TRAI Rules- 1 जनवरी से लागू होगें नए दूरसंचार इंटरकनेक्शन नियम, जान लिजिए इनके बारे में

 
TRAI Rules- 1 जनवरी से लागू होगें नए दूरसंचार इंटरकनेक्शन नियम, जान लिजिए इनके बारे में टेलीकॉम दुनिया के लिए बड़ी खबर, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने देश के टेलीकॉम इंटरकनेक्शन ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। जो कि 'टेलीकम्युनिकेशन इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) रेगुलेशंस, 2026' जारी किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इन नए नियमों का उद्देश्य टेलीकॉम नेटवर्क कनेक्टिविटी को आधुनिक बनाना, कॉल की गुणवत्ता में सुधार करना, लेटेंसी (देरी) को कम करना और ट्रैफिक मैनेजमेंट को अधिक कुशल बनाना है। आइए जानते हैं इन नियमों के बारे में-  1. जनवरी 2027 से नया इंटरकनेक्शन ढांचा संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इसका उद्देश्य मौजूदा टेलीकॉम इंटरकनेक्शन सिस्टम को आधुनिक नेटवर्क तकनीकों के अनुरूप बनाना है। 2. LSA-स्तर के इंटरकनेक्शन की ओर बदलाव TRAI की योजना टेलीकॉम ट्रैफिक को मौजूदा 'लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया' (LDCA) और 'शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया' (SDCA) सिस्टम से हटाकर 'लाइसेंस्ड सर्विस एरिया' (LSA)-स्तर के इंटरकनेक्शन मॉडल पर ले जाने की है। इस बदलाव से कॉल रूटिंग आसान होने, नेटवर्क मैनेजमेंट में सुधार होने और नंबरिंग संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होने की उम्मीद है। 3. तीन साल की ट्रांजिशन अवधि (बदलाव का समय) LDCA/SDCA-स्तर के 'पॉइंट्स ऑफ इंटरकनेक्शन' (PoIs) से LSA-स्तर के PoIs पर टेलीकॉम ट्रैफिक का माइग्रेशन तीन वर्षों में चरणों में पूरा किया जाएगा। इस बदलाव के बाद, सारा ट्रैफिक एक्सचेंज केवल LSA या सर्विस-एरिया स्तर पर ही होगा। 4. नए कनेक्शन के लिए IP-आधारित इंटरकनेक्शन अनिवार्य संशोधित नियमों के तहत, 1 जनवरी 2027 के बाद स्थापित किए जाने वाले सभी नए इंटरकनेक्शन IP-आधारित होने चाहिए। मौजूदा E1/TDM-आधारित इंटरकनेक्शन भी अगले तीन वर्षों में धीरे-धीरे IP तकनीक में बदल दिए जाएंगे।  इस बदलाव से निम्नलिखित लाभ मिलने की उम्मीद है: - कॉल की बेहतर गुणवत्ता। - बैंडविड्थ का अधिक कुशल उपयोग। - बेहतर एंड-टू-एंड कॉल परफॉरमेंस। - नेटवर्क की अधिक विश्वसनीयता। 5. कॉल-हैंडलिंग क्षमता के लिए नए नियम TRAI ने स्पष्ट किया है कि IP-आधारित 'पॉइंट ऑफ इंटरकनेक्शन' (PoI) की अधिकतम कॉल-हैंडलिंग क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह एक साथ कितने सेशन को सपोर्ट कर सकता है और उसके पास कितनी लिंक बैंडविड्थ उपलब्ध है।  6. PoI को स्वेच्छा से सरेंडर करने का नया प्रावधान इस संशोधन में 'पॉइंट ऑफ इंटरकनेक्शन' (PoI) को स्वेच्छा से सरेंडर करने के लिए एक अलग ढांचा (फ्रेमवर्क) पेश किया गया है। टेलीकॉम ऑपरेटर किसी PoI को तब सरेंडर कर सकते हैं, जब ट्रैफिक कम होने, किसी क्षेत्र से सेवाएं हटा लेने या नेटवर्क रूटिंग में बदलाव के कारण उसकी अब कोई आवश्यकता न रह जाए। इससे ऑपरेटरों को अनावश्यक परिचालन खर्च (ऑपरेशनल खर्च) कम करने में मदद मिलेगी। 7. बैंक गारंटी के नियमों में संशोधन मौजूदा बैंक गारंटी ढांचा लागू रहेगा। हालांकि, आवश्यक बैंक गारंटी राशि के मूल्यांकन के बीच के अंतराल को 6 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है। TRAI ने सभी PoI (IP-आधारित इंटरकनेक्शन सहित) के लिए लागू होने वाली अधिकतम बैंक गारंटी सीमा की गणना करने का एक संशोधित तरीका भी पेश किया है। 8. भुगतान में देरी पर ब्याज संशोधित नियमों में इंटरकनेक्शन शुल्क और उपयोग शुल्क (यूसेज चार्ज) के भुगतान में होने वाली देरी के बारे में भी प्रावधान किए गए हैं। ब्याज दर का फैसला टेलीकॉम सेवा प्रदाता आपसी सहमति से करेंगे। हालांकि, यह दर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक साल की 'मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट' (MCLR) से 2% से अधिक नहीं हो सकती।

