Home Loan Tax Benefit: टैक्स बचाने के लिए पत्नी और पति को मिलकर लेना चाहिए होम लोन, जानिए पूरी डिटेल्स
दोस्तो आज के इस महंगाई वाले जमाने में घर खरीदना बहुत ही बड़ी बात हैं, लोग अपना सपना पूरा करने के लिए होम लोन लेते हैं, लेकिन क्या आपको पता हैं ज्वाइंट होम लेने से आर्थिक बोझ बांटने और साथ ही टैक्स में छूट का फ़ायदा मिल सकता है। अगर प्रॉपर्टी की ओनरशिप जॉइंट है, दोनों पति-पत्नी को-बॉरोअर हैं, और लोन चुकाने का रिकॉर्ड सही तरीके से रखा गया है, तो वे लागू इनकम टैक्स नियमों के तहत होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स

जॉइंट होम लोन पर टैक्स फ़ायदों से जुड़ी मुख्य बातें
कुल मिलाकर ₹4 लाख तक के ब्याज पर छूट: योग्य जोड़े पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत, लागू शर्तों के साथ, खुद रहने वाली प्रॉपर्टी के लिए होम लोन के ब्याज पर हर साल ₹2 लाख तक की छूट का दावा कर सकते हैं।
जॉइंट ओनरशिप ज़रूरी है: को-ओनर के तौर पर छूट का दावा करने के लिए प्रॉपर्टी में दोनों पति-पत्नी का कानूनी मालिकाना हक होना चाहिए।
दोनों को-बॉरोअर होने चाहिए: ब्याज पर छूट का दावा करने के लिए होम लोन में दोनों पति-पत्नी का बॉरोअर होना ज़रूरी है।
असल योगदान मायने रखता है: छूट में हर व्यक्ति का योग्य हिस्सा और उनके हिस्से का ब्याज दिखना चाहिए, जिसके लिए सही रिकॉर्ड होने चाहिए।
टैक्स व्यवस्था का फ़र्क पड़ता है: नई टैक्स व्यवस्था के तहत आमतौर पर खुद रहने वाली प्रॉपर्टी के होम लोन के ब्याज पर छूट नहीं मिलती है।
1. जॉइंट ओनरशिप और को-बॉरोइंग ज़रूरी हैं
जॉइंट होम लोन पर टैक्स छूट का दावा करने के लिए, पति और पत्नी दोनों का आमतौर पर प्रॉपर्टी का कानूनी को-ओनर और लोन का को-बॉरोअर होना ज़रूरी है।
सिर्फ़ लोन एग्रीमेंट या प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के कागज़ात में नाम होने से ही हर तरह की छूट के लिए योग्यता तय नहीं हो जाती।
जोड़ों को यह पक्का करना चाहिए कि उनकी प्रॉपर्टी के कागज़ात और लोन के रिकॉर्ड में उनकी भूमिका और ओनरशिप का हिस्सा साफ़ तौर पर बताया गया हो।

2. क्या कोई जोड़ा ब्याज पर ₹4 लाख तक की छूट का दावा कर सकता है?
इनकम-टैक्स एक्ट की धारा 24(b) के तहत, पुरानी टैक्स व्यवस्था में योग्य टैक्सपेयर अपने खुद के रहने वाले घर के लिए चुकाए गए ब्याज पर हर फाइनेंशियल ईयर में ₹2 लाख तक की कटौती (डिडक्शन) का दावा कर सकते हैं।
अगर पति-पत्नी दोनों अलग-अलग ज़रूरी शर्तों को पूरा करते हैं, तो उनके ब्याज पर मिलने वाली कुल कटौती सालाना ₹4 लाख तक हो सकती है।
प्रॉपर्टी में पति और पत्नी का मालिकाना हक (ओनरशिप शेयर) कितना है।
चुकाए गए ब्याज की वह रकम जो हर पति या पत्नी के हिस्से में आती है।
क्या प्रॉपर्टी और लोन ज़रूरी शर्तों को पूरा करते हैं।
हर व्यक्ति ने कौन सी टैक्स व्यवस्था चुनी है।
उस फाइनेंशियल ईयर के लिए लागू इनकम टैक्स के नियम।
कटौती से टैक्स लगने वाली इनकम कम हो जाती है; इसका मतलब यह नहीं है कि कपल को सीधे ₹4 लाख का टैक्स रिफंड मिलता है।
3. 50:50 ओनरशिप होने पर कटौती कैसे काम करती है?
मान लीजिए कि पति और पत्नी मिलकर एक घर खरीदते हैं और दोनों का प्रॉपर्टी में 50% हिस्सा है। दोनों को-बॉरोअर हैं और होम लोन चुकाने में योगदान देते हैं।
ऐसी स्थिति में, लागू नियमों और व्यक्तिगत सीमाओं के दायरे में रहते हुए, पति और पत्नी दोनों चुकाए गए ब्याज में अपने हिस्से के लिए कटौती का दावा कर सकते हैं।
अगर ओनरशिप का अनुपात 20:80 है, तो कटौती आम तौर पर ओनरशिप और फाइनेंसिंग के इंतज़ाम के हिसाब से होनी चाहिए। जिस पति या पत्नी का हिस्सा 20% है, वह सिर्फ़ इसलिए पूरी ₹2 लाख की सीमा का दावा नहीं कर सकता कि दूसरा साथी ज़्यादा कमाता है या EMI का बड़ा हिस्सा चुकाता है।
4. क्या होगा अगर सिर्फ़ एक साथी पूरी EMI चुकाता है?
अक्सर ऐसी स्थिति आती है जब पति और पत्नी दोनों घर के मालिक होते हैं और को-बॉरोअर होते हैं, लेकिन सिर्फ़ एक व्यक्ति अपने बैंक अकाउंट से पूरी EMI चुकाता है।
ऐसे मामलों में, सिर्फ़ इसलिए टैक्स कटौती को बांटा या दावा नहीं किया जाना चाहिए कि दोनों के नाम दस्तावेज़ों में हैं। असल आर्थिक योगदान, ओनरशिप का हिस्सा, लोन की ज़िम्मेदारी और इस बात के सबूत की जांच की जानी चाहिए कि ब्याज का खर्च किसने उठाया।
5. कंस्ट्रक्शन के दौरान चुकाए गए ब्याज पर टैक्स फ़ायदे
अगर होम लोन लेकर घर खरीदा या बनवाया जाता है और कंस्ट्रक्शन पूरा होने से पहले ब्याज चुकाया जाता है, तो आम तौर पर उस ब्याज के लिए तुरंत रेगुलर डिडक्शन का दावा नहीं किया जा सकता (अगर घर में खुद रह रहे हों)।
