Calcium Rich Foods: हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए दूध ही नहीं, डाइट में शामिल करें ये 6 देसी फूड्स
उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों की मजबूती बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाता है। शरीर में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा न मिलने पर हड्डियों की सेहत प्रभावित हो सकती है। कैल्शियम का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में सबसे पहले दूध और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स आते हैं। हालांकि भारतीय रसोई में कई ऐसी चीजें भी मौजूद हैं, जो कैल्शियम समेत हड्डियों के लिए जरूरी दूसरे पोषक तत्व उपलब्ध करा सकती हैं।
अगर किसी को दूध पसंद नहीं है या वह अपनी डाइट में कैल्शियम के स्रोत बढ़ाना चाहता है, तो तिल, रागी, राजगीरा, सोयाबीन, चना और कुछ हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे विकल्पों को भोजन में जगह दी जा सकती है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग खाद्य पदार्थों में कैल्शियम की मात्रा और शरीर द्वारा उसके अवशोषण की क्षमता अलग होती है।
हड्डियों के लिए क्यों जरूरी है कैल्शियम?
कैल्शियम शरीर के लिए एक जरूरी मिनरल है। हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखने के अलावा यह मांसपेशियों के सामान्य कामकाज और शरीर की कई दूसरी प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है।
शरीर को भोजन से पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलने पर लंबे समय में हड्डियों की सेहत पर असर पड़ सकता है। इसलिए संतुलित भोजन में कैल्शियम वाले खाद्य पदार्थों को शामिल करना महत्वपूर्ण माना जाता है।
इसके साथ ही सिर्फ कैल्शियम पर्याप्त नहीं है। हड्डियों की सेहत के लिए विटामिन D, प्रोटीन, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार भी महत्वपूर्ण हैं।
1. तिल को बनाएं डाइट का हिस्सा
भारतीय रसोई में सदियों से इस्तेमाल होने वाला तिल कैल्शियम का अच्छा पौध-आधारित स्रोत माना जाता है। इसे रोजमर्रा की डाइट में शामिल करना भी आसान है।
तिल को सलाद या सब्जी के ऊपर डालकर खाया जा सकता है। इसके अलावा तिल की चटनी, तिल-गुड़ के लड्डू या दूसरे व्यंजनों के जरिए भी इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है।
हालांकि तिल में कैलोरी भी अच्छी मात्रा में होती है, इसलिए इसकी मात्रा संतुलित रखना बेहतर है।
2. रागी भी है शानदार विकल्प
रागी यानी फिंगर मिलेट भारतीय खानपान का एक पौष्टिक अनाज है। यह कैल्शियम की अच्छी मात्रा के लिए जाना जाता है और खासतौर पर दक्षिण भारत में इसका काफी इस्तेमाल होता है।
रागी से रोटी, डोसा, चीला, दलिया या रागी माल्ट बनाया जा सकता है। गेहूं और चावल के साथ दूसरे अनाजों को डाइट में शामिल करना चाहते हैं तो रागी एक उपयोगी विकल्प हो सकता है।
कैल्शियम के अलावा रागी से शरीर को फाइबर और दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं।
3. राजगीरा को न समझें सिर्फ व्रत का खाना
राजगीरा या अमरंथ को अक्सर लोग केवल व्रत के दौरान इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसे सामान्य दिनों में भी भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
राजगीरे के आटे से रोटी या पराठा तैयार किया जा सकता है। इसके लड्डू और चिक्की भी काफी लोकप्रिय हैं। इसमें कैल्शियम के साथ प्रोटीन और कई दूसरे पोषक तत्व मिलते हैं।
हालांकि लड्डू या चिक्की के रूप में इसका सेवन करते समय उसमें मौजूद अतिरिक्त चीनी या गुड़ की मात्रा का भी ध्यान रखना चाहिए।
