कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान और परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास भी कुल जोखिम को प्रभावित करते हैं।  इसलिए Lp(a) बढ़ा हुआ आने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से हार्ट अटैक होगा। यह डॉक्टर को एक अतिरिक्त cardiovascular risk factor की जानकारी देता है। Lp(a), ApoA और ApoB एक जैसे नहीं हैं कई बार लोग Lp(a), ApoA और ApoB को एक ही समझ लेते हैं, जबकि ये अलग-अलग चीजें हैं। यदि आप Lp(a) की जांच करवाना चाहते हैं, तो लैब में टेस्ट का नाम और रिपोर्ट में दी गई यूनिट जरूर जांच लें। किसी भी भ्रम की स्थिति में डॉक्टर या पैथोलॉजिस्ट से रिपोर्ट समझना बेहतर है। Lp(a) ज्यादा होने पर क्या करें? क्योंकि Lp(a) का स्तर मुख्य रूप से आनुवंशिक होता है, इसलिए केवल खान-पान या व्यायाम से इसे काफी कम करना हमेशा संभव नहीं होता। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जोखिम को नियंत्रित करने के लिए कुछ नहीं किया जा सकता। डॉक्टर आमतौर पर इन बातों पर विशेष ध्यान देते हैं: LDL-C यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना  ब्लड प्रेशर को सामान्य सीमा में रखना  डायबिटीज होने पर ब्लड शुगर को नियंत्रित करना  धूम्रपान से पूरी तरह बचना  संतुलित और पौष्टिक आहार लेना  नियमित शारीरिक गतिविधि करना  पर्याप्त नींद लेना  स्वस्थ वजन बनाए रखना  परिवार में हृदय रोग के इतिहास को डॉक्टर को बताना  महत्वपूर्ण बात यह है कि LDL-C का लक्ष्य हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होता। डॉक्टर व्यक्ति के कुल cardiovascular risk के आधार पर उपचार और लक्ष्य तय करते हैं। किन लोगों को Lp(a) टेस्ट के बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए? खासकर उन लोगों को अपने डॉक्टर से Lp(a) जांच के बारे में चर्चा करनी चाहिए, जिनके परिवार में किसी सदस्य को कम उम्र में: हार्ट अटैक हुआ हो  स्ट्रोक हुआ हो  कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी हृदय संबंधी बीमारी हुई हो  या परिवार में असामान्य रूप से अधिक कोलेस्ट्रॉल की समस्या रही हो  इसके अलावा, जिन लोगों में पहले से हृदय रोग या अन्य cardiovascular risk factors मौजूद हैं, उनके लिए भी डॉक्टर Lp(a) टेस्ट पर विचार कर सकते हैं। याद रखें: एक टेस्ट पूरी कहानी नहीं बताता Lp(a) टेस्ट हृदय रोग के जोखिम को समझने में उपयोगी जानकारी दे सकता है, लेकिन कोई भी एक टेस्ट भविष्य में हार्ट अटैक होने की निश्चित भविष्यवाणी नहीं कर सकता। यदि आपकी Lp(a) रिपोर्ट अधिक आती है, तो घबराने के बजाय डॉक्टर से पूरी रिपोर्ट और अपने अन्य जोखिम कारकों के साथ इसका मूल्यांकन करवाएं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर LDL-C, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों को ध्यान में रखकर आगे की जांच या उपचार की सलाह दे सकते हैं।

दोस्तो अगर हम हाल ही के सालों की बात करें देश में हार्ट अटैक के केस दिन प्रतिदिन बढ़ते ही जा रहे हैं, खासकर युवाओं में जो ऑफिस में काम करते समय, जिम करते समय और अन्य स्थिति में आ जाता हैं, हार्ट अटैक का खतरा हमेशा अचानक पैदा नहीं होता। शरीर में मौजूद कुछ जोखिम कारकों की पहचान पहले ही की जा सकती है और उन्हें नियंत्रित करके हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

ऐसा ही एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है Lipoprotein(a), जिसे Lp(a) कहा जाता है। यह खून में पाया जाने वाला एक प्रकार का लिपोप्रोटीन है, जिसका स्तर मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों से निर्धारित होता है। इसका स्तर अधिक होने पर हृदय रोग और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।

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Lp(a) टेस्ट क्या है?