टेलीकॉम दुनिया के लिए बड़ी खबर, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने देश के टेलीकॉम इंटरकनेक्शन ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। जो कि 'टेलीकम्युनिकेशन इंटरकनेक्शन (तीसरा संशोधन) रेगुलेशंस, 2026' जारी किए हैं, जो 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे।

इन नए नियमों का उद्देश्य टेलीकॉम नेटवर्क कनेक्टिविटी को आधुनिक बनाना, कॉल की गुणवत्ता में सुधार करना, लेटेंसी (देरी) को कम करना और ट्रैफिक मैनेजमेंट को अधिक कुशल बनाना है। आइए जानते हैं इन नियमों के बारे में-

TRAI Rules- 1 जनवरी से लागू होगें नए दूरसंचार इंटरकनेक्शन नियम, जान लिजिए इनके बारे में

1. जनवरी 2027 से नया इंटरकनेक्शन ढांचा

संशोधित नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे। इसका उद्देश्य मौजूदा टेलीकॉम इंटरकनेक्शन सिस्टम को आधुनिक नेटवर्क तकनीकों के अनुरूप बनाना है।

2. LSA-स्तर के इंटरकनेक्शन की ओर बदलाव

TRAI की योजना टेलीकॉम ट्रैफिक को मौजूदा 'लॉन्ग डिस्टेंस चार्जिंग एरिया' (LDCA) और 'शॉर्ट डिस्टेंस चार्जिंग एरिया' (SDCA) सिस्टम से हटाकर 'लाइसेंस्ड सर्विस एरिया' (LSA)-स्तर के इंटरकनेक्शन मॉडल पर ले जाने की है।

इस बदलाव से कॉल रूटिंग आसान होने, नेटवर्क मैनेजमेंट में सुधार होने और नंबरिंग संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

3. तीन साल की ट्रांजिशन अवधि (बदलाव का समय)

LDCA/SDCA-स्तर के 'पॉइंट्स ऑफ इंटरकनेक्शन' (PoIs) से LSA-स्तर के PoIs पर टेलीकॉम ट्रैफिक का माइग्रेशन तीन वर्षों में चरणों में पूरा किया जाएगा। इस बदलाव के बाद, सारा ट्रैफिक एक्सचेंज केवल LSA या सर्विस-एरिया स्तर पर ही होगा।

4. नए कनेक्शन के लिए IP-आधारित इंटरकनेक्शन अनिवार्य

संशोधित नियमों के तहत, 1 जनवरी 2027 के बाद स्थापित किए जाने वाले सभी नए इंटरकनेक्शन IP-आधारित होने चाहिए।

मौजूदा E1/TDM-आधारित इंटरकनेक्शन भी अगले तीन वर्षों में धीरे-धीरे IP तकनीक में बदल दिए जाएंगे।

TRAI Rules- 1 जनवरी से लागू होगें नए दूरसंचार इंटरकनेक्शन नियम, जान लिजिए इनके बारे में

इस बदलाव से निम्नलिखित लाभ मिलने की उम्मीद है:

- कॉल की बेहतर गुणवत्ता।

- बैंडविड्थ का अधिक कुशल उपयोग।

- बेहतर एंड-टू-एंड कॉल परफॉरमेंस।

- नेटवर्क की अधिक विश्वसनीयता। 5. कॉल-हैंडलिंग क्षमता के लिए नए नियम

TRAI ने स्पष्ट किया है कि IP-आधारित 'पॉइंट ऑफ इंटरकनेक्शन' (PoI) की अधिकतम कॉल-हैंडलिंग क्षमता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह एक साथ कितने सेशन को सपोर्ट कर सकता है और उसके पास कितनी लिंक बैंडविड्थ उपलब्ध है।

6. PoI को स्वेच्छा से सरेंडर करने का नया प्रावधान

इस संशोधन में 'पॉइंट ऑफ इंटरकनेक्शन' (PoI) को स्वेच्छा से सरेंडर करने के लिए एक अलग ढांचा (फ्रेमवर्क) पेश किया गया है।

टेलीकॉम ऑपरेटर किसी PoI को तब सरेंडर कर सकते हैं, जब ट्रैफिक कम होने, किसी क्षेत्र से सेवाएं हटा लेने या नेटवर्क रूटिंग में बदलाव के कारण उसकी अब कोई आवश्यकता न रह जाए। इससे ऑपरेटरों को अनावश्यक परिचालन खर्च (ऑपरेशनल खर्च) कम करने में मदद मिलेगी।

7. बैंक गारंटी के नियमों में संशोधन

मौजूदा बैंक गारंटी ढांचा लागू रहेगा। हालांकि, आवश्यक बैंक गारंटी राशि के मूल्यांकन के बीच के अंतराल को 6 महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दिया गया है।

TRAI ने सभी PoI (IP-आधारित इंटरकनेक्शन सहित) के लिए लागू होने वाली अधिकतम बैंक गारंटी सीमा की गणना करने का एक संशोधित तरीका भी पेश किया है।

8. भुगतान में देरी पर ब्याज

संशोधित नियमों में इंटरकनेक्शन शुल्क और उपयोग शुल्क (यूसेज चार्ज) के भुगतान में होने वाली देरी के बारे में भी प्रावधान किए गए हैं।

ब्याज दर का फैसला टेलीकॉम सेवा प्रदाता आपसी सहमति से करेंगे। हालांकि, यह दर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक साल की 'मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट' (MCLR) से 2% से अधिक नहीं हो सकती।