Health Tips- पेशाब में दिख रहे हैं ये बदलाव, तो हो सकता हैं ब्लैडर कैंसर का संकेत
दोस्तो शरीर की अंदरूनी बीमारियों का संकेत आपके शरीर के बाहरी अंग बता देते ते हैं, ऐसे में अगर आपके पेशाब में अचानक कुछ बदलाव दिखें जैसे पेशाब करने की इच्छा होना, या पेशाब करते समय जलन महसूस होना अक्सर डिहाइड्रेशन या यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) से जुड़े होते हैं। हालाँकि, कुछ मामलों में, ये लक्षण किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं, जिसमें ब्लैडर कैंसर भी शामिल है। आइए जानते हैं इसके लक्षणों के बारे में-

1. क्या रूटीन यूरिन टेस्ट से ब्लैडर कैंसर का पता चल सकता है?
एक रूटीन यूरिन टेस्ट ऐसी असामान्यताओं का पता लगा सकता है जो डॉक्टर को ब्लैडर कैंसर की संभावना की जांच करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं। हालाँकि, अलग-अलग टेस्ट के अलग-अलग मकसद होते हैं, और हर यूरिन टेस्ट कैंसर कोशिकाओं का पता नहीं लगा सकता।
डॉक्टर व्यक्ति के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर नीचे दिए गए टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
- यूरिनालिसिस (Urinalysis): इस टेस्ट में पेशाब में खून, इन्फेक्शन के संकेत और अन्य असामान्यताओं की जांच की जाती है। यह लाल रक्त कोशिकाओं (red blood cells) का पता लगा सकता है, भले ही नंगी आँखों से पेशाब सामान्य दिखे।
- यूरिन साइटोलॉजी (Urine Cytology): इस टेस्ट में असामान्य या संभावित कैंसर वाली कोशिकाओं का पता लगाने के लिए यूरिन सैंपल में कोशिकाओं की जांच की जाती है। यह कुछ खास हाई-ग्रेड ब्लैडर कैंसर का पता लगाने के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है, हालाँकि यह कुछ कैंसर से चूक भी सकता है।
- यूरिन ट्यूमर मार्कर टेस्ट (Urine Tumour Marker Tests): खास टेस्ट ब्लैडर कैंसर से जुड़े पदार्थों या मॉलिक्यूलर बदलावों का पता लगाते हैं। डॉक्टर कुछ खास मामलों में, जैसे कि कुछ फॉलो-अप स्थितियों में, इनकी सलाह दे सकते हैं।
असामान्य यूरिन टेस्ट का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को कैंसर है। इसी तरह, सामान्य परिणाम का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि ब्लैडर कैंसर नहीं है, अगर लक्षण या अन्य जांच के नतीजे चिंताजनक बने हुए हैं।
2. पेशाब में कौन से बदलाव ब्लैडर कैंसर का संकेत हो सकते हैं?
ब्लैडर कैंसर के कारण पेशाब से जुड़े कई लक्षण हो सकते हैं। हालाँकि, ये लक्षण इन्फेक्शन, किडनी स्टोन या अन्य मेडिकल स्थितियों के कारण भी हो सकते हैं।

महत्वपूर्ण चेतावनी संकेतों में शामिल हैं:
- पेशाब में खून आना: पेशाब गुलाबी, लाल या भूरे रंग का दिख सकता है। कभी-कभी, खून इतनी कम मात्रा में होता है कि इसका पता सिर्फ़ लैब टेस्ट से ही चल पाता है।
- बार-बार पेशाब आना: सामान्य से ज़्यादा बार पेशाब करने की ज़रूरत महसूस होना ब्लैडर में जलन या पेशाब से जुड़ी दूसरी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
- अचानक और तुरंत पेशाब करने की ज़रूरत: बार-बार यह महसूस होना कि आपको तुरंत पेशाब करना है, भले ही ब्लैडर भरा न हो, अगर यह समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
- पेशाब करते समय जलन या दर्द: यह लक्षण आमतौर पर UTI से जुड़ा होता है, लेकिन लगातार या बिना किसी स्पष्ट कारण के होने वाली परेशानी की भी जांच करवानी चाहिए।
- पेशाब करने में कठिनाई: पेशाब की धार में बदलाव या पेशाब करने में मुश्किल के कई कारण हो सकते हैं और इसकी जांच किसी हेल्थकेयर प्रोफेशनल से करवानी चाहिए।
सिर्फ़ इन लक्षणों के आधार पर कैंसर का पता नहीं लगाया जा सकता। मेडिकल जांच के ज़रिए इनके असली कारण का पता लगाना ज़रूरी है।
3. पेशाब में खून आना एक ज़रूरी चेतावनी का संकेत क्यों है?
शरीर से बाहर निकलने से पहले, किडनी से बनने वाला पेशाब ब्लैडर में जमा होता है। जब ब्लैडर की परत में ट्यूमर बनता है, तो यह छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचा सकता है और ब्लीडिंग का कारण बन सकता है।
पेशाब में खून आने की मेडिकल स्थिति को 'हेमेटुरिया' (hematuria) कहते हैं। यह आम तौर पर दो तरह का होता है:
- दिखाई देने वाला हेमेटुरिया (Visible hematuria): पेशाब में खून दिखाई दे सकता है, जो गुलाबी, लाल या भूरे रंग का हो सकता है।
- माइक्रोस्कोपिक हेमेटुरिया (Microscopic hematuria): खून मौजूद होता है लेकिन लैब टेस्ट के बिना दिखाई नहीं देता।
एक ज़रूरी बात यह है कि ब्लीडिंग कभी-कभी हो सकती है। हो सकता है कि किसी व्यक्ति को एक बार पेशाब में खून दिखे और उसके बाद सामान्य रंग का पेशाब आए। इसका मतलब यह नहीं है कि समस्या खत्म हो गई है।
4. ब्लैडर कैंसर का ज़्यादा खतरा किसे होता है?
- धूम्रपान: तंबाकू का इस्तेमाल ब्लैडर कैंसर का एक बड़ा जोखिम कारक है क्योंकि हानिकारक केमिकल ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश कर सकते हैं और अंततः पेशाब के ज़रिए बाहर निकल सकते हैं।
- बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने के साथ आम तौर पर खतरा बढ़ जाता है। - कुछ खास केमिकल के संपर्क में आना: काम के दौरान लंबे समय तक कुछ खास इंडस्ट्रियल केमिकल (जैसे डाई, रबर और केमिकल बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल) के संपर्क में रहने से खतरा बढ़ सकता है।
- पहले ब्लैडर कैंसर होना: जिन लोगों को पहले ब्लैडर कैंसर हुआ हो, उन्हें रेगुलर फ़ॉलो-अप की ज़रूरत हो सकती है क्योंकि यह बीमारी दोबारा हो सकती है।
