PMVKY- पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ कौन लोग उठा सकते हैं, आइए जानते हैं कौन हैं पात्र
भारतीय केंद्र सरकार अपने देश के आर्थिक रूप से कमजोर लोगो के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं शुरु करती हैं, जिनका उद्देश्य इन लोगो की मदद करना और जीवनशैली में सुधार लाना हैं, ऐसी ही एक योजना हैं प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना (PM Vishwakarma Yojana), इस योजना के तहत पात्र कारीगरों को कौशल प्रशिक्षण, दैनिक भत्ता, टूलकिट खरीदने के लिए आर्थिक सहायता और अपना काम शुरू करने के लिए कम ब्याज पर लोन जैसी सुविधाएं दी जाती हैं, आइए जानते हैं कौन हैं इसके लिए पात्र

PM Vishwakarma Yojana का लाभ कौन उठा सकता है?
यह योजना पारंपरिक रूप से विभिन्न हस्तशिल्प और कारीगरी से जुड़े लोगों के लिए है। इसके तहत मुख्य रूप से इन 18 ट्रेड्स को शामिल किया गया है:
धोबी (Washerman)
दर्जी (Tailor)
ताला बनाने वाले (Locksmith)
मोची/जूता बनाने वाले (Cobbler/Shoemaker)
नाई/हेयरड्रेसर
राजमिस्त्री (Mason)
नाव बनाने वाले
मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले
माला बनाने वाले
कवच एवं हथियार बनाने वाले
पत्थर तोड़ने वाले
टोकरी, चटाई और झाड़ू बनाने वाले
गुड़िया और खिलौना बनाने वाले
लोहार
पत्थर तराशने वाले
हथौड़ा और टूलकिट बनाने वाले
मूर्तिकार
अन्य संबंधित पारंपरिक कारीगर एवं शिल्पकार, जिन्हें योजना के निर्धारित ट्रेड में शामिल किया गया है।

PM Vishwakarma Yojana में क्या-क्या फायदे मिलते हैं?
1. कौशल प्रशिक्षण
लाभार्थियों को अपने पारंपरिक काम से जुड़े बेसिक और एडवांस ट्रेनिंग का अवसर दिया जाता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता और कमाई के अवसर बेहतर हो सकें।
2. ट्रेनिंग के दौरान ₹500 प्रतिदिन
प्रशिक्षण अवधि के दौरान लाभार्थियों को ₹500 प्रतिदिन का स्टाइपेंड दिए जाने का प्रावधान है।
3. टूलकिट के लिए ₹15,000
कारीगरों को अपने काम के लिए जरूरी आधुनिक उपकरण खरीदने में मदद देने के लिए ₹15,000 तक की टूलकिट सहायता दी जाती है।
4. कम ब्याज पर लोन
योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को अपना कारोबार बढ़ाने या शुरू करने के लिए रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
पहला ऋण: ₹1 लाख तक
दूसरा ऋण: ₹2 लाख तक
यानी पात्रता और निर्धारित शर्तें पूरी करने पर कुल ₹3 लाख तक का ऋण प्राप्त किया जा सकता है।
योजना का उद्देश्य क्या है?
PM Vishwakarma Yojana का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक सहायता के साथ आधुनिक प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराना है। इससे वे अपने हुनर को बेहतर बनाकर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर सकें।
