ITR Filing 2026: रिटर्न भरते समय भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, लग सकती है भारी पेनाल्टी

 
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आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसमें दी गई हर जानकारी सही और नियमों के अनुरूप होना भी उतना ही जरूरी है। यदि रिटर्न भरते समय गलत जानकारी दी जाती है, आय छिपाई जाती है या तय समयसीमा का पालन नहीं किया जाता, तो आयकर विभाग जुर्माना लगा सकता है। कुछ मामलों में यह पेनाल्टी बकाया टैक्स की 200% तक भी पहुंच सकती है।

असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बिना ऑडिट वाले व्यक्तिगत करदाताओं और वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित है। अंतिम समय की जल्दबाजी में की गई छोटी-सी चूक भी महंगी पड़ सकती है।

आइए जानते हैं आयकर विभाग के वे 5 महत्वपूर्ण नियम, जिनका हर टैक्सपेयर को ध्यान रखना चाहिए।

1. समय पर ITR दाखिल न करने पर लेट फीस

यदि आप निर्धारित समय सीमा तक ITR दाखिल नहीं करते हैं, तो आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत लेट फाइलिंग फीस देनी पड़ सकती है।

  • यदि आपकी कुल आय ₹5 लाख तक है, तो अधिकतम ₹1,000 की लेट फीस लग सकती है।

  • यदि कुल आय ₹5 लाख से अधिक है, तो यह शुल्क ₹5,000 तक हो सकता है।

इसलिए अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते रिटर्न दाखिल करना बेहतर रहता है।

2. देर से संशोधित (Revised) रिटर्न भरने पर भी शुल्क

अगर आपने पहले दाखिल किए गए ITR में कोई गलती कर दी है, तो उसे संशोधित करने का विकल्प मिलता है। लेकिन यदि निर्धारित समयसीमा के काफी बाद संशोधित रिटर्न दाखिल किया जाता है, तो अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

धारा 234I के तहत लागू नियमों के अनुसार, देरी से संशोधित रिटर्न दाखिल करने पर ₹1,000 से ₹5,000 तक का शुल्क लगाया जा सकता है।

इसलिए रिटर्न जमा करने से पहले सभी जानकारी को अच्छी तरह जांच लेना जरूरी है।

3. आय छिपाने या गलत जानकारी देने पर भारी पेनाल्टी

आयकर विभाग गलत जानकारी देने या आय कम दिखाने को गंभीर उल्लंघन मानता है।

धारा 270A के तहत—

  • यदि करदाता वास्तविक आय कम दिखाता है, तो बकाया टैक्स का 50% तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

  • यदि जानबूझकर गलत या भ्रामक जानकारी दी जाती है, तो यह पेनाल्टी बढ़कर बकाया टैक्स की 200% तक हो सकती है।

इसलिए सभी आय स्रोतों की सही जानकारी देना बेहद जरूरी है।

4. ₹2 लाख या उससे अधिक नकद लेन-देन पर कार्रवाई

आयकर अधिनियम की धारा 269ST के तहत एक दिन में या एक ही लेन-देन में ₹2 लाख या उससे अधिक नकद राशि स्वीकार करना नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।

ऐसी स्थिति में आयकर विभाग संबंधित राशि के बराबर पेनाल्टी लगा सकता है। इसलिए बड़े भुगतान हमेशा बैंकिंग माध्यमों से करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

5. सेल्फ असेसमेंट टैक्स जमा नहीं किया तो बढ़ सकती है परेशानी

यदि ITR दाखिल करने से पहले आपकी गणना के अनुसार टैक्स देय है और आपने उसका भुगतान नहीं किया है, तो आयकर विभाग कार्रवाई कर सकता है।

धारा 140A और 221 के तहत, असेसिंग ऑफिसर परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त जुर्माना लगा सकते हैं। इसलिए रिटर्न दाखिल करने से पहले देय टैक्स का भुगतान सुनिश्चित करना जरूरी है।

अंतिम समय का इंतजार क्यों नहीं करना चाहिए?

जैसे-जैसे ITR की अंतिम तिथि नजदीक आती है, ई-फाइलिंग पोर्टल पर ट्रैफिक बढ़ जाता है। ऐसे में तकनीकी दिक्कतें या दस्तावेजों की कमी के कारण रिटर्न दाखिल करने में परेशानी हो सकती है।

समय रहते ITR भरने के फायदे—

  • लेट फीस से बचाव।

  • गलतियों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय।

  • रिफंड मिलने की प्रक्रिया जल्दी शुरू होने की संभावना।

  • अंतिम समय की तकनीकी समस्याओं से राहत।

ITR भरते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • सभी आय स्रोतों की सही जानकारी दर्ज करें।

  • फॉर्म 16, AIS और TIS से आंकड़ों का मिलान करें।

  • बैंक खाते और पैन की जानकारी सही भरें।

  • देय टैक्स का भुगतान पहले करें।

  • रिटर्न दाखिल करने के बाद समय पर ई-वेरिफिकेशन भी पूरा करें।

निष्कर्ष

ITR फाइलिंग में लापरवाही आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। समय पर रिटर्न दाखिल करना, सही जानकारी देना और आयकर विभाग के नियमों का पालन करना हर करदाता की जिम्मेदारी है। यदि किसी भी प्रकार की शंका हो, तो रिटर्न दाखिल करने से पहले टैक्स विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। आयकर से जुड़े नियम समय-समय पर बदल सकते हैं। किसी भी कानूनी या कर संबंधी निर्णय से पहले आयकर विभाग की आधिकारिक अधिसूचनाओं या योग्य टैक्स सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।

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