Health Insurance- हेल्थ इंश्योरेंस के बदल गए हैं नियम, अब 3 घंटे में डिस्चार्ज और 1 घंटे में मिलेगी क्लेम मंजूरी
दोस्तो आज हेल्थ इंश्योरेंस बहुत ही जरूरी हो गया हैं, क्योंकि हॉस्पिटल के खर्चे बहुत ही अधिक हो गए हैं, जिनकी वजह से हमारी आर्थिक स्थिति भी खराब हो सकती हैं, ऐसे में हेल्थ इंश्योरेंस सबसे सही विकल्प हैं, ऐसे में Health insurance खरीदते समय सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि कौन-सी बीमारी कवर होगी और किन परिस्थितियों में इंश्योरेंस कंपनी आपका क्लेम रिजेक्ट कर सकती है। लेकिन अब पॉलिसीधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए IRDAI (Insurance Regulatory and Development Authority of India) ने हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम और शिकायतों के निपटारे को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रावधान लागू किए हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में-

1. कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन पर समय सीमा
जब अस्पताल आपकी ओर से इंश्योरेंस कंपनी को कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन का अनुरोध भेजता है, तो कंपनी को इस अनुरोध पर जल्द कार्रवाई करनी होती है। इसके लिए सामान्य तौर पर एक घंटे के भीतर निर्णय लेने का प्रावधान है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर छोटी बीमारी या हर उपचार के लिए कैशलेस सुविधा अपने आप मंजूर हो जाएगी। पॉलिसी की शर्तों और इलाज की पात्रता के आधार पर निर्णय लिया जाता है।
2. डिस्चार्ज अप्रूवल में देरी होने पर राहत
अगर आपका इलाज पूरा हो चुका है और अस्पताल ने डिस्चार्ज की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से डिस्चार्ज अप्रूवल में देरी होती है, तो मरीज को अनावश्यक रूप से अतिरिक्त भुगतान करने की स्थिति में नहीं डाला जाना चाहिए।
ऐसी स्थिति में यदि पॉलिसीधारक को अस्पताल में अपनी जेब से अतिरिक्त राशि जमा करनी पड़ती है, तो लागू नियमों के अनुसार बीमा कंपनी को उस राशि की भरपाई करनी पड़ सकती है।
3. 60 महीने के बाद पुराने खुलासों पर सुरक्षा
हेल्थ इंश्योरेंस में मोराटोरियम पीरियड बेहद महत्वपूर्ण होता है। 1 अप्रैल 2024 से इस अवधि को 96 महीने से घटाकर 60 महीने कर दिया गया था।
इसका मतलब है कि पॉलिसी के लगातार 60 महीने पूरे होने के बाद, सामान्य परिस्थितियों में इंश्योरेंस कंपनी के लिए पुराने गलत या अधूरे खुलासे के आधार पर पॉलिसी या क्लेम को चुनौती देना काफी सीमित हो जाता है।

4. Insurance Ombudsman मामले में भी तय समय सीमा
अगर पॉलिसीधारक और इंश्योरेंस कंपनी के बीच विवाद का समाधान नहीं होता और मामला Insurance Ombudsman तक पहुंचता है, तो कंपनी को निर्धारित समय सीमा में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होते हैं।
Ombudsman की ओर से नोटिस मिलने के बाद कंपनी को आवश्यक दस्तावेज 7 दिनों के भीतर जमा करने होते हैं।
यदि अतिरिक्त जानकारी मांगी जाती है, तो कंपनी को उसका जवाब 3 दिनों के भीतर देना होता है।
इससे शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने में मदद मिलती है।
5. Ombudsman के फैसले पर 30 दिनों में कार्रवाई
Insurance Ombudsman के फैसले के बाद इंश्योरेंस कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर उस पर कार्रवाई करनी होती है।
कंपनी द्वारा निर्णय पर प्रतिक्रिया या अनुपालन में देरी होने पर ₹5,000 तक की राशि शिकायतकर्ता को देय हो सकती है, जैसा कि लागू नियमों में निर्धारित है।
हालांकि, यदि बीमा कंपनी निर्धारित 30 दिनों की अवधि के भीतर Ombudsman के निर्णय के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करती है, तो मामला अलग तरीके से आगे बढ़ सकता है।
पॉलिसीधारकों के लिए जरूरी बातें
हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने से पहले सभी नियम और exclusions ध्यान से पढ़ें।
पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी बीमारियों और मेडिकल हिस्ट्री की सही जानकारी दें।
कैशलेस अप्रूवल में देरी होने पर अस्पताल के इंश्योरेंस डेस्क से तुरंत संपर्क करें।
किसी भी अतिरिक्त भुगतान की रसीद और सभी मेडिकल दस्तावेज सुरक्षित रखें।
क्लेम रिजेक्शन या विवाद की स्थिति में पहले इंश्योरेंस कंपनी की शिकायत निवारण व्यवस्था का इस्तेमाल करें।
समाधान न मिलने पर Insurance Ombudsman जैसे उपलब्ध शिकायत निवारण तंत्र का सहारा लिया जा सकता है।
