Health Tips- एंग्जायटी और स्ट्रेस को एक समझ लेते हैं, जानिए दोनों में क्या फर्क हैं
दोस्तो आज की तेज भागदौड़ और व्यस्त जीवनशैली में तनाव होना एक आम बात हो गई हैं, लोगो पर काम का भारी दबाव, पैसों की तंगी, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ और जीवनशैली में बदलाव - ये सभी मानसिक सेहत पर असर डाल सकते हैं। कई लोग यह नहीं समझ पाते कि कब यह एंग्जायटी (बेचैनी या घबराहट) में बदल जाता है। दोनों स्थितियों के लक्षण एक जैसे होते हैं, इसलिए अक्सर लोग इनमें फ़र्क नहीं कर पाते। आइए जानते हैं दोनों में क्या अंतर हैं-

एंग्जायटी सिर्फ़ थोड़ी देर की चिंता से कहीं ज़्यादा है। अगर इसका इलाज न किया जाए, तो यह आपके काम, रिश्तों और जीवन की गुणवत्ता पर बुरा असर डाल सकती है। यहाँ वह सब कुछ बताया गया है जो आपको जानना चाहिए।
तनाव बनाम एंग्जायटी: क्या फ़र्क है?
तनाव और एंग्जायटी एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन ये अलग-अलग स्थितियाँ हैं।
तनाव आमतौर पर किसी खास स्थिति के कारण होता है, जैसे काम की डेडलाइन, परीक्षा, पैसों की दिक्कत या परिवार से जुड़ी समस्याएँ।
जब तनाव वाली स्थिति सुलझ जाती है, तो तनाव आमतौर पर अपने आप कम हो जाता है।
दूसरी ओर, एंग्जायटी अक्सर तब भी बनी रहती है जब चिंता करने की कोई साफ़ वजह न हो।
एंग्जायटी से जूझ रहे लोगों को लगातार ऐसा लग सकता है कि कुछ बुरा होने वाला है, भले ही सब कुछ सामान्य हो।
यही लगातार बना रहने वाला डर और अनिश्चितता एंग्जायटी को रोज़मर्रा के तनाव से अलग बनाती है।
क्या डायबिटीज़ से एंग्जायटी बढ़ सकती है?
कई अध्ययनों से पता चलता है कि डायबिटीज़ से पीड़ित लोगों में एंग्जायटी होने का खतरा ज़्यादा हो सकता है।
ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव मूड और भावनात्मक सेहत पर असर डाल सकता है।
लंबे समय तक चलने वाली बीमारी को संभालने से समय के साथ मानसिक तनाव बढ़ सकता है।
डायबिटीज़ के मरीज़ों को अपनी शारीरिक और मानसिक सेहत दोनों पर ध्यान देना चाहिए और लक्षण दिखने पर विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
एंग्जायटी के आम लक्षण

बिना किसी साफ़ वजह के लगातार चिंता या डर।
दिल की धड़कन का तेज़ी से चलना या घबराहट महसूस होना।
तेज़ या उथली साँसें लेना।
बहुत ज़्यादा पसीना आना।
हाथों का काँपना।
मांसपेशियों में अकड़न या शरीर में तनाव महसूस होना।
ध्यान लगाने में मुश्किल होना।
बेचैनी महसूस होना या आराम न कर पाना।
एंग्जायटी आपके पाचन तंत्र पर कैसे असर डालती है
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि दिमाग और पाचन तंत्र आपस में गहराई से जुड़े होते हैं।
इस जुड़ाव के कारण, एंग्जायटी से ये समस्याएँ हो सकती हैं:
पेट खराब होना।
जी मिचलाना।
पेट में दर्द या बेचैनी।
मल त्यागने की आदतों में बदलाव। पाचन से जुड़ी ऐसी समस्याएं जो पेट की किसी बीमारी के बिना भी हो सकती हैं।
आपको कब चिंता करनी चाहिए?
लक्षण कई हफ़्तों या महीनों तक बने रहें।
तनावपूर्ण घटना के खत्म होने के बाद भी चिंता बनी रहे।
रोज़ाना के काम, पढ़ाई या रिश्तों पर असर पड़े।
रोज़मर्रा के काम करने में मुश्किल हो।
शारीरिक लक्षण बार-बार दिखें या गंभीर हो जाएं।
