LPG Cylinder Update- हाई कोर्ट ने दिए सरकार को आदेश, LPG सब्सिडी और बॉयोमीट्रिक के नियम बदलेंगे?

 
LPG Cylinder Update- हाई कोर्ट ने दिए सरकार को आदेश, LPG सब्सिडी और बॉयोमीट्रिक के नियम बदलेंगे? दोस्तो अगर हम बात करें एलपीजी सिलेंडर की तो यह तो हमारे घर की जरूरत बन गई हैं, ऐसे में हाल ही में घरेलू LPG सिलेंडर बुक करने और सब्सिडी पाने के नियमों की कानूनी जांच हो रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने LPG रिफिल बुकिंग और सब्सिडी के लिए ज़रूरी बायोमेट्रिक आधार वेरिफिकेशन की शर्त को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि अनिवार्य बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (जिसमें आइरिस स्कैन भी शामिल है) से बुज़ुर्गों, दिव्यांगों और दृष्टिबाधित ग्राहकों को परेशानी होती है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं और अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की गई है। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि यह शर्त आधार ऑथेंटिकेशन से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ है। याचिकाकर्ता ने उन कमज़ोर LPG ग्राहकों पर इस नियम के असर के बारे में चिंता जताई है जो सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हैं। केंद्र सरकार ने क्या कहा? केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि इसमें पर्याप्त तथ्यात्मक डेटा नहीं है। सरकार के मुख्य तर्कों में शामिल हैं: - सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकना: बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की शर्त सरकारी सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने में मदद के लिए शुरू की गई थी। - दिव्यांगता से जुड़ी चिंताओं का समाधान: सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि दिव्यांग लोगों की ज़रूरतों पर विचार किया जाएगा। - सहायक डेटा की कमी: अटॉर्नी जनरल ने तर्क दिया कि याचिका बिना किसी पर्याप्त तथ्यात्मक आधार के दायर की गई थी। दूसरी ओर, याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील ज़ोहेब हुसैन ने तर्क दिया कि सरकार का फैसला कानून और आधार से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुरूप नहीं था। किन अधिकारियों को कोर्ट का नोटिस मिला है? कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की बेंच ने निम्नलिखित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए नोटिस जारी किए हैं: - केंद्र सरकार - पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड - सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियाँ अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर, 2026 को होनी है। LPG ग्राहकों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कब शुरू हुआ? मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने घरेलू LPG ग्राहकों के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया है। यह नियम उन ग्राहकों पर लागू होगा जो तय रिटेल सेलिंग प्राइस (जिसमें लागू सब्सिडी भी शामिल है) पर रिफिल बुक करते हैं। यह नियम 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा। इस कदम का मकसद वेरिफिकेशन को मज़बूत करना और सब्सिडी के फ़ायदों के गलत इस्तेमाल को कम करना है। हालाँकि, याचिका में उन ग्राहकों की पहुँच को लेकर सवाल उठाए गए हैं जो आसानी से बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं कर पाएँगे।

दोस्तो अगर हम बात करें एलपीजी सिलेंडर की तो यह तो हमारे घर की जरूरत बन गई हैं, ऐसे में हाल ही में घरेलू LPG सिलेंडर बुक करने और सब्सिडी पाने के नियमों की कानूनी जांच हो रही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने LPG रिफिल बुकिंग और सब्सिडी के लिए ज़रूरी बायोमेट्रिक आधार वेरिफिकेशन की शर्त को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

याचिका में कहा गया है कि अनिवार्य बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (जिसमें आइरिस स्कैन भी शामिल है) से बुज़ुर्गों, दिव्यांगों और दृष्टिबाधित ग्राहकों को परेशानी होती है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं और अगली सुनवाई 18 नवंबर को तय की गई है।

LPG Cylinder Update – High Court issues directives to the government; will the rules for LPG subsidies and biometrics change?

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि यह शर्त आधार ऑथेंटिकेशन से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ है।

याचिकाकर्ता ने उन कमज़ोर LPG ग्राहकों पर इस नियम के असर के बारे में चिंता जताई है जो सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हैं।

केंद्र सरकार ने क्या कहा?

केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने याचिका का विरोध किया और तर्क दिया कि इसमें पर्याप्त तथ्यात्मक डेटा नहीं है।

सरकार के मुख्य तर्कों में शामिल हैं:

- सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकना: बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की शर्त सरकारी सब्सिडी के दुरुपयोग को रोकने में मदद के लिए शुरू की गई थी।

- दिव्यांगता से जुड़ी चिंताओं का समाधान: सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि दिव्यांग लोगों की ज़रूरतों पर विचार किया जाएगा।

- सहायक डेटा की कमी: अटॉर्नी जनरल ने तर्क दिया कि याचिका बिना किसी पर्याप्त तथ्यात्मक आधार के दायर की गई थी।

दूसरी ओर, याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील ज़ोहेब हुसैन ने तर्क दिया कि सरकार का फैसला कानून और आधार से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुरूप नहीं था।

LPG Cylinder Update – High Court issues directives to the government; will the rules for LPG subsidies and biometrics change?

किन अधिकारियों को कोर्ट का नोटिस मिला है?

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की बेंच ने निम्नलिखित अधिकारियों से जवाब मांगते हुए नोटिस जारी किए हैं:

- केंद्र सरकार

- पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड

- सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियाँ

अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर, 2026 को होनी है।

LPG ग्राहकों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कब शुरू हुआ?

मिली जानकारी के अनुसार, सरकार ने घरेलू LPG ग्राहकों के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया है। यह नियम उन ग्राहकों पर लागू होगा जो तय रिटेल सेलिंग प्राइस (जिसमें लागू सब्सिडी भी शामिल है) पर रिफिल बुक करते हैं। यह नियम 1 अक्टूबर, 2026 से लागू होगा।

इस कदम का मकसद वेरिफिकेशन को मज़बूत करना और सब्सिडी के फ़ायदों के गलत इस्तेमाल को कम करना है। हालाँकि, याचिका में उन ग्राहकों की पहुँच को लेकर सवाल उठाए गए हैं जो आसानी से बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं कर पाएँगे।