Health Tips- किडनी स्टोन या यूरिन इन्फेक्शन दोनों के लक्षणों को कैसे पहचाने, आइए जानें
दोस्तो आज के दूषित वातावरण में स्वास्थ्य को स्वस्थ बनाए रखना बहुत ही मुश्किल हैं, खराब खान पान और जीवनशैली की वजह से कई प्रकार की स्वास्थ्य परेशानियां हो सकती हैं, ऐसे में किडनी स्टोन (पथरी) और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) स्वास्थ्य से जुड़ी दो आम समस्याएं हैं, जिनके कारण दर्द, पेशाब करते समय जलन और पेट के निचले हिस्से में बेचैनी हो सकती है। चूंकि इनके कुछ लक्षण एक जैसे होते हैं, इसलिए लोगों के लिए इन दोनों स्थितियों के बीच अंतर करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इनके कारण, चेतावनी के संकेत और इलाज अलग-अलग होते हैं। आइए जानते हैं दोनों के बीच के अंतर -

1. किडनी स्टोन के लक्षण क्या हैं?
किडनी स्टोन के लक्षण पथरी के आकार और उसकी जगह के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।
इसके आम लक्षणों में शामिल हैं:
- पीठ या शरीर के किनारे में तेज दर्द: यह दर्द रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ, किडनी वाले हिस्से के आसपास हो सकता है।
- पेट के निचले हिस्से की तरफ दर्द का फैलना: जब पथरी यूरेटर (मूत्र नली) में खिसकती है, तो दर्द पीठ से लेकर कमर (groin) के निचले हिस्से तक जा सकता है। इसे 'लोइन-टू-ग्रोइन' (loin-to-groin) दर्द कहा जाता है।
- पेशाब करते समय जलन: ऐसा तब हो सकता है जब पथरी ब्लैडर (मूत्राशय) या पेशाब के रास्ते के करीब पहुंच जाती है।
- पेशाब में खून आना: पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या भूरा दिखाई दे सकता है।
- जी मिचलाना और उल्टी आना: किडनी स्टोन के तेज दर्द के साथ ये लक्षण भी हो सकते हैं।
- बार-बार पेशाब आने की इच्छा होना: ब्लैडर के पास पथरी होने पर बार-बार पेशाब जाने की इच्छा हो सकती है।
यह दर्द लहरों की तरह आ सकता है और जैसे-जैसे पथरी यूरिनरी ट्रैक्ट से आगे बढ़ती है, दर्द और भी तेज हो सकता है।
2. यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के लक्षण क्या हैं?
UTI तब होता है जब बैक्टीरिया यूरिनरी सिस्टम (मूत्र प्रणाली) के किसी हिस्से, जैसे कि मूत्र मार्ग (urethra) या ब्लैडर (मूत्राशय) में इन्फेक्शन फैला देते हैं। कुछ मामलों में, यह इन्फेक्शन किडनी तक भी फैल सकता है। सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
- पेशाब करते समय जलन: पेशाब करते समय चुभन या दर्द महसूस होना एक आम चेतावनी संकेत है।
- बार-बार पेशाब आना: आपको बार-बार पेशाब जाने की इच्छा हो सकती है, भले ही बहुत कम मात्रा में पेशाब आए।
- पेट के निचले हिस्से में परेशानी: ब्लैडर (मूत्राशय) के संक्रमण के कारण पेट के निचले हिस्से में दर्द या दबाव महसूस हो सकता है।
- पेशाब का धुंधला होना या तेज गंध आना: पेशाब के रंग या गंध में बदलाव आ सकता है।
- बुखार और ठंड लगना: ये इस बात का संकेत हो सकते हैं कि संक्रमण ब्लैडर से आगे फैल गया है।
- किडनी के आसपास दर्द: पीठ या बगल में दर्द के साथ बुखार होना किडनी के संक्रमण का संकेत हो सकता है।
अगर UTI किडनी तक पहुँच जाए, तो इससे 'पायलोनेफ्राइटिस' (pyelonephritis) नामक स्थिति हो सकती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, पीठ या बगल में दर्द, जी मिचलाना और उल्टी आना शामिल हो सकते हैं। अगर किडनी में संक्रमण का संदेह हो, तो तुरंत डॉक्टर से जाँच करानी चाहिए।

3. किडनी स्टोन और UTI: मुख्य अंतर
- दर्द की जगह: किडनी स्टोन के कारण अक्सर पीठ या बगल में तेज दर्द होता है, जो जांघ के ऊपरी हिस्से (groin) की तरफ जा सकता है। UTI में आमतौर पर पेशाब करते समय जलन होती है और पेट के निचले हिस्से में परेशानी महसूस होती है।
- दर्द का प्रकार: किडनी स्टोन का दर्द बहुत तेज हो सकता है और लहरों की तरह (कभी कम, कभी ज्यादा) आ सकता है, जबकि ब्लैडर के संक्रमण में अक्सर लगातार परेशानी या दबाव महसूस होता है।
- बुखार: सामान्य किडनी स्टोन में बुखार होना आम बात नहीं है। अगर बुखार है, तो यह UTI या किसी अन्य संक्रमण का संकेत हो सकता है।
- पेशाब में बदलाव: किडनी स्टोन या UTI दोनों में पेशाब के साथ खून आ सकता है, इसलिए केवल इस लक्षण के आधार पर कारण का पता नहीं लगाया जा सकता।
- पेशाब करने का तरीका: UTI में बार-बार या अचानक पेशाब आने की समस्या आम है, हालाँकि ब्लैडर के पास स्टोन होने पर भी ऐसे ही लक्षण दिख सकते हैं।
केवल लक्षणों के आधार पर हमेशा इन दोनों स्थितियों के बीच अंतर करना संभव नहीं होता। लक्षणों के आधार पर, डॉक्टर यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट या इमेजिंग (जैसे अल्ट्रासाउंड) कराने की सलाह दे सकते हैं।
4. किडनी स्टोन से बचाव कैसे करें
कुछ स्वस्थ आदतें अपनाकर किडनी स्टोन बनने के खतरे को कम किया जा सकता है।
- पर्याप्त पानी पिएं: पूरे दिन शरीर में पानी की उचित मात्रा बनाए रखें। जिन लोगों को किडनी स्टोन होने का खतरा रहता है, उन्हें दिन भर में इतना तरल पदार्थ लेना चाहिए जिससे रोजाना लगभग 2–2.5 लीटर पेशाब बने (जब तक कि डॉक्टर ने तरल पदार्थों के सेवन को सीमित करने की सलाह न दी हो)।
- नमक का सेवन कम करें: सोडियम की अधिक मात्रा लेने से यूरिन में कैल्शियम का स्तर बढ़ सकता है, जिससे पथरी (stones) होने का खतरा बढ़ जाता है।
- संतुलित आहार लें: तरह-तरह के फल, सब्जियां और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ खाएं।
- स्वस्थ वजन बनाए रखें: नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को नियंत्रित रखने से किडनी की सेहत अच्छी रहती है।
- डॉक्टर से अपनी दवाओं के बारे में बात करें: कुछ दवाएं पथरी होने का खतरा बढ़ा सकती हैं। डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी निर्धारित दवा लेना बंद न करें।
- पारिवारिक इतिहास पर ध्यान दें: अगर आपके परिवार में किडनी की पथरी की समस्या रही है या आपको बार-बार पथरी होती है, तो बचाव के लिए जरूरी जांच के बारे में किसी डॉक्टर से सलाह लें।
