Health Tips- क्या आपके शरीर में बार बार खून की कमी हो रही हैं, कहीं थैलेसीमिया तो नहीं हो गया
दोस्तो आज के दूषित वातावरण में स्वस्थ स्वास्थ्य बनाए रखना बहुत ही मुश्किल हैं, शरीर में बार बार खून को लोग हीमोग्लोबिन की कमी माने लेते हैं, लेकिन लगातार एनीमिया होना कभी-कभी थैलेसीमिया का संकेत हो सकता है। यह खून से जुड़ी एक ऐसी बीमारी है जो माता-पिता से बच्चों में आती है और शरीर की स्वस्थ हीमोग्लोबिन बनाने की क्षमता पर असर डालती है।
आम एनीमिया और थैलेसीमिया के बीच का फ़र्क समझने से समय पर बीमारी का पता लगाने और इलाज कराने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं दोनो के बीच अंतर

थैलेसीमिया क्या है?
थैलेसीमिया खून से जुड़ी एक आनुवंशिक (जेनेटिक) बीमारी है जो माता-पिता से बच्चों में आती है। इस स्थिति में, शरीर पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। हीमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है जो पूरे शरीर में ऑक्सीजन पहुँचाने का काम करता है।
थैलेसीमिया से पीड़ित लोगों को अक्सर लंबे समय तक रहने वाला एनीमिया (क्रोनिक एनीमिया) हो जाता है। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह सेहत और जीवन की गुणवत्ता पर बुरा असर डाल सकता है।
थैलेसीमिया के आम लक्षण
लक्षणों की गंभीरता थैलेसीमिया के प्रकार और उसकी गंभीरता पर निर्भर करती है। कुछ लोगों में कोई लक्षण नहीं दिखते, जबकि कुछ लोगों में बचपन में ही सेहत से जुड़ी साफ़ समस्याएँ दिखाई देने लगती हैं।
आम लक्षणों में शामिल हैं:
बार-बार या लगातार एनीमिया होना
लगातार थकान और कमज़ोरी महसूस होना
त्वचा का पीला या हल्का पीला पड़ना
साँस लेने में तकलीफ़ होना
अक्सर चक्कर आना
बच्चों में विकास और बढ़त में देरी होना
आँखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया)
गंभीर मामलों में हड्डियों का टेढ़ा-मेढ़ा होना या कंकाल में बदलाव आना

किन्हें ज़्यादा खतरा है?
जिनके परिवार में थैलेसीमिया का इतिहास रहा हो।
जिनके माता-पिता थैलेसीमिया के वाहक (कैरियर) हों।
ऐसे जोड़े जो प्रेग्नेंसी की योजना बना रहे हों और जिनके परिवार में इस बीमारी का इतिहास रहा हो।
चूँकि थैलेसीमिया आनुवंशिक होता है, इसलिए जोखिम वाले परिवारों के लिए शुरुआती जाँच (स्क्रीनिंग) कराने की सलाह दी जाती है।
अगर आपको ये लक्षण दिखें तो डॉक्टर से सलाह लें:
बार-बार एनीमिया होना।
लगातार थकान या कमज़ोरी महसूस होना।
त्वचा का पीला पड़ना या बार-बार चक्कर आना।
रोज़मर्रा के कामों के दौरान सांस फूलना।
इलाज के बावजूद हीमोग्लोबिन लेवल का कम बने रहना।
परिवार में थैलेसीमिया का इतिहास होना।
बार-बार होने वाले एनीमिया का सही कारण जानने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट या थैलेसीमिया स्क्रीनिंग की सलाह दे सकते हैं।
