EPF vs NPS: EPF या NPS किस स्कीम से मिलता ज्यादा रिटर्न, आइए जानें पूरी डिटेल्स
दोस्तो अगर आप एक नौकरीपैशा व्यक्ति हैं तो आपको रिटायरमेंट के बाद वाले दिनों के लिए सोचना चाहिए, 30 साल तक हर महीने ₹10,000 का निवेश करने से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, लेकिन कुल जमा राशि निवेश स्कीम और उससे मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करती है। तीन दशकों में, कुल निवेश ₹36 लाख होगा। भारत में रिटायरमेंट सेविंग के दो लोकप्रिय विकल्प हैं - एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) और नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS)। आइए जानते हैं कौन देता हैं ज्यादा रिटर्न

1. EPF से लगभग ₹1.57 करोड़ का फंड बन सकता है
एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) सैलरी पाने वाले कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट सेविंग का एक लोकप्रिय विकल्प है। यह सरकार द्वारा तय ब्याज दरें देता है और सीधे तौर पर रोज़ाना के शेयर बाज़ार के उतार-चढ़ाव से जुड़ा नहीं होता है।
- मासिक निवेश: ₹10,000
- निवेश की अवधि: 30 साल
- कुल योगदान: ₹36 लाख
- अनुमानित सालाना ब्याज दर: 8.25%
- अनुमानित मैच्योरिटी राशि: लगभग ₹1.57 करोड़
इस कैलकुलेशन में पूरी अवधि के दौरान एक जैसा रिटर्न मिलने का अनुमान लगाया गया है। हालाँकि, EPF की ब्याज दरें हर फाइनेंशियल ईयर में बदल सकती हैं। इसलिए असल रिटर्न अलग हो सकता है।
2. NPS से लगभग ₹2.26 करोड़ का फंड बन सकता है
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) बाज़ार से जुड़ी एसेट्स (संपत्तियों) में पैसा निवेश करता है, जिसमें इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटीज़ शामिल हैं। इसका रिटर्न बाज़ार के प्रदर्शन और चुने गए एसेट एलोकेशन पर निर्भर करता है।

- मासिक निवेश: ₹10,000
- निवेश की अवधि: 30 साल
- कुल योगदान: ₹36 लाख
- अनुमानित सालाना रिटर्न: 10%
- अनुमानित मैच्योरिटी राशि: लगभग ₹2.26 करोड़
9% सालाना रिटर्न के अनुमान पर, फंड लगभग ₹1.83 करोड़ तक पहुँच सकता है। ये आँकड़े सिर्फ़ उदाहरण के लिए हैं, इनकी गारंटी नहीं है।
3. पैसे निकालने के नियम और टैक्स फ़ायदे
EPF आम तौर पर योग्य सदस्यों को रिटायरमेंट के समय अपना जमा बैलेंस निकालने की अनुमति देता है, जो लागू नियमों के अधीन होता है। NPS में आम तौर पर रिटायरमेंट के समय नियमों के अनुसार जमा राशि (कॉर्पस) के कम से कम 40% हिस्से से एन्युइटी (पेंशन प्लान) खरीदना ज़रूरी होता है, जबकि 60% तक की राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है।
4. कौन सी स्कीम बेहतर है?
अगर मार्केट से अच्छा रिटर्न मिलता है, तो NPS में रिटायरमेंट के लिए बड़ा फंड जमा हो सकता है, जबकि EPF में तय ब्याज दरों की वजह से रिटर्न का अंदाज़ा लगाना आसान होता है।
