5वीं में छोड़ी पढ़ाई, जेब में थे सिर्फ 37 रुपये… आज कर्मचारियों को Mercedes-BMW गिफ्ट करते हैं सावजी ढोलकिया

 
5वीं में छोड़ी पढ़ाई, जेब में थे सिर्फ 37 रुपये… आज कर्मचारियों को Mercedes-BMW गिफ्ट करते हैं सावजी ढोलकिया

गुजरात के एक छोटे से गांव से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े हीरा कारोबारियों में शामिल होने वाले सावजी ढोलकिया आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। अपने कर्मचारियों को Mercedes, BMW और फ्लैट गिफ्ट करने वाले इस उद्योगपति की कहानी संघर्ष, मेहनत और भरोसे की मिसाल है। बहुत कम लोग जानते हैं कि ढोलकिया ने अपने बिजनेस की शुरुआत महज 37 रुपये से की थी और गरीबी के कारण उन्हें 5वीं कक्षा में ही स्कूल छोड़ना पड़ा था

आज उनकी कंपनी Hari Krishna Exporters और ब्रांड KISNA Diamonds का कारोबार 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का है। लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था।


गरीबी में बीता बचपन, 13 साल में छोड़नी पड़ी पढ़ाई

सावजी ढोलकिया का जन्म गुजरात के अमरेली जिले के दुधाला गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। घर चलाने के लिए आमदनी के साधन सीमित थे। ऐसे में मजबूरी में उन्हें सिर्फ 13 साल की उम्र में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। वे 5वीं कक्षा भी पूरी नहीं कर पाए।

कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने तय किया कि वे काम करके परिवार का सहारा बनेंगे।


12.50 रुपये लेकर निकले सूरत, नहीं था सिर छुपाने की जगह

साल 1977 सावजी ढोलकिया के जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। जेब में केवल 12.50 रुपये लेकर वे अपने गांव से सूरत पहुंचे, जो भारत का डायमंड हब माना जाता है। न रहने की जगह थी, न कोई जान-पहचान, न ही कोई सहारा।

शुरुआत में कई रातें उन्होंने बिना पक्की छत के बिताईं, लेकिन हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने सूरत की हीरा पॉलिशिंग फैक्ट्रियों में काम तलाशना शुरू किया।


डायमंड पॉलिशर से कारोबारी बनने तक का सफर

सूरत में उन्हें डायमंड पॉलिशर की नौकरी मिली। उनकी पहली सैलरी थी 179 रुपये महीना, जिसमें से उन्होंने 39 रुपये बचा लिए। यही छोटी-सी बचत आगे चलकर उनके बड़े सपनों की नींव बनी।

अगले 10 साल तक उन्होंने हीरे काटने और पॉलिश करने की बारीकियां सीखीं। उन्होंने न सिर्फ तकनीक सीखी, बल्कि यह भी समझा कि इस कारोबार में ईमानदारी और भरोसा सबसे बड़ी पूंजी होती है।


Hari Krishna Exporters की स्थापना

साल 1984 में सावजी ढोलकिया ने अपने भाइयों हिमत और तुलसी ढोलकिया के साथ मिलकर Hari Krishna Exporters की शुरुआत की। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत और भरोसे के दम पर कंपनी तेजी से बढ़ने लगी।

ढोलकिया हमेशा कहते हैं कि कंपनी की सफलता अकेले उनकी नहीं, बल्कि हर कर्मचारी की है। इसी सोच के चलते वे अपने कर्मचारियों को परिवार की तरह मानते हैं।


कर्मचारियों को कार, फ्लैट और ज्वेलरी गिफ्ट कर बने मिसाल

सावजी ढोलकिया तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने दीवाली पर कर्मचारियों को कार, फ्लैट और गहने गिफ्ट करने शुरू किए। किसी को Mercedes मिली, किसी को BMW, तो किसी को नया घर।

साल 2025 में उन्होंने अपने तीन सीनियर कर्मचारियों को Mercedes-Benz GLS SUV (करीब 3 करोड़ रुपये प्रति कार) गिफ्ट की। ये वही कर्मचारी थे, जो 25 साल पहले उनके साथ छोटे पदों पर जुड़े थे।


समाज सेवा में भी आगे

सिर्फ बिजनेस ही नहीं, सावजी ढोलकिया समाज सेवा में भी आगे रहते हैं। उन्होंने गुजरात के सूखाग्रस्त इलाकों में तालाब, चेक डैम और जल संरक्षण परियोजनाएं शुरू कराईं, जिससे हजारों किसानों को फायदा हुआ। यह काम वे Dholakia Foundation के जरिए करते हैं।

उनके सामाजिक योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2022 में पद्म श्री सम्मान से नवाजा।

सावजी ढोलकिया की कहानी साबित करती है कि हालात चाहे कितने भी मुश्किल क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो सफलता जरूर मिलती है। 5वीं में पढ़ाई छोड़ने वाला यह लड़का आज हजारों लोगों को रोजगार देता है और कर्मचारियों को करोड़ों की गाड़ियां गिफ्ट करता है।

यह सिर्फ एक कारोबारी की नहीं, बल्कि एक इंसान की जीत की कहानी है।

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