4. सोयाबीन और सोया फूड्स
प्लांट-बेस्ड डाइट लेने वालों के लिए सोयाबीन और सोया से बने खाद्य पदार्थ उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। सोया प्रोटीन का अच्छा स्रोत होने के साथ हड्डियों के लिए जरूरी पोषण देने में भी मदद कर सकता है।
सोयाबीन की सब्जी, सोया चंक्स और कैल्शियम से फोर्टिफाइड सोया मिल्क जैसे विकल्प डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।
टोफू भी अच्छा विकल्प हो सकता है, लेकिन उसमें कैल्शियम की मात्रा इस बात पर निर्भर कर सकती है कि उसे किस तरीके से तैयार किया गया है। इसलिए पैकेट पर दी गई न्यूट्रिशन संबंधी जानकारी जरूर देखनी चाहिए।
5. चना भी दे सकता है पोषण
भारतीय घरों में आसानी से मिलने वाला चना प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी मिनरल्स का अच्छा स्रोत है। यह अकेले कैल्शियम की जरूरत पूरी करने वाला खाद्य पदार्थ नहीं है, लेकिन संतुलित डाइट में इसे शामिल करने से समग्र पोषण बेहतर किया जा सकता है।
काले चने को भिगोकर, उबालकर या सब्जी के रूप में खाया जा सकता है। भुना चना भी स्नैक के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
चना और दूसरी दालों को अलग-अलग अनाज तथा सब्जियों के साथ मिलाकर खाना संतुलित भोजन तैयार करने का आसान तरीका हो सकता है।
6. हरी पत्तेदार सब्जियों को न करें नजरअंदाज
हरी पत्तेदार सब्जियां कई विटामिन और मिनरल्स उपलब्ध कराती हैं। कैल्शियम के लिए चौलाई जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों को भोजन में शामिल किया जा सकता है।
इन्हें सब्जी, साग, दाल या दूसरी रेसिपी के जरिए डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है। अलग-अलग प्रकार की हरी सब्जियां खाते रहने से शरीर को कई तरह के पोषक तत्व मिलते हैं।
ध्यान रखें कि हर हरी पत्तेदार सब्जी से मिलने वाले कैल्शियम का अवशोषण समान नहीं होता। इसलिए किसी एक चीज पर निर्भर रहने के बजाय डाइट में विविधता रखना बेहतर है।
क्या ये चीजें दूध से ज्यादा कैल्शियम देती हैं?
यह कहना कि हर स्थिति में ये सभी छह चीजें दूध से ज्यादा कैल्शियम देती हैं, पूरी तरह सही नहीं होगा। कैल्शियम की मात्रा खाद्य पदार्थ की किस्म, मात्रा और उसे तैयार करने के तरीके पर निर्भर करती है।
उदाहरण के तौर पर कुछ बीज और अनाज प्रति 100 ग्राम के हिसाब से कैल्शियम में काफी समृद्ध हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर उनकी रोजाना खाई जाने वाली मात्रा दूध की तुलना में काफी कम होती है।
इसलिए केवल प्रति 100 ग्राम कैल्शियम देखकर किसी खाद्य पदार्थ को दूध का सीधा विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। सर्विंग साइज और कैल्शियम के अवशोषण को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
मजबूत हड्डियों के लिए केवल कैल्शियम पर निर्भर न रहें
हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ विटामिन D और पर्याप्त प्रोटीन भी जरूरी हैं। नियमित वॉक, सीढ़ियां चढ़ना और क्षमता के अनुसार वजन उठाने वाली एक्सरसाइज भी हड्डियों की सेहत के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
इसलिए दूध पसंद नहीं होने पर घबराने की जरूरत नहीं है। तिल, रागी, राजगीरा, सोया, चना और हरी पत्तेदार सब्जियों जैसे अलग-अलग खाद्य पदार्थों को संतुलित तरीके से भोजन में शामिल किया जा सकता है। वहीं जिन लोगों को पहले से हड्डियों की समस्या है या कैल्शियम अथवा विटामिन D की कमी की आशंका है, उन्हें सप्लीमेंट खुद से शुरू करने के बजाय डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन की सलाह लेनी चाहिए।
