अक्षय तृतीया 2026: जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और सोना-चांदी खरीदने का महत्व

 
अक्षय तृतीया 2026: जानें तारीख, शुभ मुहूर्त और सोना-चांदी खरीदने का महत्व

Akshaya Tritiya 2026: कब है अक्षय तृतीया और क्यों मानी जाती है बेहद शुभ

अक्षय तृतीया हिंदू धर्म के सबसे पावन और फलदायी पर्वों में से एक मानी जाती है। यह पर्व हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। देश के कई हिस्सों में इसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है।

मान्यता है कि अक्षय तृतीया का दिन इतना शुभ होता है कि इस दिन बिना मुहूर्त देखे भी मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। यही कारण है कि इस दिन लोग बड़ी संख्या में सोना-चांदी, संपत्ति, वाहन, दुकान और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की खरीदारी करते हैं।


अक्षय तृतीया 2026 की तारीख

हिंदू पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया 2026 में रविवार, 19 अप्रैल को मनाई जाएगी। यह तिथि वैशाख मास में पड़ती है, जिसे धर्म, दान और पुण्य कर्मों के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, यदि अक्षय तृतीया रोहिणी नक्षत्र में पड़े, तो इसका शुभ प्रभाव और भी बढ़ जाता है। रोहिणी नक्षत्र समृद्धि, उन्नति और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है।


सोना-चांदी खरीदने का शुभ मुहूर्त

अक्षय तृतीया पर सोना और चांदी खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन खरीदा गया धन कभी कम नहीं होता और लगातार वृद्धि करता है।

वर्ष 2026 में सोना-चांदी खरीदने का शुभ मुहूर्त:

  • 19 अप्रैल, रविवार को सुबह 10:49 बजे से
  • 20 अप्रैल, सोमवार को सुबह 5:51 बजे तक

इस दौरान लगभग पूरा दिन खरीदारी के लिए अनुकूल रहेगा।


अक्षय तृतीया का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

‘अक्षय’ शब्द का अर्थ है जो कभी समाप्त न हो। इस दिन किए गए दान, जप, तप और शुभ कार्य अक्षय फल प्रदान करते हैं।

अक्षय तृतीया के दिन:

  • दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है
  • धन और समृद्धि में वृद्धि होती है
  • नए कार्यों की शुरुआत शुभ फल देती है
  • आध्यात्मिक साधना सफल होती है

इस दिन मंत्र जाप, हवन, पितृ तर्पण और गरीबों को अन्न दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।


अक्षय तृतीया से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं

अक्षय तृतीया का उल्लेख कई पौराणिक कथाओं में मिलता है:

  • इसी दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था
  • कुछ मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग की शुरुआत इसी दिन हुई
  • भगवान कृष्ण और सुदामा की ऐतिहासिक भेंट इसी दिन हुई
  • कुछ परंपराएं महाभारत के समापन को भी अक्षय तृतीया से जोड़ती हैं

इन कथाओं के कारण इस पर्व का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।


डिस्क्लेमर

यह लेख धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी निर्णय से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित रहेगा।

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