Child Care Tips- बच्चों में बढ़ रहा हैं थायराइड का असर, जानिए इसके संकेत
दोस्तो थायराइड एक ऐसी बीमारी हैं जिसको अक्सर बुजुर्गों से जोड़ा जाता हैं, लेकिन क्या आपको पता हैं कि बच्चों में भी थायराइड हो सकता हैं, थायरॉइड हार्मोन बच्चे के विकास, दिमाग के विकास और कुल मिलाकर सेहत में अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नज़रअंदाज़ करने से लंबे समय तक रहने वाली जटिलताएं हो सकती हैं। अगर किसी बच्चे का वज़न अचानक बदलता है, विकास धीमा होता है, लगातार थकान रहती है या पढ़ाई में प्रदर्शन खराब होता है, आइए जानते हैं इसके लक्षणों के बारे में

थायरॉइड विकारों के प्रकार
थायरॉइड विकार मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
हाइपोथायरायडिज्म: थायरॉइड ग्रंथि बहुत कम थायरॉइड हार्मोन बनाती है, जिससे शरीर के काम करने की गति धीमी हो जाती है।
हाइपरथायरायडिज्म: थायरॉइड ग्रंथि बहुत ज़्यादा थायरॉइड हार्मोन बनाती है, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज़ हो जाता है।
बच्चों में हाइपोथायरायडिज्म ज़्यादा आम तौर पर पाया जाता है।
क्या बच्चों को थायरॉइड की समस्या हो सकती है?
हाँ। इस आम धारणा के विपरीत कि थायरॉइड की बीमारी सिर्फ़ बड़ों को होती है, बच्चे भी थायरॉइड विकारों से पीड़ित हो सकते हैं। अगर इलाज न किया जाए, तो हाइपोथायरायडिज्म बच्चे की लंबाई, सीखने की क्षमता और कुल विकास पर असर डाल सकता है

बच्चों में हाइपोथायरायडिज्म के लक्षण
उम्र के दूसरे बच्चों की तुलना में शारीरिक विकास का धीमा या देर से होना।
प्यूबर्टी (यौवन) की शुरुआत में देरी।
पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान या ऊर्जा की कमी।
स्कूल में ध्यान लगाने में कठिनाई।
कमज़ोर याददाश्त और पढ़ाई में प्रदर्शन का अचानक गिरना।
बिना किसी स्पष्ट कारण के वज़न बढ़ना।
अक्सर कब्ज़ होना।
दूसरों की तुलना में ज़्यादा ठंड महसूस होना।
रूखी, खुरदरी त्वचा।
गर्दन के सामने सूजन या गांठ।
थायरॉइड बीमारी का पता कैसे लगाया जाता है?
थायरॉइड की समस्याओं का पता आमतौर पर एक साधारण ब्लड टेस्ट से लगाया जा सकता है, जिसमें थायरॉइड हार्मोन के लेवल की जांच होती है। जल्दी पता चलने पर डॉक्टर इलाज शुरू कर सकते हैं, ताकि बीमारी बच्चे की बढ़त और विकास पर असर न डाले।
