Cooking Oil Limit: दिल को रखना है स्वस्थ तो महीने में कितना तेल खाए परिवार? जानें प्रति व्यक्ति सही मात्रा

 
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आजकल कम उम्र में भी हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, डायबिटीज और दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें असंतुलित खानपान, कम शारीरिक गतिविधि, तंबाकू, अधिक वजन और डाइट में अनहेल्दी फैट की अधिकता भी शामिल है। ऐसे में एक सवाल अक्सर उठता है कि आखिर घर में एक महीने में कितना खाना पकाने वाला तेल इस्तेमाल करना चाहिए?

इसका जवाब पूरे परिवार के लिए एक निश्चित लीटर में नहीं दिया जा सकता, क्योंकि जरूरत परिवार के सदस्यों की संख्या, उम्र, शारीरिक गतिविधि और बाकी डाइट पर निर्भर करती है। हालांकि ICMR-NIN से जुड़ी सरकारी सलाह के मुताबिक 2000 कैलोरी की डाइट में visible fat यानी खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाले तेल/फैट को करीब 30 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तक सीमित रखना उपयोगी लक्ष्य हो सकता है।

रोजाना कितना तेल लेना चाहिए?

ICMR-NIN की Dietary Guidelines for Indians के अनुसार visible fat की जरूरत व्यक्ति की कैलोरी आवश्यकता और शारीरिक गतिविधि के आधार पर बदल सकती है। 2000 कैलोरी वाली डाइट में लगभग 27 से 30 ग्राम visible fat प्रतिदिन पर्याप्त माना गया है।

यहां visible fat का मतलब केवल कड़ाही में डाला गया रिफाइंड या सरसों का तेल नहीं है। खाना पकाने में इस्तेमाल होने वाला तेल, घी, मक्खन और खाने में ऊपर से डाला गया फैट भी इसमें शामिल होता है। इसके अलावा नट्स, बीज, दालों, अनाज और दूसरे खाद्य पदार्थों से मिलने वाला 'invisible fat' अलग होता है।

महीने के हिसाब से कितना हुआ?

अगर किसी वयस्क के लिए औसतन 30 ग्राम प्रतिदिन का आंकड़ा लिया जाए तो महीने का हिसाब बेहद आसान है।

30 ग्राम × 30 दिन = 900 ग्राम

यानी 2000 कैलोरी की डाइट वाले एक व्यक्ति के लिए लगभग 900 ग्राम visible fat प्रति महीने की ऊपरी मात्रा का व्यावहारिक हिसाब बनता है।

चार वयस्कों के परिवार में यही गणना लगभग 3.6 किलोग्राम प्रति महीने बैठेगी। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चार सदस्यों वाले हर परिवार को इतना तेल जरूर खाना चाहिए। यदि घर में घी, मक्खन या दूसरे visible fats भी इस्तेमाल होते हैं तो उन्हें भी इसी कुल मात्रा में गिनना चाहिए।

बच्चों, बुजुर्गों और अलग-अलग शारीरिक गतिविधि वाले लोगों की पोषण जरूरतें अलग हो सकती हैं।

क्या कम तेल खाने से हार्ट अटैक नहीं होगा?

यह समझना सबसे जरूरी है कि केवल तेल की मात्रा कम कर देने से हार्ट अटैक से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलती।

दिल की बीमारी का जोखिम कई चीजों से प्रभावित होता है। ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि, उम्र, पारिवारिक इतिहास और पूरी डाइट इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

इसलिए खाना पकाने के तेल को सीमित करना दिल के अनुकूल जीवनशैली का एक हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे हार्ट अटैक रोकने का अकेला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।

सिर्फ मात्रा नहीं, तेल की क्वालिटी भी है जरूरी

दिल की सेहत के मामले में यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि फैट किस प्रकार का है।

WHO के मुताबिक वयस्कों में कुल फैट को सामान्य तौर पर दैनिक ऊर्जा के 30 प्रतिशत या उससे कम रखने से अस्वस्थ वजन बढ़ने से बचने में मदद मिल सकती है। साथ ही फैट का बड़ा हिस्सा unsaturated fats से आना बेहतर माना जाता है।

WHO की सलाह है कि saturated fat से मिलने वाली ऊर्जा कुल दैनिक ऊर्जा के 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होनी चाहिए, जबकि trans fat को 1 प्रतिशत से कम रखा जाना चाहिए।

कौन-सा तेल इस्तेमाल करना बेहतर?

एक ही तेल को 'सबसे हेल्दी' बताना सही नहीं होगा। अलग-अलग तेलों में फैटी एसिड की संरचना अलग होती है।

सरकारी स्वास्थ्य सलाह में भी कहा गया है कि कोई एक तेल हर मामले में परफेक्ट नहीं है। सरसों, मूंगफली, तिल, सूरजमुखी और दूसरे स्थानीय रूप से उपलब्ध तेलों को संतुलित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है। अलग-अलग तेलों को समय-समय पर बदलकर इस्तेमाल करना भी एक विकल्प है।

American Heart Association भी saturated और trans fats की जगह monounsaturated और polyunsaturated fats वाले विकल्प चुनने की सलाह देता है।

एक ही तेल को बार-बार गर्म करना ठीक नहीं

घर में अक्सर पूरी या पकौड़े तलने के बाद बचा हुआ तेल रख लिया जाता है और उसे अगली बार दोबारा तलने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा बार-बार करना अच्छी आदत नहीं मानी जाती।

ICMR-NIN से जुड़ी सरकारी सलाह के मुताबिक तेल को लंबे समय तक बहुत अधिक तापमान पर गर्म करने और बार-बार गर्म करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे हानिकारक यौगिक बन सकते हैं।

इसलिए डीप फ्राइंग कम करना और उबालने, स्टीम करने, ग्रिल करने या कम तेल में खाना तैयार करने जैसे तरीकों को अपनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।

बाहर के खाने का तेल भी हिसाब में जोड़ें

अगर आपने घर में महीने भर में केवल 3 लीटर तेल इस्तेमाल किया है तो इसका मतलब यह नहीं कि आपकी कुल तेल और फैट की खपत भी उतनी ही है।

समोसे, कचौरी, नमकीन, चिप्स, बिस्कुट, फास्ट फूड, मिठाइयां और दूसरी तली या पैकेज्ड चीजों में मौजूद फैट भी आपकी कुल डाइट का हिस्सा है। WHO के अनुसार औद्योगिक trans fat तले हुए और कई बेक्ड या प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में मिल सकता है और इसकी अधिक मात्रा हृदय रोग के जोखिम से जुड़ी है।

तेल की बोतल से ज्यादा जरूरी है पूरी डाइट

अगर परिवार दिल की सेहत का ध्यान रखना चाहता है तो केवल तेल की बोतल छोटी करना पर्याप्त नहीं है। भोजन में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, फलियां और नट्स जैसी चीजों को पर्याप्त जगह देना भी जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को स्वस्थ सीमा में रखना भी महत्वपूर्ण है।

2000 कैलोरी वाली डाइट के संदर्भ में करीब 27-30 ग्राम visible fat प्रति व्यक्ति प्रतिदिन एक उपयोगी संदर्भ हो सकता है। इस हिसाब से लगभग 900 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रति महीने बैठता है। लेकिन व्यक्तिगत जरूरत अलग हो सकती है और इसमें खाना पकाने का तेल ही नहीं बल्कि घी, मक्खन जैसे दूसरे visible fats भी शामिल हैं। दिल की बीमारी, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को अपनी व्यक्तिगत मात्रा डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से तय करवानी चाहिए।

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