Lp(a) का पता लगाने के लिए साधारण ब्लड टेस्ट किया जाता है। ध्यान रखें कि यह जांच सामान्य Lipid Profile का नियमित हिस्सा जरूरी नहीं होती, इसलिए इसके लिए अलग से टेस्ट करवाना पड़ सकता है।

Lp(a) का स्तर काफी हद तक आनुवंशिक होता है और आमतौर पर लंबे समय तक अपेक्षाकृत स्थिर रहता है। इसी वजह से विशेषज्ञ दिशानिर्देशों में वयस्कों को जीवन में कम से कम एक बार Lp(a) की जांच पर डॉक्टर से चर्चा करने की सलाह दी गई है।

Lp(a) का स्तर बढ़ा हुआ होने का क्या मतलब है?

American Heart Association के अनुसार:

50 mg/dL या 125 nmol/L या उससे अधिक Lp(a) स्तर को बढ़ा हुआ माना जाता है।

बढ़ा हुआ Lp(a) हृदय रोग और स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है।

केवल Lp(a) की रिपोर्ट देखकर किसी व्यक्ति के भविष्य में हार्ट अटैक होने की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

उम्र, ब्लड प्रेशर, LDL कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, धूम्रपान और परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास भी कुल जोखिम को प्रभावित करते हैं।

इसलिए Lp(a) बढ़ा हुआ आने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से हार्ट अटैक होगा। यह डॉक्टर को एक अतिरिक्त cardiovascular risk factor की जानकारी देता है।

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Lp(a), ApoA और ApoB एक जैसे नहीं हैं

कई बार लोग Lp(a), ApoA और ApoB को एक ही समझ लेते हैं, जबकि ये अलग-अलग चीजें हैं।

यदि आप Lp(a) की जांच करवाना चाहते हैं, तो लैब में टेस्ट का नाम और रिपोर्ट में दी गई यूनिट जरूर जांच लें। किसी भी भ्रम की स्थिति में डॉक्टर या पैथोलॉजिस्ट से रिपोर्ट समझना बेहतर है।

Lp(a) ज्यादा होने पर क्या करें?

क्योंकि Lp(a) का स्तर मुख्य रूप से आनुवंशिक होता है, इसलिए केवल खान-पान या व्यायाम से इसे काफी कम करना हमेशा संभव नहीं होता। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जोखिम को नियंत्रित करने के लिए कुछ नहीं किया जा सकता।

डॉक्टर आमतौर पर इन बातों पर विशेष ध्यान देते हैं:

LDL-C यानी खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना

ब्लड प्रेशर को सामान्य सीमा में रखना

डायबिटीज होने पर ब्लड शुगर को नियंत्रित करना

धूम्रपान से पूरी तरह बचना

संतुलित और पौष्टिक आहार लेना

नियमित शारीरिक गतिविधि करना

पर्याप्त नींद लेना

स्वस्थ वजन बनाए रखना

परिवार में हृदय रोग के इतिहास को डॉक्टर को बताना

महत्वपूर्ण बात यह है कि LDL-C का लक्ष्य हर व्यक्ति के लिए समान नहीं होता। डॉक्टर व्यक्ति के कुल cardiovascular risk के आधार पर उपचार और लक्ष्य तय करते हैं।

किन लोगों को Lp(a) टेस्ट के बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए?

खासकर उन लोगों को अपने डॉक्टर से Lp(a) जांच के बारे में चर्चा करनी चाहिए, जिनके परिवार में किसी सदस्य को कम उम्र में:

हार्ट अटैक हुआ हो

स्ट्रोक हुआ हो

कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी हृदय संबंधी बीमारी हुई हो

या परिवार में असामान्य रूप से अधिक कोलेस्ट्रॉल की समस्या रही हो

इसके अलावा, जिन लोगों में पहले से हृदय रोग या अन्य cardiovascular risk factors मौजूद हैं, उनके लिए भी डॉक्टर Lp(a) टेस्ट पर विचार कर सकते हैं।

याद रखें: एक टेस्ट पूरी कहानी नहीं बताता

Lp(a) टेस्ट हृदय रोग के जोखिम को समझने में उपयोगी जानकारी दे सकता है, लेकिन कोई भी एक टेस्ट भविष्य में हार्ट अटैक होने की निश्चित भविष्यवाणी नहीं कर सकता।

यदि आपकी Lp(a) रिपोर्ट अधिक आती है, तो घबराने के बजाय डॉक्टर से पूरी रिपोर्ट और अपने अन्य जोखिम कारकों के साथ इसका मूल्यांकन करवाएं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर LDL-C, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारकों को ध्यान में रखकर आगे की जांच या उपचार की सलाह दे सकते हैं।