ITR भरने के बाद 30 दिन में करें e-Verification, नहीं तो रिटर्न हो सकता है अमान्य

 
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सिर्फ ITR फाइल करना काफी नहीं, तय समय के भीतर ई-वेरिफिकेशन पूरा करना भी अनिवार्य है, वरना रिफंड और टैक्स प्रोसेसिंग पर पड़ सकता है असर

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन जारी है और लाखों टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न भर रहे हैं। हालांकि, कई लोग यह मान लेते हैं कि ITR सबमिट करने के साथ ही पूरी प्रक्रिया खत्म हो जाती है। जबकि वास्तविकता यह है कि रिटर्न फाइल करने के बाद उसका e-Verification करना भी उतना ही जरूरी है।

यदि निर्धारित समय के भीतर ई-वेरिफिकेशन नहीं किया जाता, तो आयकर विभाग आपके रिटर्न को वैध नहीं मान सकता। ऐसी स्थिति में टैक्स रिफंड अटक सकता है, रिटर्न की प्रोसेसिंग रुक सकती है और अन्य कर संबंधी कार्यों में भी परेशानी आ सकती है। आइए जानते हैं e-Verification से जुड़े सभी जरूरी नियम और प्रक्रिया।

ITR फाइल करने की अंतिम तारीख क्या है?

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित है। टैक्सपेयर्स आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर PAN और पासवर्ड की मदद से अपना रिटर्न ऑनलाइन दाखिल कर सकते हैं।

जो लोग पहली बार ITR भर रहे हैं, उन्हें पहले पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके लिए PAN, आधार और अन्य जरूरी जानकारी की आवश्यकता होती है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि अंतिम तारीख का इंतजार न करें, क्योंकि आखिरी दिनों में वेबसाइट पर अधिक ट्रैफिक या तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं।

ITR फाइल करने के बाद e-Verification क्यों जरूरी है?

रिटर्न दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर उसका e-Verification करना अनिवार्य होता है। यदि यह प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती, तो आयकर विभाग रिटर्न को अधूरा या अमान्य मान सकता है।

ऐसी स्थिति में—

  • टैक्स रिफंड मिलने में देरी हो सकती है।

  • रिटर्न की प्रोसेसिंग रुक सकती है।

  • भविष्य में टैक्स संबंधी अन्य कार्य प्रभावित हो सकते हैं।

इसलिए ITR जमा करने के बाद तुरंत उसका वेरिफिकेशन करना बेहतर माना जाता है।

e-Verification का स्टेटस कैसे जांचें?

टैक्सपेयर्स आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करके ITR-V सेक्शन में अपने रिटर्न के वेरिफिकेशन का स्टेटस देख सकते हैं।

यदि वेरिफिकेशन लंबित है, तो वहीं से प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।

ITR का e-Verification कैसे करें?

ऑनलाइन e-Verification के लिए इन आसान चरणों का पालन करें—

  1. आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग-इन करें।

  2. e-Verify Return विकल्प चुनें।

  3. PAN, Assessment Year और Acknowledgement Number दर्ज करें।

  4. My Account सेक्शन में जाकर e-Verify Return पर क्लिक करें।

  5. जिन रिटर्न का वेरिफिकेशन बाकी है, उनकी सूची दिखाई देगी।

  6. संबंधित ITR के सामने e-Verify विकल्प चुनें।

इसके बाद उपलब्ध किसी भी माध्यम से वेरिफिकेशन पूरा किया जा सकता है।

e-Verification के लिए उपलब्ध तरीके

आयकर विभाग कई माध्यमों से e-Verification की सुविधा देता है। इनमें शामिल हैं—

  • Aadhaar OTP

  • Electronic Verification Code (EVC)

  • नया EVC जनरेट करके

  • नेट बैंकिंग

  • बैंक अकाउंट के जरिए EVC

  • डीमैट अकाउंट के जरिए EVC

  • चुनिंदा बैंकों के ATM से जनरेट किए गए EVC

सफल वेरिफिकेशन के बाद स्क्रीन पर Acknowledgement और Transaction ID दिखाई देती है। इसकी जानकारी रजिस्टर्ड ईमेल आईडी पर भी भेजी जाती है।

क्या कोई प्रतिनिधि भी ITR वेरिफाई कर सकता है?

यदि किसी टैक्सपेयर ने अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (Authorised Signatory) या Representative Assessee को अनुमति दी है, तो वह भी उसकी ओर से e-Verification कर सकता है।

इसके लिए भी Aadhaar OTP, Net Banking, EVC या अन्य मान्य माध्यमों का उपयोग किया जा सकता है।

यदि वेरिफिकेशन प्रतिनिधि द्वारा किया जाता है, तो पुष्टि का ईमेल टैक्सपेयर और अधिकृत प्रतिनिधि दोनों के रजिस्टर्ड ईमेल पर भेजा जाता है।

30 दिन के भीतर e-Verification नहीं किया तो क्या होगा?

यदि ITR दाखिल करने के बाद 30 दिनों के भीतर e-Verification नहीं किया जाता, तो आयकर विभाग आपके रिटर्न को दाखिल नहीं किया गया (Invalid Return) मान सकता है।

ऐसी स्थिति में आपको कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, जैसे—

  • टैक्स रिफंड में देरी

  • रिटर्न की प्रोसेसिंग रुकना

  • कर संबंधी अन्य प्रक्रियाओं में परेशानी

  • लागू नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई

समय निकल जाए तो क्या करें?

यदि किसी कारणवश तय समय में e-Verification नहीं हो पाया है, तो टैक्सपेयर Condonation of Delay के लिए आवेदन कर सकता है।

इस प्रक्रिया में देरी का उचित कारण बताना होता है। यदि आयकर विभाग आपका अनुरोध स्वीकार कर लेता है, तभी विलंब से किया गया e-Verification मान्य माना जाएगा और आपका ITR वैध रहेगा।

निष्कर्ष

ITR दाखिल करने के बाद e-Verification करना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पूरी टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। यदि आप समय पर यह प्रक्रिया पूरी नहीं करते हैं, तो आपका रिटर्न अमान्य माना जा सकता है और रिफंड सहित कई कर संबंधी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए ITR फाइल करने के तुरंत बाद उपलब्ध किसी भी मान्य माध्यम से e-Verification जरूर पूरा करें और भविष्य की परेशानियों से बचें।

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