₹1 करोड़ से अधिक आय वालों के लिए ITR का यह नियम जानना जरूरी, Schedule AL नहीं भरा तो बढ़ सकती है परेशानी

 
s

हाई इनकम टैक्सपेयर्स को ITR दाखिल करते समय संपत्तियों और देनदारियों का पूरा ब्योरा देना होगा, गलत जानकारी पर हो सकती है जांच

अगर वित्त वर्ष 2025-26 में आपकी कुल कर योग्य आय ₹1 करोड़ से अधिक है, तो इस बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय केवल आय का विवरण देना पर्याप्त नहीं होगा। ऐसे करदाताओं को अपनी संपत्तियों (Assets) और देनदारियों (Liabilities) का विस्तृत विवरण भी आयकर विभाग को देना अनिवार्य है।

आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, निर्धारित सीमा से अधिक आय वाले व्यक्तिगत करदाता (Individuals) और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) को ITR भरते समय Schedule AL (Assets and Liabilities) भरना होगा। यदि इस शेड्यूल में गलत, अधूरी या भ्रामक जानकारी दी जाती है, तो भविष्य में विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है या जांच की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

क्या है Schedule AL?

Schedule AL का पूरा नाम Assets and Liabilities Schedule है। इसका उद्देश्य अधिक आय वाले करदाताओं की कुल संपत्ति और उन पर मौजूद देनदारियों का रिकॉर्ड प्राप्त करना है।

यह प्रावधान उन व्यक्तिगत करदाताओं और HUF पर लागू होता है जिनकी कुल आय वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1 करोड़ से अधिक है। ऐसे करदाता यदि ITR-2 या ITR-3 दाखिल कर रहे हैं, तो उन्हें यह शेड्यूल भरना अनिवार्य होगा।

वहीं कंपनियों के लिए अलग ITR फॉर्म में संपत्ति और देनदारियों से संबंधित अलग-अलग प्रावधान उपलब्ध हैं।

किन-किन संपत्तियों की जानकारी देनी होगी?

Schedule AL भरते समय करदाता को 31 मार्च 2026 तक अपने पास मौजूद प्रमुख संपत्तियों का विवरण देना होगा।

इसमें निम्नलिखित संपत्तियां शामिल हो सकती हैं—

  • आवासीय या व्यावसायिक भूमि और भवन

  • फ्लैट, प्लॉट और अन्य अचल संपत्तियां

  • कार, बाइक और अन्य वाहन

  • सोना, चांदी, हीरे और अन्य आभूषण

  • शेयर, म्यूचुअल फंड, बॉन्ड और अन्य सिक्योरिटीज

  • नकद राशि (Cash in Hand)

  • कलाकृतियां, प्राचीन वस्तुएं और अन्य मूल्यवान संग्रह

  • अन्य वित्तीय एवं गैर-वित्तीय संपत्तियां

इन संपत्तियों के साथ यदि कोई लोन या अन्य देनदारी जुड़ी है, तो उसका विवरण भी देना होगा।

संपत्तियों का मूल्य कैसे तय होगा?

आयकर नियमों के अनुसार अधिकांश मामलों में संपत्ति का मूल्य उसकी खरीद लागत (Cost of Acquisition) के आधार पर दर्ज किया जाता है।

यदि खरीद के बाद संपत्ति में कोई स्थायी सुधार (Improvement) कराया गया है, तो उस पर हुए खर्च को भी लागत में शामिल किया जा सकता है।

अगर कोई संपत्ति उपहार (Gift), वसीयत (Will) या विरासत (Inheritance) के माध्यम से प्राप्त हुई है, तो सामान्यतः पूर्व स्वामी की खरीद लागत और उस पर किए गए सुधार को आधार माना जा सकता है। जहां वास्तविक लागत उपलब्ध नहीं होती, वहां नियमों के अनुसार अनुमानित लागत का उल्लेख किया जा सकता है।

आयकर विभाग ने इसे अनिवार्य क्यों बनाया?

आयकर विभाग का उद्देश्य उच्च आय वाले करदाताओं की घोषित आय और उनकी वास्तविक संपत्तियों के बीच पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

कई मामलों में विभाग को घोषित आय और अर्जित संपत्तियों के बीच अंतर देखने को मिला है। ऐसे मामलों की बेहतर निगरानी और कर अनुपालन (Tax Compliance) मजबूत करने के लिए Schedule AL भरने का प्रावधान लागू किया गया है।

इससे विभाग यह आकलन कर सकता है कि करदाता द्वारा अर्जित संपत्तियां उसकी घोषित आय के अनुरूप हैं या नहीं।

इन बातों का रखें विशेष ध्यान

Schedule AL भरते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है—

  • सभी विवरण 31 मार्च 2026 तक की स्थिति के अनुसार दें।

  • प्रत्येक संपत्ति की सही खरीद लागत दर्ज करें।

  • संबंधित देनदारियों का भी पूरा विवरण दें।

  • किसी भी जानकारी को छिपाने या गलत दर्ज करने से बचें।

  • यदि आप अनिवासी (NRI) या "Not Ordinarily Resident" श्रेणी में आते हैं, तो केवल भारत में स्थित संपत्तियों का विवरण देना आवश्यक हो सकता है।

  • ITR जमा करने से पहले सभी आंकड़ों का एक बार पुनः मिलान अवश्य करें।

निष्कर्ष

यदि आपकी कुल आय ₹1 करोड़ से अधिक है, तो इस बार ITR दाखिल करते समय Schedule AL को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यह केवल एक अतिरिक्त फॉर्म नहीं, बल्कि आपकी संपत्तियों और देनदारियों का आधिकारिक खुलासा है। इसलिए सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें, सही जानकारी दर्ज करें और रिटर्न फाइल करने से पहले पूरी जानकारी की जांच अवश्य कर लें। सही और पारदर्शी विवरण देने से भविष्य में आयकर विभाग की पूछताछ, नोटिस या अनावश्यक विवादों से बचा जा सकता है।

Tags