Restaurant Bill में Service Charge जुड़ा है? जानिए कब देना जरूरी नहीं और कैसे बचा सकते हैं अपने पैसे

 
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रेस्तरां में परिवार या दोस्तों के साथ खाना खाने के बाद जब बिल सामने आता है, तो कई बार उसमें खाने और GST के अलावा 5% से 10% तक का 'Service Charge' भी जुड़ा होता है। अधिकांश ग्राहक इसे सरकारी टैक्स समझकर बिना सवाल किए भुगतान कर देते हैं। हालांकि, हकीकत इससे अलग है।

सर्विस चार्ज कोई सरकारी टैक्स नहीं है और इसे लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। केंद्र सरकार और उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने साफ किया है कि ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज वसूलना उचित नहीं है। ऐसे में हर उपभोक्ता को अपने अधिकारों की जानकारी होना बेहद जरूरी है।

आइए जानते हैं कि सर्विस चार्ज क्या होता है, इसे लेकर क्या नियम हैं और अगर किसी रेस्तरां ने आपकी अनुमति के बिना इसे बिल में जोड़ दिया है, तो आप क्या कर सकते हैं।

क्या होता है Service Charge?

सर्विस चार्ज वह अतिरिक्त राशि है, जिसे कुछ रेस्तरां अपनी सेवाओं के बदले ग्राहकों के बिल में जोड़ते हैं। यह आमतौर पर कुल बिल का 5% से 10% तक हो सकता है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि यह GST से पूरी तरह अलग होता है।

  • GST सरकार को जमा किया जाता है।

  • Service Charge रेस्तरां द्वारा रखा जाता है और उसका उपयोग वह अपनी आंतरिक नीति के अनुसार करता है।

यही कारण है कि सर्विस चार्ज को टैक्स समझना सही नहीं है।

क्या रेस्तरां सर्विस चार्ज लेना अनिवार्य बना सकते हैं?

सरकार का स्पष्ट रुख है कि नहीं

उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार कोई भी रेस्तरां ग्राहकों के बिल में डिफॉल्ट रूप से सर्विस चार्ज जोड़कर उसे अनिवार्य नहीं बता सकता।

यदि कोई ग्राहक सर्विस चार्ज देने से मना करता है, तो केवल इसी वजह से उसे सेवा देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

सरकार ने क्यों दिखाई सख्ती?

हाल के दिनों में कई ग्राहकों ने शिकायत की कि उनकी अनुमति के बिना बिल में सर्विस चार्ज जोड़ दिया गया।

इन शिकायतों के बाद केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि यदि कोई रेस्तरां ग्राहकों से जबरन सर्विस चार्ज वसूलता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

इसी क्रम में CCPA ने कई रेस्तरां और लोकप्रिय फूड चेन के खिलाफ जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है।

फिर भी कई रेस्तरां सर्विस चार्ज क्यों जोड़ रहे हैं?

रेस्तरां संगठनों का कहना है कि सर्विस चार्ज उनकी मूल्य निर्धारण (Pricing Policy) का हिस्सा है और इसकी जानकारी पहले से मेन्यू कार्ड या नोटिस बोर्ड पर दी जाती है।

हालांकि, सरकार का मत है कि केवल सूचना लिख देने से ग्राहक पर अतिरिक्त शुल्क थोपने का अधिकार नहीं मिल जाता।

इस मुद्दे पर कानूनी प्रक्रिया जारी है, इसलिए कई स्थानों पर अभी भी सर्विस चार्ज जोड़ा जा रहा है।

दिल्ली हाईकोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि यदि सर्विस चार्ज को अनिवार्य बनाया जाता है, तो इसे अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) माना जा सकता है।

हालांकि, इस मामले में अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।

क्या मेन्यू पर लिखा होना ही पर्याप्त है?

कई रेस्तरां मेन्यू या प्रवेश द्वार पर लिखते हैं कि "Service Charge Applicable"

लेकिन केवल ऐसा नोटिस लगा देने से ग्राहक का यह अधिकार समाप्त नहीं हो जाता कि वह अनिवार्य रूप से लगाए गए सर्विस चार्ज का विरोध कर सके।

इसी वजह से यह मुद्दा अभी भी कानूनी बहस का विषय बना हुआ है।

यदि सर्विस चार्ज हटाने से रेस्तरां मना कर दे तो क्या करें?

यदि आपको लगता है कि सर्विस चार्ज आपकी सहमति के बिना जोड़ा गया है, तो सबसे पहले रेस्तरां प्रबंधन से विनम्रता से संशोधित बिल जारी करने का अनुरोध करें।

यदि आपकी बात नहीं मानी जाती, तो—

  • बिल की कॉपी सुरक्षित रखें।

  • भुगतान का प्रमाण संभालकर रखें।

  • आवश्यकता पड़ने पर National Consumer Helpline या संबंधित उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

क्या सर्विस चार्ज और Tip एक ही हैं?

नहीं।

दोनों पूरी तरह अलग हैं।

Tip (टिप)

  • ग्राहक अपनी इच्छा से देता है।

  • अच्छी सेवा मिलने पर स्वैच्छिक भुगतान होता है।

  • इसे देना या न देना पूरी तरह ग्राहक की मर्जी पर निर्भर करता है।

Service Charge

  • रेस्तरां बिल में अलग से जोड़ता है।

  • यह टिप नहीं है।

  • इसे लेकर नियम और कानूनी विवाद अलग हैं।

यानी यदि सर्विस चार्ज हट भी जाए, तब भी ग्राहक चाहे तो अपनी इच्छा से कर्मचारियों को टिप दे सकता है।

ग्राहकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?

रेस्तरां का बिल चुकाने से पहले इन बातों की जांच जरूर करें—

  • बिल में सर्विस चार्ज जोड़ा गया है या नहीं।

  • GST और सर्विस चार्ज में अंतर समझें।

  • यदि सर्विस चार्ज पर आपत्ति है, तो पहले रेस्तरां से बात करें।

  • किसी दबाव में आकर अतिरिक्त भुगतान न करें।

  • जरूरत पड़ने पर उपभोक्ता शिकायत का विकल्प अपनाएं।

निष्कर्ष

सर्विस चार्ज को लेकर जागरूक रहना हर उपभोक्ता के लिए जरूरी है। यह सरकारी टैक्स नहीं है और इसे लेकर नियम तथा कानूनी प्रक्रिया अलग है। यदि आपको लगता है कि आपके साथ अनुचित व्यवहार हुआ है, तो पहले रेस्तरां से समाधान मांगें और आवश्यकता पड़ने पर उपभोक्ता अधिकारों का इस्तेमाल करें। बिल भरने से पहले उसकी पूरी जानकारी पढ़ना और प्रत्येक शुल्क को समझना हमेशा आपके हित में रहेगा।

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