Health Tips- मौसम में हो रहा हैं बदलाव, अस्थमा मरीज रखें डाइट का ध्यान
दोस्तो देश में एक बार फिर मौसम में बदलाव चल रहा हैं, बदलते मौसम में सांस से जुड़ी समस्याएं होना एक आम बात हैं, अस्थमा से पीड़ित लोगों को धूल, धुआं, परागकण और वायु प्रदूषण जैसे ट्रिगर्स से सावधान रहने की जरूरत होती है। दवाओं और डॉक्टर की सलाह के साथ संतुलित और पौष्टिक आहार सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।
हालांकि, केवल डाइट के जरिए अस्थमा को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं और उपचार को नियमित रूप से जारी रखना जरूरी है।

1. फल और सब्जियों को डाइट का हिस्सा बनाएं
फल और सब्जियां विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व प्रदान करते हैं। अपनी पसंद के अनुसार सेब, संतरा, केला और पपीता जैसे फल शामिल किए जा सकते हैं।
सब्जियों में गाजर, पालक, ब्रोकली, टमाटर और अन्य हरी सब्जियां अच्छे विकल्प हो सकते हैं। कोशिश करें कि रोजाना अलग-अलग रंगों और प्रकार के फल-सब्जियों को भोजन में शामिल किया जाए।
2. दाल, बीन्स और नट्स से लें पोषण
दाल, चना, राजमा और अन्य फलियां प्रोटीन और फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। इनमें कई जरूरी विटामिन और मिनरल भी पाए जाते हैं।
इसके अलावा, सीमित मात्रा में बादाम, अखरोट और अलग-अलग तरह के बीज भी संतुलित आहार का हिस्सा बनाए जा सकते हैं।
अगर आप नॉन-वेज खाते हैं तो मछली भी डाइट में शामिल की जा सकती है। सैल्मन, सार्डिन और मैकेरल जैसी ऑयली फिश में ओमेगा-3 फैटी एसिड पाया जाता है। हालांकि, अस्थमा के इलाज के लिए फिश ऑयल सप्लीमेंट लेने की पर्याप्त पुष्टि नहीं है।

3. फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड कम करें
अस्थमा मैनेजमेंट में केवल यह देखना जरूरी नहीं है कि क्या खाना है, बल्कि किन चीजों का सेवन सीमित करना है, इस पर भी ध्यान देना चाहिए।
बहुत अधिक फास्ट फूड, तला हुआ भोजन, प्रोसेस्ड मीट और ज्यादा चीनी या सैचुरेटेड फैट वाले खाद्य पदार्थों का नियमित सेवन कम करें। इसके बजाय पौष्टिक और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।
4. अस्थमा के ट्रिगर्स से बचना भी जरूरी
मौसम बदलने के दौरान धूल, धुआं, परागकण और प्रदूषित हवा कुछ लोगों में अस्थमा के लक्षण बढ़ा सकते हैं। इसलिए अपने व्यक्तिगत ट्रिगर्स को पहचानना और उनसे बचने की कोशिश करना महत्वपूर्ण है।
5. डॉक्टर की दवाएं और इनहेलर नियमित लें
अगर डॉक्टर ने इनहेलर या कोई अन्य दवा निर्धारित की है, तो उसे डॉक्टर के निर्देश के अनुसार ही इस्तेमाल करें। जरूरत पड़ने पर इनहेलर अपने साथ रखना भी उपयोगी हो सकता है।
अगर सांस लेने में बहुत ज्यादा परेशानी हो, लगातार खांसी आए, सीने में जकड़न महसूस हो या अस्थमा का गंभीर अटैक आए, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
