Health Tips- क्या ज्यादा फाइबर सेवन से हो सकती हैं ब्लोटिंग और गैस की समस्या, आइए जानें

 
Health Tips- क्या ज्यादा फाइबर सेवन से हो सकती हैं ब्लोटिंग और गैस की समस्या, आइए जानें दोस्तो एक स्वस्थ स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए हमें कई प्रकार के पोषक तत्वों की जरूरत होती हैं, जिनमें फाइबर भी हैं, जो पाचन तंत्र के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। कब्ज से राहत पाने और वजन नियंत्रित करने की कोशिश करने वाले लोगों को अक्सर सलाद, फल, ओट्स, दलिया और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खाने की सलाह दी जाती है। लेकिन कई लोगों को अचानक फाइबर बढ़ाने के बाद गैस, पेट फूलना, भारीपन, खट्टी डकार और पेट में असहजता जैसी समस्याएं होने लगती हैं। फाइबर खाने से गैस क्यों बनती है? फाइबर का एक बड़ा हिस्सा शरीर में पूरी तरह पच नहीं पाता और बड़ी आंत तक पहुंचता है। वहां मौजूद आंतों के बैक्टीरिया इसे तोड़ते हैं। इस प्रक्रिया को फर्मेंटेशन कहा जाता है, जिसके दौरान कुछ मात्रा में गैस बनना सामान्य है। अगर कोई व्यक्ति अचानक बहुत ज्यादा फाइबर खाना शुरू कर देता है, तो आंतों में फर्मेंटेशन बढ़ सकता है। इसके कारण: गैस और पेट फूलना पेट में भारीपन पेट में गुड़गुड़ाहट असहजता कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स या खट्टी डकार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। संवेदनशील पाचन तंत्र या IBS (Irritable Bowel Syndrome) वाले लोगों में ये लक्षण अधिक महसूस हो सकते हैं। रोज कितना फाइबर लेना चाहिए? आमतौर पर वयस्कों को प्रतिदिन लगभग 22 से 34 ग्राम फाइबर की जरूरत हो सकती है। हालांकि, सही मात्रा उम्र, लिंग और पूरी डाइट पर निर्भर करती है। इसलिए यदि आपकी डाइट में पहले फाइबर कम था, तो एक ही दिन में बहुत अधिक फाइबर लेने के बजाय इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर होता है। फाइबर बढ़ाते समय इन गलतियों से बचें 1. अचानक बहुत ज्यादा फाइबर न लें अगर आप पहले कम फाइबर खाते थे, तो अचानक बड़ी मात्रा में सलाद, चिया सीड्स, ओट्स और फल खाना शुरू न करें। शरीर को नई मात्रा के अनुसार ढलने का समय दें। 2. पानी की मात्रा कम न करें फाइबर के साथ पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। फाइबर बढ़ाकर पानी कम पीने से कुछ लोगों में कब्ज और पेट की परेशानी बढ़ सकती है। 3. हर फाइबर एक जैसा नहीं होता फाइबर मुख्य रूप से अलग-अलग प्रकार का होता है। ओट्स, दाल और कुछ फलों में घुलनशील फाइबर पाया जाता है, जबकि कच्ची सब्जियों और साबुत अनाज में अघुलनशील फाइबर की मात्रा अधिक हो सकती है।

दोस्तो एक स्वस्थ स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए हमें कई प्रकार के पोषक तत्वों की जरूरत होती हैं, जिनमें फाइबर भी हैं, जो पाचन तंत्र के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। कब्ज से राहत पाने और वजन नियंत्रित करने की कोशिश करने वाले लोगों को अक्सर सलाद, फल, ओट्स, दलिया और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खाने की सलाह दी जाती है। लेकिन कई लोगों को अचानक फाइबर बढ़ाने के बाद गैस, पेट फूलना, भारीपन, खट्टी डकार और पेट में असहजता जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

Health Tips: Can excessive fiber intake cause bloating and gas? Let's find out.

फाइबर खाने से गैस क्यों बनती है?

फाइबर का एक बड़ा हिस्सा शरीर में पूरी तरह पच नहीं पाता और बड़ी आंत तक पहुंचता है। वहां मौजूद आंतों के बैक्टीरिया इसे तोड़ते हैं। इस प्रक्रिया को फर्मेंटेशन कहा जाता है, जिसके दौरान कुछ मात्रा में गैस बनना सामान्य है।

अगर कोई व्यक्ति अचानक बहुत ज्यादा फाइबर खाना शुरू कर देता है, तो आंतों में फर्मेंटेशन बढ़ सकता है। इसके कारण:

गैस और पेट फूलना

पेट में भारीपन

पेट में गुड़गुड़ाहट

असहजता

कुछ लोगों में एसिड रिफ्लक्स या खट्टी डकार

जैसी समस्याएं हो सकती हैं। संवेदनशील पाचन तंत्र या IBS (Irritable Bowel Syndrome) वाले लोगों में ये लक्षण अधिक महसूस हो सकते हैं।

रोज कितना फाइबर लेना चाहिए?

आमतौर पर वयस्कों को प्रतिदिन लगभग 22 से 34 ग्राम फाइबर की जरूरत हो सकती है। हालांकि, सही मात्रा उम्र, लिंग और पूरी डाइट पर निर्भर करती है।

इसलिए यदि आपकी डाइट में पहले फाइबर कम था, तो एक ही दिन में बहुत अधिक फाइबर लेने के बजाय इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर होता है।

Health Tips: Can excessive fiber intake cause bloating and gas? Let's find out.

फाइबर बढ़ाते समय इन गलतियों से बचें

1. अचानक बहुत ज्यादा फाइबर न लें

अगर आप पहले कम फाइबर खाते थे, तो अचानक बड़ी मात्रा में सलाद, चिया सीड्स, ओट्स और फल खाना शुरू न करें। शरीर को नई मात्रा के अनुसार ढलने का समय दें।

2. पानी की मात्रा कम न करें

फाइबर के साथ पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है। फाइबर बढ़ाकर पानी कम पीने से कुछ लोगों में कब्ज और पेट की परेशानी बढ़ सकती है।

3. हर फाइबर एक जैसा नहीं होता

फाइबर मुख्य रूप से अलग-अलग प्रकार का होता है। ओट्स, दाल और कुछ फलों में घुलनशील फाइबर पाया जाता है, जबकि कच्ची सब्जियों और साबुत अनाज में अघुलनशील फाइबर की मात्रा अधिक हो सकती है।