UPI MDR Charges: UPI पर नहीं लगेगा 15 अक्टूबर से चार्ज, व्यापारियों को मिली राहत
दोस्तो हाल ही में सरकार ने फैसला किया था कि 2000 से ज्यादा UPI करने पर चार्ज लगेगा, वो भी 15 अक्टूबर से, लेकिन रिपोर्ट्स की माने तो उसे जनवरी 2027 तक टाला जा सकता है। मर्चेंट एसोसिएशन, फिनटेक कंपनियों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स ने नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) से इसे लागू करने में देरी करने का आग्रह किया है। उन्होंने तकनीकी चुनौतियों और नए नियमों को लेकर स्पष्टता की कमी का हवाला दिया है। आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स

1. UPI MDR नियम में देरी क्यों हो सकती है?
पेमेंट इंडस्ट्री का मानना है कि प्रस्तावित सिस्टम की तैयारी के लिए उन्हें और समय चाहिए। दिवाली और त्योहारों की खरीदारी का समय नजदीक आने के कारण, व्यापारियों को चिंता है कि पेमेंट पर अतिरिक्त चार्ज से उनकी ऑपरेटिंग लागत बढ़ सकती है।
इंडस्ट्री ने त्योहारों का सीजन खत्म होने तक इसे टालने का अनुरोध किया है ताकि इस अहम समय में कारोबार और ग्राहकों पर बुरा असर न पड़े।
2. नया MDR नियम क्या है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह फीस है जो व्यापारी कुछ डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने के लिए देते हैं। रिपोर्ट में बताए गए प्रस्ताव के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के योग्य UPI ट्रांज़ैक्शन पर 0.4% का MDR लागू होगा।
- अगर 0.4% की दर लागू होती है, तो ₹2,000 के ट्रांज़ैक्शन पर ₹8 की फीस लगेगी।
- ₹10,000 के ट्रांज़ैक्शन पर ₹40 की फीस लगेगी।
- लागू होने वाले चार्ज ट्रांज़ैक्शन की कैटेगरी और अंतिम नियमों के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं।
महत्वपूर्ण: प्रस्तावित MDR को हर UPI पेमेंट पर लगने वाला यूनिवर्सल चार्ज नहीं माना जाना चाहिए। लागू होने वाली कैटेगरी, छूट और इसे लागू करने के तरीकों के बारे में स्पष्टता की जरूरत है।

3. पेमेंट कंपनियों को चिंता क्यों है?
कार्ड पेमेंट के उलट, UPI ट्रांज़ैक्शन में अलग-अलग कैटेगरी शामिल होती हैं, जैसे यूटिलिटी बिल, लोन का भुगतान और कैपिटल मार्केट पेमेंट। हर कैटेगरी के लिए फीस का स्ट्रक्चर अलग हो सकता है, जिससे इसे लागू करना और मुश्किल हो जाता है।
4. लोन के भुगतान और स्टॉक मार्केट ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी दिक्कतें
ब्रोकिंग फर्मों ने ट्रेडिंग अकाउंट में ट्रांसफर किए जाने वाले फंड पर MDR को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि इन ट्रांसफर से उन्हें सीधे कोई कमाई नहीं होती है।
लोन के भुगतान में भी तकनीकी चुनौतियां हैं। हालांकि, कुछ लोन-पेमेंट ट्रांज़ैक्शन के लिए ₹5 की फ़्लैट फ़ीस तय की गई है, लेकिन पेमेंट प्रोवाइडर्स के लिए इन पेमेंट्स को दूसरे फ़ाइनेंशियल ट्रांज़ैक्शन से अलग पहचानना मुश्किल हो सकता है।
5. ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है?
अगर योग्य ट्रांज़ैक्शन के लिए MDR लागू किया जाता है, तो मर्चेंट्स को पेमेंट-प्रोसेसिंग की ज़्यादा लागत का सामना करना पड़ सकता है और वे इस लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकते हैं। हालांकि, ग्राहकों पर इसका क्या असर होगा, यह फ़ाइनल पॉलिसी पर निर्भर करेगा।
